बिजली दर बढ़ोत्तरी न होने के लिये लगा देंगे पूरा दम: उपभोक्ता परिषद

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इस बार बिजली कम्पनियों ने 16 प्रतिशत मांगा आरओई, जिसका खामियाजा भविष्य में जनता का पड़ेगा

प्रदेश की 4 बिजली कम्पनियों मध्यांचल, पूर्वाचंल, पश्चिमांचल, दक्षिणांचल का वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 का मल्टी इयर टैरिफ (एमवाईटी)वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ए0आर0आर0), बिजनेस प्लान व वर्ष 2014-15 का ट्रू-अप आज पावर कार्पोरेशन की तरफ से विद्युत नियामक आयोग में देर शाम दाखिल कर दिया गया केस्को आज नही दाखिल किया गया। भले ही अभी बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव नहीं दाखिल किया गया है लेकिन वहीं दूसरी ओर सभी बिजली कम्पनियों के पहले वर्ष 2017-18 के ए0आर0आर0 पर नजर डालें तो वह लगभग 68,674 करोड़ का है। जिसमें बिना सब्सिडी के जो गैप सामने आ रहा है वह लगभग 20618 करोड़ का है सरकार से मिलने वाली लगभग 5500 करोड़ सब्सिडी को गैप से हटा दिया जाय तो लगभग 15118 करोड़ का गैप होगा। इस बार बिजली कम्पनियों ने पहली बार 16 प्रतिशत आर0ओई0 (रिटर्न आफ इक्यूटी) भी मांगा है जिससे गैप इतना ज्यादा बढ़ गया आने वाले समय में इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगताना पड़ेगा बिजली कम्पनियों द्वारा जो लाइन हानियां प्रस्तावित वह लगभग 19 प्रतिशत है वहीं साल भर के लिये जो बिजली खरीद प्रस्तावित है वह लगभग वर्ष 2017-18 के लिये 128908 मिलियन यूनिट है जिसकी कुल लागत लगभग 52919 करोड़ है। यदि इसमें ट्रांसमीसन चार्ज भी जोड दिया जाये तो वह लगभग 54787 करोड होगी। सभी श्रोतों से बिजली खरीद की औसत लागत लगभग रू0 4.11 प्रति यूनिट आ रही है। इस बार उपभोक्ता छोर पर बिजली की औसत लागत लगभग रू0 7.23 प्रति यूनिट आ रही है।
उ0प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस बार भी बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल ए0आर0आर0 बिना सीएजी द्वारा आटिडेट आकड़ों के हैं उपभोक्ता परिषद जल्द ही पूरे ए0आर0आर0 का अध्ययन करेगा और इसके बाद नियामक आयोग में अपनी लड़ाई प्रारम्भ करेगा। इस बार बिजली कम्पनियों द्वारा बड़ी चालाकी से 16 प्रतिशत आरओई मांगा गया है सवाल यह उठता है अभी तक बिजली कम्पनियाँ बिना आरओई के कैसे अपना काम चला रही थी कहीं इसके पीछे भविष्य में निजी करण की कोई चाल तो नहीं इस पूरे मामले पर गम्भीरता से अध्ययन किया जायेगा। उपभोक्ता परिषद इस बात की भी छान-बीन करेगा कि बिजली कम्पनियों द्वारा किन-किन निजी घरानों से मंहगी बिजली खरीद प्रस्तावित की गयी है।

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