मिर्च सहित सब्जी के किसानों को अब खेत की तैयारी शुरू कर देना चाहिए। वर्तमान में अच्छी बारिश हुई है। अभी बंगाल की खाड़ी से उठे तुफान के कारण भी उत्तर प्रदेश में बारिश होने की संभावना है। जैसे ही बारिश के बाद खेत जुताई के लिए तैयार हो जाय, गहरी जुताई कर 15 से 20 दिन तक उसे जलने के लिए छोड़ देनी चाहिए। इससे खरपतवार खत्म होने के साथ ही मिट्टी भी अच्छी हो जाएगी। मिर्च की नर्सरी 15 जून के बाद लगा देनी चाहिए। नर्सरी डालने से पहले नर्सरी के खेत को भी अच्छे ढंग से तैयार कर लेना चाहिए। ये बातें सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ राजेश कुमार राय ने कही।
उन्होंने बताया कि मिर्च की फसल किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे आसानी से 200 कुंतल प्रति हेक्टेयर निकाला जा सकता है। मिर्च की खेती के लिए वैज्ञानिक पद्धति अपनाना बहुत जरूरी है।
डाक्टर राजेश कुमार राय ने बताया कि हमारे संस्थान ने भी मिर्च की दो किस्में विकसित की हैं। पहले का नाम काशी अर्ली और दूसरे का नाम काशी अनमोल है। काशी अनमोल की खेती वाराणसी में किसान काफी मात्रा में किये थे। जो भी अच्छे ढंग से खेती किये, उनके मिर्च की पैदावार 250 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक गई है।
डॉ राय ने बताया कि मिर्च की नर्सरी डालने से पहले यह ध्यान देना चाहिए कि अगल-बगल में रोग ग्रस्त टमाटर आदि का पौधा न हो, क्योंकि वहीं से सफेद मक्खी रोग को आगे फैलाती है।
उन्होंने कहा कि बीज डालने से पहले पानी में भीगोकर सूखा देना चाहिए। फिर बेवस्टीन या कोई अन्य फंगस साइड्स दवा से शोधित कर देना चाहिए। डाक्टर राजेश ने बताया कि मिर्च की अनेकों प्रजातियां बाजार में उपलब्ध हैं। किसानों को इनका परीक्षण के बाद ही लेना चाहिए।







