राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय मोहनलालगंज में आयोजित विशेष चिकित्सा शिविर में 459 रोगियों को उपचारित किया गया
लखनऊ: 12 नवम्बर। माइग्रेन (सिर दर्द) में नस्य कर्म से स्थाई लाभ होता है, वहीं स्नेहन एवं स्वेदन कर्म से संधिशूल, कटिशूल एवं संधिवात जैसी जटिल वात व्याधियाँ दूर हो जाती हैं। यह विचार डाॅ. शिव शंकर त्रिपाठी, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, लखनऊ ने आयुर्वेद एवं यूनानी विकास अभियान के अन्तर्गत 25 शैय्या राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, मोहनलालगंज में आयोजित आयुर्वेदीय क्षार-सूत्र एवं पंचकर्म चिकित्सा शिविर के शुभारम्भ के अवसर पर व्यक्त किये और उनके द्वारा 11 रोगियों को स्वयं औषधियाँ भी प्रदान की गई। डाॅ. त्रिपाठी ने बताया कि जनपद के राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालयों में चिकित्सा-शिविरों का आयोजन कर जन सामान्य को आयुर्वेद एवं यूनानी विधा को अपनाने तथा उसका अधिक से अधिक लाभ उठाने हेतु जागरूक किया जा रहा है।
इस शिविर में कुल 459 रोगियों को उपाचारित कर उन्हें निःशुल्क औषधियाँ वितरित की गई, जिसमें से बवासीर, भंगदर एवं गुदाचीरा आदि से पीड़ित 125 रोगियों को क्षार-सूत्र क्रिया द्वारा, गठिया संधिवात, संधिशूल से पीड़ित वात व्याधियों के 111 रोगियों को स्नेहन एवं स्वेदन आदि पंचकर्म के द्वारा, शिरःशूल (माइग्रेन), पीनस जीर्ण प्रतिश्याय के 63 रोगियों को नस्य कर्म क्रिया कर, स्त्री रोगों से पीड़ित 70, बाल रोग के 40 तथा मौसमी बुखार-ज्वर एवं अतिसार आदि से पीड़ित 50 रोगियों को औषधियाँ वितरित कर उपचारित किया गया।
शिविर में प्रभारी चिकित्साधिकारी डाॅ. कुसुम कुमारी, चिकित्साधिकारी डा. राकेश वर्मा, डाॅ. अरविन्द वर्मा एवं क्षार-सूत्र विशेषज्ञ डाॅ. अरूण कुमार आदि चिकित्सकों को टीम द्वारा प्रातः 8 बजे से अपराह्न 3 बजे तक रोगियों को चिकित्सा प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ रहने के तरीके भी बताए गये।






