लखनऊ। सूबे की सरकार ने भले ही घाटों को वसूली से मुक्त कर दिया हो लेकिन गुंडों की वसूली खुलेआम जारी है। अमावस्या के दिन इसी घाट से हजारों लोग चंद्रिका देवी मंदिर दर्शन के लिए जाते हैं। नवरात्र में भी रोजाना बड़ी संख्या में इसी घाट से उतरकर लोग मंदिर पहुँचते हैं।
गोमती नदी का कोलवा स्थित रामघाट विवाद का केंद्र बन गया। बसपा सरकार में घाट से चंद्रिका देवी मंदिर जाने के लिये पीपे का अस्थाई पुल बनवाया था। वर्ष 2010 में बने इस पुल को बरसात के समय हटा लिया जाता है। बारिश में सरकारी नाव चलती है, जो आवागमन के लिए पर्याप्त नहीं है। सपा सरकार आयी तो रामघाट पर पक्के पुल के निर्माण की स्वीकृति मिली। निर्माण कार्य शुरू भी हो गया था। बीच में ही पुल के निर्माण पर ग्रहण लग गया। बीकेटी क्षेत्र के एक कद्दावर नेता का भी नाम चर्चा में आया। मशीनें आज भी जहां की तहां खड़ी जंग खा रही हैं। क्षेत्रवासी पुल निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री के दरबार भी गये, फिर भी निर्माण आगे नहीं बढ़ा। हाँ सरकार ने घाट की टोल टैक्स वसूली जरूर बंद करा दी थी। गत बीस सितंबर को अमावस्या के दिन घाट पर नाव डूबते बची थी। यहाँ पर एक छोटी सरकारी नाव चलती है। कुछ दबंगों ने इस नाव में एक और नाव जोड़कर चलना शुरू कर दिया। वसूली के साथ घाट पार करने को लेकर कुछ लोगों ने इसका विरोध किया तो गुंडे मारपीट पर उतर आये। जान जोखिम में डालकर भी लोग वसूली देते हैं। कोलवा गांव निवासी सामाजिक कार्यकर्त्ता राकेश सिंह उर्फ बउवा ने बताया कि घाट पर कुछ लोग गैरकानूनी तरीके से वसूली करते हैं। साथ ही लोगों की जान भी खतरे में डालते है। घाट पर बने चित्तेस्वर महादेव मंदिर के ट्रस्टी होने के नाते उन्होंने शासन व प्रशासन का घ्यान इस ओर खींचा। कोई कार्यवाई नहीं हुई तो वह भी चुप हो गये। बउवा ने बताया कि अमावस्या के दिन हुये विवाद की सूचना पुलिस और उपजिलाधिकारी को भी दी गयी थी। दो सुरक्षाकर्मी मौके पर आये और चले गये। राकेश सिंह उर्फ बउवा ने अब शासन के आलाधिकारियों को पत्र भेजकर कार्यवाई करने की बात कही है।







