चांदनी चौक से सुपरस्टार तक का सफर, अक्षय ने खोला दिल, कहा “एक दिन कैमरे बंद होंगे, लेकिन मैं काम करता रहूंगा”
मुंबई: बॉलीवुड के खानदान अक्षय कुमार आज लाखों-करोड़ों के हीरो हैं, लेकिन स्टारडम की चमक के पीछे की हकीकत से वे अच्छी तरह वाकिफ हैं। हाल ही में एक खुली बातचीत में अक्षय ने पैपराज़ी, नींद छीनने वाले फ्लैश और उस दिन के डर को बिना लाग-लपेट के बताया, जब शायद कोई कैमरा उनका पीछा न करे।
रात 4:30 बजे भी सुबह जैसा माहौल
अक्षय ने बताया, “मेरी नींद 4:30 बजे खुल जाती है और बाहर निकलते ही लगता है जैसे 9 बज गए हों – पैपराज़ी, फ्लैश, भीड़… ये अब मेरी जिंदगी का हिस्सा है।” उनके मुताबिक स्टार की लाइफ में प्राइवेट और पब्लिक का फर्क लगभग मिट जाता है। चमक जितनी आकर्षक, उतना ही दबाव भी।
“एक दिन आर्क लाइट्स बंद हो जाएंगी”
सबसे ईमानदार बात ये कही कि शोहरत स्थायी नहीं होती। “एक दिन ऐसा आएगा जब कैमरे नहीं होंगे, लाइट्स नहीं जलेंगी… लेकिन मैं इससे डरता नहीं। मैं जितना हो सके, काम करता रहूंगा – एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा, इमोशन – हर तरह की फिल्में। खुद को किसी एक बॉक्स में नहीं बांधना चाहता।”
चांदनी चौक की गलियों से मिला सबक
दिल्ली के चांदनी चौक में बिताए बचपन को याद करते हुए अक्षय ने कहा, “मुझे ये मौका मिला, जो बहुत कम लोगों को मिलता है। लोग मेरी फिल्में देखते हैं, प्यार करते हैं… तो मैं इसे क्यों छोड़ूं? ये जुनून है, सिर्फ करियर नहीं।”
अक्षय कुमार का ये नजरिया बताता है कि असली सुपरस्टार वही है जो सफलता को जुनून और कद्र से जीता है – न कि सिर्फ चमक से। क्योंकि शोहरत आती-जाती है, लेकिन काम और जुनून हमेशा साथ रहते हैं।







