कोरोना में बड़े काम का है सहजन

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सहजन की पत्तियों से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता, तमाम रोगों से मिलेगी निजात

वनष्पति जगत में सहजन एक ऐसा पेड़ है, जिसका हर भाग हमारे शरीर के लिए रामबाण है। इसके फल की तो बात ही दूसरी है लेकिन सहज और बिना रुपये खर्च किए मिल जाने वाली सहजन की पत्तियां भी कम लाभदायक नहीं हैं। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए, सी और बी काम्प्लेक्स की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता वाली पत्तियों के सेवन से कोरोना से लड़ने में भी काफी सहायता मिल सकती है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में काफी वृद्धि होती है।

इस संबंध में बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के पंचकर्म विभाग के विभागाध्यक्ष डाक्टर जेपी सिंह का कहना है कि सहजन की पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, ऑयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटमिन ए, सी और बी काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो खून की कमी एवं कुपोषण दूर करने में सहायक है। इसके अलावा सहजन के बीज के आटे को बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता है। यह एक अच्छा हेल्थ सप्लीमेण्ट है।

उन्होंने कहा कि सहजन की पत्तियों में शुगर के स्तर को बैलेंस रखने की क्षमता होती है। यह डाइबिटीज से लड़ने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि सहजन की पत्तियां आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं, जिनमें तमाम रोगों को दूर करने की क्षमता होती है। इसका यदि काढ़ा बनाकर लोग सेवन करें तो तमाम रोगों से निजात मिल सकती है। उन्होंने कहा कि उपापचय (मेटाबोलिज्म) को ठीक रखने के लिए सहजन के तत्वों का सेवन बेहतर माना गया है। यह पाचन क्रिया को सही रखने में मददगार है।

आयुर्वेदाचार्य डाक्टर जेपी सिंह ने कहा कि सहजन की पत्तियों का काढ़ा, गठिया, सियाटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ देता है। यह मोच आने पर भी लाभदायक है। मोच आने पर सहजन की पत्ती की लुग्दी बनाकर उसमें थोड़ा सा सरसों का तेल डालकर आंच पर पकायें और फिर मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ होता है। सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालने एवं उल्टी दस्त रोकने के काम आता है।

उन्होंने कहा कि सहजन की पत्तियों को पीसकर यदि घाव पर लगाया जाए तो घाव व सूजन दोनों ही जल्द ठीक हो जाते हैं। इसके पत्तियों के रस से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है। विटामिन ए का बेहतरीन स्रोत है। यह आंख को स्वस्थ रखता है। सहजन की छाल में शहद मिलाकर पीने से वात व कफ शान्त हो जाता है। सहजन की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम मिलता है। सहजन के पेड़ की छाल का प्रयोग गोंद बनाने में किया जाता है।

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