- रिलायन्स की रोजा से खरीदी जाने वाले बिजली की दर रू0 5.04 प्रति यूनिट की गयी है प्रस्तावित
- उपभोक्ता परिषद ने सरकार से उठायी मांग निजी घरानो की मंहगी बिजली खरीद पर सरकार लगाये अंकुश, तभी उपभोक्ताओं को मिल पायेगी सस्ती बिजली
- बजाज हिन्दुस्तान से सबसे मंहगी बिजली खरीदेगी कम्पनियाॅं
प्रदेश की बिजली कम्पनियों मध्यांचल, पूर्वाचंल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल हेतु दाखिल वर्ष 2017-18 हेतु मल्टी इयर टैरिफ (एमवाईटी) वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ए0आर0आर0) व बिजनेस प्लान में वर्ष 2017-18 के लिये प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा विभिन्न उत्पादन गृहों से जो कुल बिजली खरीद प्रस्तावित हैै वह लगभग 128908 मिलियन यूनिट है। जिसकी कुल लागत 52919 करोड है और कुल औसत बिजली खरीद की दर रू 4.11 प्रति यूनिट बतायी गयी है, यदि इसमें निजी घरानों से खरीद की जाने वाली बिजली पर नजर डालें तो निजी घरानों से जो कुल बिजली खरीद की जानी है वह लगभग 57580 मिलियन यूनिट जिसकी कुल लागत 25457 करोड है। वर्ष 2017-18 के लिये प्रमुख निजी घरानों से जो रू0 5 प्रति यूनिट से ऊपर बिजली खरीद प्रस्तावित की गयी है वह निम्नानुसार देख कर स्वतः अन्दाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में बजाज हिन्दुस्तान से सबसे मंहगी बिजली खरीद प्रस्तावित की गयी है।
प्रदेश की बिजली कम्पनियों मध्यांचल, पूर्वाचंल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल हेतु दाखिल वर्ष 2017-18 हेतु मल्टी इयर टैरिफ (एमवाईटी) वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ए0आर0आर0) व बिजनेस प्लान में वर्ष 2017-18 के लिये प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा विभिन्न उत्पादन गृहों से जो कुल बिजली खरीद प्रस्तावित हैै वह लगभग 128908 मिलियन यूनिट है। जिसकी कुल लागत 52919 करोड है और कुल औसत बिजली खरीद की दर रू 4.11 प्रति यूनिट बतायी गयी है, यदि इसमें निजी घरानों से खरीद की जाने वाली बिजली पर नजर डालें तो निजी घरानों से जो कुल बिजली खरीद की जानी है वह लगभग 57580 मिलियन यूनिट जिसकी कुल लागत 25457 करोड है। वर्ष 2017-18 के लिये प्रमुख निजी घरानों से जो रू0 5 प्रति यूनिट से ऊपर बिजली खरीद प्रस्तावित की गयी है वह निम्नानुसार देख कर स्वतः अन्दाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में बजाज हिन्दुस्तान से सबसे मंहगी बिजली खरीद प्रस्तावित की गयी है।

उत्पादन गृह का नाम प्रस्तावित कुल खरीद लागत प्रस्तावित औसत लागत दर
- बजाज हिन्दुस्तान रू0 1773 करोड रू0 7.22 प्रति यूनिट
- रोजा पावर प्रोजेक्ट प्रथम रू0 2046 करोड रू0 5.03 प्रति युनिट
- रोजा पावर प्रोजेक्ट द्वितीय रू0 2047 करोड रू0 5.04 प्रति युनिट
- ललितपुर प्रोजेक्ट (बजाज ग्रुप) रू0 4730 करोड रू0 5.04 प्रति युनिट
- श्रीनगर रू0 663 करोड रू0 5.84 प्रति युनिट
सबसे बडा चैंकाने वाला मामला यह है कि जहाॅं उत्तर प्रदेश में पावर एक्सचेंज से सस्ती बिजली उपलब्ध होते हुए भी निजी घरानों से मंहगी बिजली उनके पावर परचेज एग्रीमेन्ट की शर्तों के मुताबिक खरीदने के लिये विवश होना पडता है ऐसे में इन सभी निजी घरानों के पीपीए को पुनर्विचार कर उनकी मंहगी दरों पर अंकुश लगाना अति आवश्यक है तभी प्रदेश के उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलग्ध हो पायेगी। उ0 प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ता परिषद लगातर एमओयू रूट के तहत उ0 प्र0 में पिछली सरकारों ने लगे उत्पादन गृह की मंहगी बिजली खरीद का हमेशा विरोध करता रहा है। इस बार भी जो एआरआर नियामक आयोग में दाखिल किया गया है उसमें निजी घरानों से जो बिजली खरीद की जानी है उसकी लागत बहुत ज्यादा है।
ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार को ऐसे उत्पादन गृहों के पीपीए को पुर्न समीक्षा कर इन्हें कैंसिल किया जाना चाहिये। जहाॅं एक तरफ पावर एक्सचेंज व बाई लिट्रल से पावर कारपोरेशन द्वारा जो कुल बिजली खरीद वर्ष 2017-18 के लिये प्र्रस्तावित है वह लगभग 2507 मिलियन यूनिट है और उसकी दरें रू0 3.80 प्रति युनिट ही है। अर्थात पावर एकसचेन्ज पर सस्ती बिजली उपलब्ध होते हुए भी बिजली कम्पनियेां को निजी घरानों से मंहगी बिजली खरीदने के लिये विवश होना पड रहा है। ऐसे में उ0 प्र0 सरकार को इन सब पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उ0 प्र0 सरकार सभी को 24 घण्टा बिजली उपलब्ध करानी चाहती है अच्छी बात है परन्तु उ0 प्र0 सरकार को यह भी सोचना होगा कि क्या निजी घरानों की मंहगी बिजली की खरीद करके उपभोक्ताओं को मंहगी बिजली दिया जाना उचित होगा। क्योंकि प्रदेश का उपभोक्ता बहुत ज्यदा मंहगी बिजली वहन करने हेतु बिल्कुल सक्षम नही है।







