लखनऊ की जानी-पहचानी वरिष्ठ रंगकर्मी, टीवी-रेडियो और फिल्म अदाकारा प्रतिमा धूसिया का ह्दयघात पड़ने से देहांत हो गया। वो 58 वर्ष की थीं। ज़िन्दगी एक रंगमंच है जहां शो तो हमेशा चलता रहेगा लेकिन हर एंट्री लेने वाले को एक्जिट लेनी पड़ेगी। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रतिमा धूसिया ने एकाएकी एक्ज़िट ले ली। जिन्दगी से भी और रंगकर्म से भी। कल वो मेरे एक व्यंग्य पर मुस्कुरायीं और आज कला जगत को रुलाकर चल दीं।

वरिठ पत्रकार नवेद शिकोह ने अपनी वॉल पर लिखा कि इधर कई वर्षों से थियेटर से दूरी बनी होने के कारण तमाम रंगकर्मी मित्रों की तरह प्रतिमा जी से भी अरसे से मुलाकात नहीं हुई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर हम रोज मिलते थे और एक दूसरे मुखातिब होते थे। वो मेरी हर एक पोस्ट पर रिएक्ट करती थीं। एक दिन मैंने पूछा कि आपको क्या संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड नहीं मिला, आप तो बहुत सीनियर, सक्रिय और प्रतिभाशाली हो !
वह उदास हो गयीं और बोलीं- हमारी पॉलीटिकल पंहुच नहीं है।
एक स्मरण और- अभी हाल मे ही उन्होंने आकाशवाणी या दूरदर्शन के किसी मुलाजिम से शिकवा किया कि उन्हें बहुत अरसे से कार्यक्रम नहीं मिला। जवाब मिला कि कोविड के कारण रिकार्डिंग कम हो रही है।
फेसबुक पर एक ताजा तस्वीर देखी जिसमें उनकी रिकार्डिंग होती नजर आ रही थी। देखकर खुशी हुई। और आज बेहद ग़म हुआ जब फेसबुक पर ही ये मनहूस खबर मिली कि लखनऊ के रंगमंच को बेरंग करके चली गयीं प्रतिमा दीदी।
उनके दर्जनों रंगमंचीय नाटक, रेडियो नाटक, टीवी धारावाहिकों, टेलीफिल्मों और फिल्मों की लम्बी कतार है। करीब तीन दशक कला जगत को समर्पित ये अदाकारा थियेटर, रेडियो और टीवी की दुनिया में हमेशां ज़िन्दा रहेंगी।







