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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    सुशासन बाबू या जंगलराज

    ShagunBy ShagunNovember 2, 2020Updated:November 2, 2020 Current Issues No Comments4 Mins Read
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    Post Views: 659

    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    बिहार में महागठबन्धन ने तेजस्वी यादव को भावी मुख्यमंत्री के रूप में पेश किया है। वह वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनौती दे रहे है। ऐसे में बिहार के मतदाताओं के समक्ष विकल्प बिल्कुल स्पष्ट है। नीतीश कुमार की छवि सुशासन बाबू की रही है। जबकि राजद का पन्द्रह वर्षीय शासन जंगल राज के रूप में चर्चित था। कुछ समय के लिए तेजस्वी यादव भी उपमुख्यमंत्री रहते हुए ट्रेलर दे चुके है। जिसको देख कर नीतीश कुमार ने राजद से गठबंधन तोड़ लिया था। शायद यही कारण है कि नरेंद्र मोदी ने राजद नेतृत्व को जंगल राज युवराज कहा था।

    बिहार में कांग्रेस व राजद को सर्वाधिक समय तक शासन का अवसर मिला है। इनकी समानता का दूसरा पहलू वर्तमान नेतृत्व है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राजद संस्थापक लालू यादव चुनाव से अलग है। ऐसे में इन पार्टियों के युवराजों के हाँथ में कमान है। तीसरी समानता यह कि दोनों ही अपनी पुरानी सरकारों पर चर्चा से बचना चाहते है। वह जानते है कि ऐसा करना नुकसानदेह होगा। तेजस्वी यादव तो कुछ समय बिहार के उपमुख्यमंत्री भी रहे है। लेकिन उनसे आजिज आकर नीतीश कुमार को गठबंधन तोड़ना पड़ा था। क्योंकि नीतीश कुमार के क्षेत्रीय दल जेडीयू की राजनीति अलग है। इसमें परिवारवाद नहीं है। इसलिए वह राजद और कांग्रेस की विरासत से सामंजस्य स्थापित नहीं कर सके। भाजपा जैसी कार्यकर्ता व विचारधारा आधारित पार्टी के साथ ही वह सहज रहते है।

    इस प्रकार विचार के आधार पर राजग और राजद गठबंधन बिल्कुल अलग धरातल पर है। यही आधार विकास व सुशासन को लेकर है। राजद ने भी पन्द्रह वर्षो तक बिहार पर शासन किया। लेकिन विवशता यह कि विकास के नाम पर इनके पास कहने को एक शब्द भी नहीं है। जबकि नीतीश के नेतृत्व वाली राजग सरकार अपनी उपलब्धियों का ब्यौरा दे रही है। चुनाव में विचार व विकास के नाम पर राहुल गांधी भी खाली हाँथ है। लोकसभा चुनाव प्रचार ने नाकाम हो चुके कई मुद्दे वह बिहार में भी उठा रहे है। नोटबन्दी के दर्द से अभी मुक्त नहीं हो सके है। शायद कुर्ते की जेब में हाँथ डालते ही यह पीड़ा उभर आती है। जीएसटी तो यूपीए के समय ही लागू होना था। लेकिन तब कांग्रेस ने सहमति बनाने का कोई प्रयास नहीं किया।

    मोदी सरकार ने जो सहमति बनाई उसमें कांग्रेस के मुख्यमंत्री भी शामिल थे। राहुल का अपना एजेंडा रहता है। कुछ बातें अभी जुड़ी है। वह बिहार में कह रहे है कि कृषि कानून के विरुद्ध पंजाब के किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कौन बताए कि यह कानून पूरे देश के लिए है। पिछली व्यवस्था में किसान परेशान थे। उनकी परेशानी दूर की गई है। इसलिए केवल बिचौलिए ही बेहाल है। जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने है तब से राहुल उन्हें गरीब विरोधी साबित करने में जुटे है। सूटबूट की सरकार से उन्होंने मोदी पर हमले की शुरुआत की थी। इसे वह राफेल तक खींच कर लाये। चौकीदार,,नारे लगवाए। न्यायपालिका में इस पर क्या हुआ, राहुल को याद होगा।

    राहुल बिहार में भी दोहरा रहे है कि अम्बानी अडानी को सब कुछ मिल जाएगा। वह यूपीए सरकार की चर्चा नहीं करते। बिहार चुनाव में पाकिस्तान व चीन के विषय को उठाने का मौका कांग्रेस ने ही दिया है। राहुल चुनाव सभा में पूंछते है कि मोदी जी चीन के कब्जे से जमीन कब छुड़ाएंगे। कांग्रेस के नेता पाकिस्तान की तारीफ में कसीदे पढ़ते है, अनुच्छेद 370 को हटाने की बात करते है। इसके लिए चीन का सहयोग लेने की बात करने वाले के साथ उनका गठबंधन है। जाहिर है बिहार चुनाव में राजद व कांग्रेस को इसका जबाब तो मिलना ही था।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करारा जबाब दिया। कांग्रेस व राजद स्वयं विकास के मुद्दे से बचना चाहते है। राजद शासन के दौरान बिहार में कृषि की औसत विकास दर रसातल में पहुंच रही थी। इसकी विकास दर माईनस में थी। राजग सरकार में कृषि विकास की औसत दर छह प्रतिशत से अधिक रही। पहले में कृषि का बजट दी सौ इकतालीस करोड़ रुपये था,अब बढ़कर तीन हजार  करोड़ से अधिक हो गया है। बिजली,सड़क और पानी के मुद्दे पर एनडीए सरकार की उपलब्धियां अभूतपूर्व है।

    पहले के मुकाबले साक्षरता दर में बीस प्रतिशत वृद्धि हुई है। राजद के समय तेरह सरकारी पोलिटेक्निक कॉलेज थे,आज लगभग हर जिले में पोलिटेक्निक कॉलेज हैं। राजद काल तीन अभियंत्रण कॉलेज  कॉलेज थे,करीब चालीस  अभियंत्रण कॉलेज हैं। शिक्षा के बजट में एक हजार करोड़ रूपये से ज्यादा वृद्धि हुई। पहले की तरह घोटाले नहीं हुए। राजद काल में बिजली की उपलब्धता मात्र बाइस प्रतिशत थी, आज शत प्रतिशत बिजली की उपलब्धता है। पुल,सड़क और हाइवे के निर्माण में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। स्पष्ट है। भाजपा व जेडीयू इन्हीं उपलब्धियों के साथ जनता के बीच है।

    Shagun

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