जन्मदिन विशेष: बेहद संजीदा कलाकार थे दादामुनि हर कला के फ्रेम में हो जाते थे फिट

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जन्म: 13 अक्टूबर, 1911- निधन 10 दिसंबर 2001

अशोक कुमार साहब हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार रहे व उनके अभिनय शैली में एक अलग तरह की सहजता सरलता दिखाई देती थी। आज 13 अक्टूबर, 1911 को अशोक कुमार साहब का जन्म हुआ था। अशोक कुमार जी बेहद संजीदा कलाकार थे और वह हर कला के फ्रेम में फिट हो जाते थे। प्यार से लोग उन्हें दादामुनि कहते थे।

सन् 1936 में बांबे टॉकीज की फ़िल्म (जीवन नैया) निर्माण के समय हिमांशु रॉय साहब उन्हें लेकर आए और सन् 1937 मे अशोक कुमार को बांबे टॉकीज के बैनर तले प्रदर्शित फ़िल्म ‘अछूत कन्या’ में काम करने का मौका मिला। इस फ़िल्म में जीवन नैया के बाद ‘देविका रानी’ फिर से उनकी नायिका बनी।

अभिनेत्री नूतन के कहने पर अशोक कुमार ने एक बार फिर से बिमल रॉय के साथ सन् 1963 मे प्रदर्शित फ़िल्म बंदिनी मे काम किया यह फ़िल्म हिन्दी फ़िल्म के इतिहास में आज भी क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। सन् 1967 मे प्रदर्शित फ़िल्म ज्वैलथीफ. में अशोक कुमार के अभिनय का फिर नया रूप दर्शको को देखने को मिला। सन् 1968 में प्रदर्शित फ़िल्म आर्शीवाद खास तौर पर उल्लेखनीय है।

दादामुनि यानि अशोक कुमार की प्रमुख फिल्में हैं: गुमराह, कानून, हावड़ा ब्रिज, चलती का नाम गाड़ी, मिस्टर एक्स,महल,शतरंज, मिली,आनंद आश्रम, विक्टोरिया नंबर 203 ,वंदिनी, इत्यादि रही।

फ़िल्म में बेमिसाल अभिनय के लिए उनको सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। सन् 1984 मे दूरदर्शन की पहले शोप ओपेरा हमलोग में वह सीरियल के सूत्रधार की भूमिका मे दिखाई दिए व सन् 1988 में हिन्दी सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया। आपका निधन 10 दिसंबर 2001 में हुआ था।

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