इंजीनियर नही ‘प्लंबर’ बनो:AI जनक
नोयडा : क्या आपने कभी सोचा कि टेक के दिग्गज अपने बच्चों को कोडिंग की बजाय पाइप फिटिंग सिखा रहे हैं? जी हां, AI के ‘जनक’ कहे जाने वाले जेफ्री हिंटन (Nobel विजेता और पूर्व Google वैज्ञानिक) ने ‘Diary of a CEO’ पॉडकास्ट में साफ कहा कि “प्लंबर बनना अच्छा दांव होगा!”
उनका तर्क सरल है: AI तेजी से बौद्धिक कामों (जैसे कोडिंग, कॉल सेंटर, पैरालीगल) को निगल रहा है। एक महीने का कोड अब घंटों में तैयार! लेकिन फिजिकल मैनिपुलेशन करना यानी हाथों से पानी की लीक ढूंढना, पाइप जोड़ना – में AI को अभी दशकों लगेंगे। इसलिए ब्लू-कॉलर स्किल्स फिलहाल सुरक्षित हैं।
हार्वर्ड के प्रोफेसर भारत एन. आनंद ने भी ‘Wall Street Journal’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए खुलासा किया कि कई टेक एक्सपर्ट अब बच्चों को कंप्यूटर साइंस नहीं, बल्कि प्लंबिंग, इलेक्ट्रीशियन, डांसिंग, गार्डनिंग जैसी हैंड्स-ऑन स्किल्स सिखा रहे हैं। वजह? मशीनें इनमें अभी माहिर नहीं हो सकतीं।
WEF की Future of Jobs Report 2025 और भी चौंकाती है: 2030 तक 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं, लेकिन 17 करोड़ नई भी आएंगी, नेट गेन 7.8 करोड़। AI, ग्रीन ट्रांजिशन और आर्थिक बदलाव जिम्मेदार। भारत में जहां इंजीनियरिंग-आईटी का क्रेज है, वहां पैरेंट्स को सोचना होगा—क्या सिर्फ डिग्री काफी रहेगी?
भविष्य में AI और इंसान साथ काम करेंगे, लेकिन जो काम शारीरिक dexterity और अनुकूलन मांगते हैं जैसे प्लंबिंग -वे लंबे समय तक ‘AI-प्रूफ’ रहेंगे। मेडिकल फील्ड में भी इंसानी टच जरूरी।
तो अगली बार जब कोई कहे “बेटा इंजीनियर बनो”, शायद जवाब हो “नहीं, प्लंबर बनूंगा… कम से कम AI मुझे नौकरी नहीं छीनेगा!”







