सच्चे मन से कुम्भ पहुंचने वाले मां गंगा के दरबार से खाली हाथ नहीं जाते!

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प्रयाग के कुम्भ में अब तक करोड़ों लोगों ने पुण्य की डुबकी लगायी है। संगम की रेती तक पहुंचने वाले जनसैलाब की अपनी-अपनी चाहत है। आस्था और विास के इस संगम में अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष की प्राप्ति के लिए त्रिवेणी से मिन्नतें की जा रही हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सबको आशीष देती हैं और सच्चे मन से पहुंचने वाले मां के दरबार से खाली नहीं जाते। इसी चाहत में मां गंगा के तट पर लगे नेत्र कुम्भ से लाखों लोग जुड़ चुके हैं। सेक्टर 6 के नेत्र कुम्भ पंडाल की भारी भीड़ कुम्भ में एक और कुम्भ का बोध करा रही है। आंख के बगैर किसी भी भव्यता-दिव्यता के कोई मायने नहीं होते। ज्योति से ही जीवन परमानंद के दर्शन और अनुभूति दोनों करता है। कुम्भ और सूर्य की गति के साथ त्रिवेणी दर्शन की शास्त्रीय मान्यताओं के साथ नेत्रों को ज्योति के लिए भी भगवान भाष्कर को याद किया जाता है। ‘‘ऊं नमो भगवते सूयरेपाक्षितेजसे नम:’ के मंत्र जाप से भी नेत्र ज्योति की कामना की जाती है। सूर्य के प्रभाव के साथ संगम की रेती पर चल रहे जनकुंभ के साथ नेत्रकुम्भ का महत्व इससे भी कहीं अधिक है।

तर्क है कि यदि नेत्र ज्योति ही नहीं रही, तो कुम्भ नगर का अलौकिक दर्शन संभव नहीं है। संतों के रूप स्वरूप से लेकर कुम्भ के इन्द्रधनुषी रूप और अन्य आयोजन की सुखद अनुभूति भी ज्योति के बिना संभव नहीं है। नेत्र कुम्भ की सार्थकता इसी से समझी जा सकती है। मेले के सेक्टर-6 के बजरंगदास मार्ग पर प्रदेश के सोशल आउट रीच प्रोग्राम सेल, किंग जार्ज चिकित्सा विविद्यालय द्वारा नेत्र कुम्भ का आयोजन किया जा रहा है। करीब आधा दर्जन संस्थाओं के सहयोग से नयन ज्योति के जरिये सार्थक जीवन देने की कोशिश की जा रही है।

नेत्र कुम्भ के व्यवस्था प्रमुख सत्य विजय सिंह की मानें तो बीते 12 जनवरी से चल रहे इस कुम्भ से एक लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। इसमें करीब 82 हजार नेत्र रोगियों का परीक्षण किया गया और 60570 लोगों को चश्मा दिया गया। इस नि:शुल्क शिविर से गंभीर रोगियों को शहर के अस्पतालों में भेजकर उनकी दवा और आपरेशन कराये जा रहे हैं। इसके लिए 20 ओपीडी काउंटर चलाए जा रहे हैं और प्रत्येक टीम में छह स्टाफ दिये गये हैं। दर्जनों डाक्टरों और स्टाफ इस नेत्र कुम्भ के संचालन में दिन रात जुटे हैं। इसमें रज्जू भैया न्यास, भाऊराव सेवा संस्थान, सक्षम, एनएमओ नेत्र संस्थान, गंगाराम हास्पिटल दिल्ली के साथ द हंस फाउंडेशन आई केयर, बहदराबाद हर्विार की टीम इस कुम्भ से जुड़ने वालों की सेवा, व्यवस्था में जुटे हैं।

यह कुम्भ आयोजन के साथ 4 मार्च तक चलेगा। नेत्र कुम्भ की व्यवस्था में राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ के साथ उनके अनुवांशिक संगठनों की बड़ी भूमिका है।पौराणिक मान्यताओं में सूर्यदेव को नेत्र प्रकाश का स्रेत बताया गया है। शास्त्रीय मत में ‘‘नेत्र प्रकाश भगवान सूर्यदेव नमतुभ्यम्’ असत से सत की कामना रजोगुण रूपी देव भगवान सूर्य से की जाती है तमोगुण के आश्रयभूत भगवान सूर्यदेव की स्तुति नेत्र ज्योति के लिए सदा की जाती रही है। सूर्यदेव के उष्ण स्वरूप और शुचि रूप से तेज की कामना की गयी है।

चाक्षुषोपनिषद स्रेत के21 बार पाठ करने से आंखों की ज्योति में लाभ मिलता है। सूर्य के मकर राशि के प्रभाव को पुण्यदायी और फलदायी बताया गया है। त्रिवेणी स्नान, दान अैर मनसा, वाचा, कर्मणा के पूरे होने की अपेक्षा भगवान भाष्कर के सहयोग से मानी जाती है। रेती पर चल रहे नेत्र कुम्भ तक पहुंचने वाले लोगों की भी ऐसी ही सोच है। भगवान सूर्य देव और मां गंगा की कृपा से चमत्कार संभव है।नेत्र कुम्भ में आये प्रतापगढ़ के रामसजीवन जो 55 वर्ष के हैं, कतार में खड़े थे।

उन्होंने बताया कि इस शिविर में आंख जांच कराने आया हूं। शहर में कई बार दिखाया, लेकिन आंखों से बराबर पानी आता है। शायद गंगा मैया का आशीर्वाद लग जाए और आंख ठीक हो जाए। रीवां के लखपति और उनकी धर्मपत्नी रामकली भी इस नेत्रकुम्भ से जुड़ चुकी हैं। उन्होंने भी दैवीय चमत्कार की अपेक्षा की है। त्रिवेणी के कुम्भ से नेत्र कुम्भ तक जो डोर बंधी है, उसमें अध्यात्म दर्शन के साथ लौकिक-अलौकिक भाव के साथ मां गंगा और सूर्यदेव पर विास टिका है।

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