उप्र के 326 निजी इन्जीनियरिंग कालेजों में छात्रों का टोटा, बंदी के कगार पर

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लखनऊ। सरकार द्वारा कौशल प्रशिक्षण और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के बावजूद उत्तर प्रदेश के निजी इन्जीनियरिंग कॉलेज छात्रों की कमी के कारण बंदी के कगार पर हैं। प्रदेश के प्रतिष्ठित एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल विश्वविद्यालय द्वारा संचालित 326 निजी कॉलेज ऐसे हैं जहां एक भी छात्र नहीं है। हालांकि, कॉलेजों की इस स्थिति का अध्यन किया जा रहा है। निजी क्षेत्र के इन्जीनियरिंग कॉलेजों में जहां एक भी छात्र नहीं हैं वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा संचालित कॉलेजों में 100 फीसदी सीटें भरी हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि नए सत्र वर्ष 2017-18 के दौरान हुए नए छात्रों ने इन कॉलेजों में दाखिला नहीं लिया। इन कॉलेजों को विद्यार्थियों ने पूरी तरह नकार दिया। उत्तर प्रदेश में एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल विश्वविद्यालय द्वारा संचालित 584 इन्जीनियरिंग कॉलेज हैं। नए सत्र के दौरान दाखिले के लिए हुए पांचवें चक्र की काउंसिलिंग के बाद 134 कॉलेजों में एक से नौ बच्चों ने प्रवेश लिया। लखनऊ के 28 कॉलेज ऐसे हैं जिनके पास आवंटन के बावजूद प्रवेश शून्य है। राजधानी के 18 कॉलेज ऐसे है जहां किसी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि कॉलेजों के लिए बड़ी चिन्ता का विषय है कि सीट लॉक करने और फीस का भुगतान करने के बाद भी छात्रों ने प्रवेश नहीं लिया। यह विश्वविद्यालय के विफलता का संकेत है। इसमें सुधार किए जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि 76 कॉलेज ऐसे है जहां 11 से 50 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। 12 सरकारी कॉलेजों को छोड़कर प्रदेश के 34 कॉलेज ही ऐसे है जहां 50 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। ऐसे कॉलेज ही विश्वविद्यालय की शाख को बचाए हैं। एक अधिकारी ने कहा कि इन कॉलेजों के खराब प्रदर्शन के लिए बुनियादी ढांचा न होना, अयोग्य संकाय तथा जगह की कमी होना जिम्मेदार है।

एकेटीयू के कुलपति विनय पाठक के अनुसार इंजीनियरिंग में छात्रों की रूचि कम होना एक वैश्विक घटना है। छात्र अब गुणवत्ता और अपने कैरियर के प्रति जागरूक हैं। वे उस ओर देखते है जहां उन्हें अपना भविष्य सुरक्षित दिखायी देता है। वे ऐसे कॉलेज चुनते हैं जहां प्रशिक्षण और नियुक्ति की विशेष सुविधाए प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि अब केवल गुणवत्ता वाले कॉलेज ही मुकाबला कर पायेंगे। उत्तर प्रदेश में 25 से 30 हजार कुशल इंजीनियरों की हर साल जरूरत है। पाठक ने कहा कि 18 से 22 हजार विद्यार्थी काउंसलिंग के लिए आते हैं। इनमें से दस हजार सीटें निजी कॉलेजों की हैं, लेकिन विद्यार्थी निजी कालेजों में संसाधनों की कमी के कारण प्रवेश लेने से बचते हैं। सूत्रों ने बताया कि वे कॉलेज शीघ्र ही बंद हो जाएंगे जहां छात्र प्रवेश नहीं ले रहे हैं।

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