जी के चक्रवर्ती
बिहार विधान सभा चुनाव 2020 की तारीखों की घोषणा होते ही वहां चुनावी घमासान शुरू हो चुका है इस गहमागहमी के बीच सबसे अहम बात यह है कि जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा का नीतीश कुमार के जेडीयू से गठबंधन लगभग तय है। दूसरी तरफ नीतीश कुमार ने अपने उद्योग मंत्री श्याम रजक की कुर्सी छीन कर उन्हें जेडीयू से निकाल दिया है। उधर आरजेडी पार्टी ने अपने तीन विधायकों को 6 वर्षों के लिए पार्टी से भी निष्काषित भी कर दिया है।
फिलहाल बिहार विधान सभा चुनाव के नतीजें 24 नवंबर को 2020 को आना शुरू हो आयेगा। ऐसे में बिहार में चुनावी के लिये प्रत्येक पार्टी अपने अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारने के लिये उनकी छवियों और किये गए कामों के बखान करने लग गये हैं।

जैसा कि भारतीय राजनीति की परम्परा है कि चुनाव के आते हो राजनेता लोग अपनी-अपनी छवि को साफ सुथरा बनाने और उनके द्वारा किये गये कामो का बखान या आगे उनके द्वारा कराये जाने कामो का लेखा जोखा प्रस्तुत करने लगते है। इस परिदृश्य में मोजूदा समय वर्ष 2020 में बिहार में होने वाले चुनाव के मध्येनजर अभी पिछले मंगलवार 8 सितांम्बर को देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के निवासियों को एक नही दो नहीं बल्कि सात परियोजनाओं की सौगातें दे डाली।
वैसे यह कहना को अतिश्योक्ति नहीं होगी कि बिहार में नीतीश कुमार के कार्यकाल में बिहार प्रदेश का पहले की अपेक्षा बहुत विकास जरूर हुआ है लेकिन वहां के जंगल राज को एकदम से समाप्त कर पाना भी इतना आसान नही था।
वैसे यदि बिना किसी लागलपेट के कहा जाये तो बिहार में सत्तारूढ़ दल जदयू ने बिहार में अनेको तरह के विकास कार्यों को किया है। पिछले चुनाव में जदयू का नारा- ‘बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार हैं’। उसे उस वख्त बिहार की जनता ने जबर्दस्त तरीके से तवज्जो दिया था लेकिन इस बार पार्टी ने दो नए नारे दिये हैं जिसमे से पहला- ‘क्यों करें विचार, ठीके हैं नीतीशे कुमार’। दूसरा नारा है- ‘सच्चा है, अच्छा है, चलो नीतीश के साथ चलें’। के साथ विधानसभा चुनाव 2020 का आगाज किया है।







