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    Home»इंडिया

    जीएसटी लागू: किसी ने स्वागत किया, किसी ने विरोध

    By July 1, 2017 इंडिया No Comments7 Mins Read
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    आखिरकार शुक्रवार आधी रात को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रात ठीक 12 बजे संसद के सेंट्रल हॉल में घंटा बजाकर जीएसटी लागू कर दिया। इसके साथ ही एक देश एक टैक्स का सपना भी साकार हो गया।

    जीएसटी के लागू होते ही वैट, सेवा कर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क जैसे केंद्र और राज्यों के 17 कर समाप्त हो गए हैं। अब वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की चार दरें- पांच, 12, 18 और 28 फीसद लागू की जाएंगी।

    इस मौके पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी को गुड एंड सिंपल (अच्छा और सरल) टैक्स करार दिया। इससे देश में व्यापार करना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह किसी एक दल या सरकार की सिद्धि नहीं है। यह हम सभी के प्रयासों का नतीजा है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण दिसंबर 2002 में शुरू हुई लंबी यात्रा की परिणति है।

    उन्होंने जीएसटी को राज्य सरकारों की सहमति और देशहित में सबके साथ आने का प्रतीक बताया। बताते चलें कि 2011 में वित्त मंत्री की हैसियत से प्रणब ने ही जीएसटी को संसद के पटल पर रखा था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हम भारत के विकास में ऐतिहासिक फैसला करने जा रहे हैं। यह भारत की एक नई शुरुआत होगी।

    लंबी यात्रा तयकर जीएसटी का सफर हुआ है पूरा

    करीब 17 साल के उतार चढ़ाव के बाद राष्ट्रव्यापी माल एवं सेवा कर (जीएसटी) शुक्रवार आधी रात को लागू हो गया. यह व्यवस्था इस तरह भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव लाते हुए एकल बाजार में 2,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोगों को परस्पर जोड़ेगी.
    जीएसटी आजादी के 70 सालों में भारत का सबसे बड़ा कर सुधार है. यह केंद्र और राज्यों के दर्जन से अधिक उपकरों जैसे फैक्ट्री गेट, उत्पाद शुल्क, सेवा, स्थानीय बिक्री कर या वैट को समाहित करेगा.
    यह एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाएगा.जीएसटी को अपनी मंजित तक पहुंचने में 17 साल का वक्त लगा है.

    फरवरी, 1986 : वित्त मंत्री वी पी सिंह ने 1986-87 के बजट में उत्पाद कराधान व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करने का प्रस्ताव रखा.

    • 2000: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यह अवधारणा पेश की और जीएसटी मॉडल का डिजायन तय करने के लिए पश्चिम बंगाल के तत्कालीन वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति गठित की.
    • 2003: वाजपेयी सरकार ने कर सुधारों की सिफारिश करने के लिए विजय केलकर की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया.
    • 2004: वित्त मंत्रालय में तत्कालीन सलाहकार विजय केलकर ने वर्तमान कर व्यवस्था के स्थान पर जीएसटी की सिफारिश की.
    • 28 फरवरी, 2006:पहली बार बजट भाषण में जीएसटी का उल्लेख हुआ. वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने जीएसटी लागू करने की समय सीमा एक अप्रैल 2010 तय की. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रियों की उच्चाधिकार समिति जीएसटी के लिए रोडमैप तैयार करेगी.
      2008-राज्यों के वित्त मंत्रियों की उच्चाधिकार समिति का गठन.
    • 30 अप्रैल 2008: उच्चाधिकार समिति ने सरकार को ‘भारत में माल एवं सेवा कर का मॉडल एवं रोडमैप’ नामक रिपोर्ट सौंपी.
    • 10 नवंबर, 2009 : उच्चाधिकार समिति ने जीएसटी पर परिचर्चा पत्र जारी किया.
    • 2009: वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने दासगुप्ता समिति द्वारा डिजायन किए गए जीएसटी के मूल ढांचे की घोषणा की और 2010 की समय सीमा बनाए रखी.
    • बीजेपी ने जीएसटी मूल ढांचे का विरोध किया.
    • फरवरी,2010: वित्त मंत्रालय ने जीएसटी लागू करने के वास्ते बुनियाद डालने के लिए राज्यों में वाणिज्यिक करों का मिशन मोड कंप्यूटरीकरण शुरू किया.
    • प्रणब मुखर्जी ने 1अप्रैल 2011 तक के लिए जीएसटी टाला.
    • 22 मार्च, 2011 : संप्रग-2 ने जीएसटी लाने के लिए लोकसभा में 115 वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया.
    • 29 मार्च, 2011 : जीएसटी विधेयक यशवंत सिन्हा की अगुवाई वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति के पास भेजा गया.
    • असीम दासगुप्ता ने इस्तीफा दिया, तब केरल के वित्त मंत्री के एम मणि ने उनका स्थान लिया.
    • नवंबर, 2012 : वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक की और जीएसटी को लागू करने के लिए 31 दिसंबर, 2012 तक सभी मुद्दों को सुलझाने का फैसला किया.
    • फरवरी, 2013 : जीएसटी लागू करने के संप्रग सरकार के निश्चय का एलान करते हुए चिदम्बरम ने अपने बजट ने जीएसटी की वजह से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए 9,000 करोड़ रपये का प्रावधान किया.
    • अगस्त, 2013 : संसदीय समिति ने जीएसटी में सुधारों का सुझाव देते हुए संसद को रिपोर्ट सौंपी. जीएसटी विधयेक संसद में पेश किये जाने के लिए तैयार.
    • अक्तूबर, 2013 : गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहते हुए जीएसटी का विरोध किया कि राज्य को जीएसटी की वजह से हर साल 14,000 करोड़ रुपए का नुकसान होगा.
    • 2014: स्थायी समिति द्वारा मंजूर जीएसटी विधेयक की समय सीमा समाप्त क्योंकि लोकसभा भंग हो गई. भाजपा की अगुवाई वाली राजग सरकार सत्ता में आई.
    • 18 दिसंबर, 2014 : मंत्रिमंडल ने जीएसटी के लिए 122 वां संविधान मंजूर किया.
    • 19 दिसंबर 2014: वित्त मंत्री अरण जेटली ने लोकसभा में जीएसटी से संबंधित संशोधन (122 वां संविधान संशोधन) विधेयक पेश किया जिसका कांग्रेस ने विरोध किया.
    • फरवरी, 2015: जेटली ने जीएसटी लागू करने के लिए एक अप्रैल, 2016 की समय सीमा तय की.
    • 6 मई 2016: लोकसभा ने जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया.
    • 12 मई, 2105 : राज्यसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया.
    • कांग्रेस ने इस विधेयक को राज्यससभा की प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की. उसने 18% की जीएसटी सीमा की मांग की.
    • 14 मई, 2015 : जीएसटी विधेयक राज्यसभा एवं लोकसभा की संयुक्त समिति के पास भेजा गया
    • अगस्त, 2015: सरकार को राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिए विपक्ष का समर्थन हासिल नहीं हुआ जहां उसके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है.
    • जुलाई, 2016: सरकार ने 18  की जीएसटी संवैधानिक सीमा को मंजूरी नहीं दी. इस विषय पर उसे राज्यों का समर्थन मिला.
    • अगस्त, 2016 : कांग्रेस और भाजपा संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने पर राजी हुईं.
    • तीन अगस्त, 2016 : राज्यसभा ने दो तिहाई बहुमत से संविधान संशोधन विधेयक पारित किया.
    • दो सितंबर, 2016 : 16 राज्यों ने जीएसटी विधयेक को अनुमोदित किया. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विधेयक को अपनी मंजूरी दी.
    • 12 सितंबर : केंद्रीय मंत्रीमंडल ने जीएसटी परिषद के गठन को मंजूरी दी.
    • 22-23 सितंबर : परिषद की पहली बैठक हुई.
    • 3 नवंबर : जीएसटी परिषद 5,12,18 और 28% की चार स्तरीय कर ढांचे पर सहमत हुई. परिषद विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर अतिरिक्त उपकर लगाने पर भी राजी हुई.
    • 16 जनवरी, 2017: जेटली ने जीएसटी लागू करने की समयसीमा एक जुलाई तय की. केंद्र और राज्यों के बीच दोहरा नियंत्रण और समुद्र में वस्तुओं पर कराधान के विवादास्पद मुद्दे पर सहमति बनी.
    • 18 फरवरी : जीएसटी परिषद ने जीएसटी लागू करने के पहले पांच सालों में राज्यों को होने वाले किसी भी राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति विधेयक के मसौदे को अंतिम रूप दिया.
      20 मार्च: मंत्रिमंडल ने सीजीएसटी, आईजीएसटीऔर यूटी जीएसटी और क्षतिपूर्त विधेयक को मंजूरी दी. लोकसभा और राज्यसभा ने चारों अहम जीएसटी विधेयकों- केंद्रीय जीएसटी, समेकित जीएसटी, राज्य जीएसटी और केंद्रशासित प्रदेश जीएसटी (यूटीजीएटी) को पारित किया.
    • 18 मई : जीएसटी परिषद ने 1200 से अधिक वस्तुओं को 5, 12, 18 और 28% के जीएसटी खांचों में समायोजित किया. व्यापक उपभोग वाली 80% से अधिक वस्तुओं को छूट दी गयी या 5 % की श्रेणी में रखा गया.
    • जीएसटी परिषद ने राज्यों को मुआवजा देने के लिए कोष तैयार करने के वास्ते विलासिता एवं अहितकर वस्तुओं पर उपकर तय किया.
    • 19 मई : जीएसटी परिषद ने सेवा कर श्रेणियों के तौर पर 5, 12, 18 और 28% पर फैसला किया.
    • 21 जून: सभी राज्यों ने राज्य जीएसटी विधेयक पारित किया. जम्मू कश्मीर अपवाद रहा.
    • 28 जून: ममता बनर्जी ने जीएसटी लागू करने के आधी रात के कार्यक्रम से दूर रहने के अपनी पार्टी के फैसले का एलान किया.
    • 29 जन: कांग्रेस और वामदलों ने भी इस कार्यक्रम से दूर रहने का निर्णय लिया.
    • 30 जून : आधीरात: जीएसटी लागू हो गया.
    • राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, वित्त मंत्री अरूण जेटली एवं समस्त अतिथिगणों की मौजूदगी में 30 जून की मध्य रात्रि में गुड्स एंड सर्विस टेक्स (जीएसटी) की देशभर में लॉन्च हो गया.
    • संसद भवन के सेन्ट्रल हॉल में आयोजित विशेष सत्र में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी की लॉन्चिंग की.

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