अब तक चालीस किसानों की मौत, किसानों ने कहा अपने हक़ के लिए लड़ेंगे, किसानों ने रखी शर्त एमएसपी पर भी होनी चाहिए बातचीत, 40 किसान संगठनों की बैठक में बनी वार्ता पर सहमति
किसान और सरकार के बीच लगातार गतिरोध जारी है आंदोलन के 32वें दिन एक बार फिर केंद्र सरकार से बातचीत के न्योते की चिट्ठी पर किसानों ने शनिवार को फैसला ले लिया। उन्होंने तय किया है कि बातचीत फिर शुरू की जाएगी, लेकिन शर्ते जारी रहेंगी।
किसान नेता 29 को सरकार के साथ बैठक को तैयार, चिठ्ठी में लिखा एजेंडा
किसान नेता राकेश टिकैत ने यह जानकारी मीडिया से शेयर की। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे 40 किसान यूनियनों के मुख्य संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की एक बैठक में यह फैसला किया गया।

राकेश टिकैत ने कहा कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने, एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी सरकार के साथ बातचीत का एजेंडा होना चाहिए। बता दें कि सरकार भी किसानों से कई बार अपील कर चुकी है कि वे आंदोलन का रास्ता छोड़े और बातचीत शुरू करें। बीच में किसानों ने सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा था कि वो आग से न खेलें और आंदोलन को हल्के में न लें।
एनडीए को दिया बड़ा झटका बेनीवाल ने
अकाली दल के अलायंस छोड़ने के 3 महीने के बाद एक और सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी एनडीएसे अलग हो गई। अलवर के शाहजहांपुर-खेड़ा बॉर्डर पर आरएलपी के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने एनडीए से अलग होने का ऐलान किया। किसानों के मुद्दे पर बेनीवाल ने 19 दिसंबर को संसद की तीन समितियों से भी इस्तीफा दे दिया था। हनुमान बेनीवाल लोकसभा चुनाव से पहले अप्रैल 2019 में अपनी पार्टी आरएलपी के साथ एनडीए से जुड़े थे।
किसानों ने रखी शर्त
किसानों ने बैठक का एजेंडा तय करते हुए शर्ते लिखी हैं। तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि तय हो। सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान किया जाए।







