उन्हें मोहब्बत में चोट खाए आशिक अधिक सुना करते थे

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कुछ मस्त यादें: अंशुमाली रस्तोगी
मैं कल से अताउल्लाह खां को सुन रहा हूं। वही अताउल्लाह जिनके दर्द भरे गाने व गजलें 90 के दशक में अपनी जगह और पहचान रखते थे। उन्हें मोहब्बत में चोट खाए आशिक अधिक सुना करते थे। और सुकून पाते थे कि चलो कोई तो है, जो हमारे दर्द-गम से वाकिफ है।
मैंने अता साहब को सबसे पहले तब सुना था, जब अपने पहले इश्क में मुंह की खाई थी। बड़ा मजा आया था उस इश्क के असफल रहने पर। फिर उसके बाद कई और भी इश्क फरमाए बारी-बारी से सब छूट गए। मगर अनुभव धांसू रहा। तब एक रोज किसी ने अताउल्लाह खां की कैसेट सुनने को दी। सुना और दबाके सुना। उन्हें सुनने के बाद लगा ये इश्क-मोहब्बत सिर्फ टाइम-पास के लिए है, असली आनंद तो शराब में है। उसमें डूबे रहो और मौज करो। दुनिया मस्त और रंगीन दिखेगी।
शराब पर गईं उनकी गजलें अद्भुत हैं। बोतल से ग्लास में और उसके बाद सीधे दिल में उतर जाती हैं। उनकी गाई एक ग़ज़ल का शेर है- ‘जिंदगी जब से शराबी हो गई, दूर दिल से हर खराबी हो गई…’ और भी बहुत सारी हैं। उन्हें सुनिए और जिंदगी की मौज लीजिए।

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