आपद काल परिखिअहिं चारी।
धीरज धर्म मित्र अरु नारी।
आपदा काल मे सबसे बड़ी परीक्षा आपके धैर्य की ही होती है धीरज रखिये न थोड़ा काहे इतनी व्याकुलता इतनी व्यग्रता सरकार ने बाकायदा पढ़ें लिखे जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किये हैं आपको स्थितियों से अवगत कराने के लिए ये कठिन परिश्रम से परीक्षा से चुनकर आये जिम्मेदार योग्य और सक्षम अधिकारी हैं इनकी ही बात सुनिए और समझिए…
देश की सरकार ने TV न्यूज चैनलों से कहा अपने कार्यक्रमों में बंद करे सायरन बजाना…
भारत में प्राईवेट समाचार चैनलों के एंकर का पद किसी सरकारी परीक्षा से न तय होता है न किसी मानक के तहत ये आते हैं ये विशुद्ध टी आर पी व्यापारियों के हाई पैकेज वाले नौकर हैं बस फिर कैसी जिम्मेदारी की उम्मीद आप करते हैं इनसे दर असल भारतीय जनमानस आई पी एल देखने का आदी हो गया उसे हर प्रसंग लाईव देखने का नशा सा हो गया है वो हर बाल पर चौके छक्के की उम्मीद करता है न्यूज़ रूम में बैठे एंकरों से वो कमेंटेटरों की तरह उम्मीद करता है वहां भी दो चार थके हुए खिलाड़ी मैच का पूरा तकनीकी विश्लेषण करते हैं वैसे यहां सेना के कुछ रिटायर्ड अधिकारियों को ये बैठायें रखते हैं बीच बीच बीच में तकनीकी तड़का लगाने के लिए उसी टुन्नता से लबरेज समाचार वाचक और समाचार श्रोता दोनों पर भाई युद्ध क्रिकेट तो नहीं है न आखिर कार आपको तड़का खबरों का ही जखीरा क्यों चाहिए कुछ दिन परहेज़ रखिये ज्यादा चटपटा और मसालेदार खाने से संयमित रहिए ।
जब सरकार ने बाकायदा सक्षम काबिल अफसर नियुक्त किये हैं तो उनको ही संजय की आंख मानिए उनके माध्यम से जो घट रहा है देखिए और जो कर सकते हैं देश हित में करिये आपका संयत और संयमित रहना भी देश हित में होगा वर्तमान लड़ाई विशुद्ध तकनीकी क्षमता की लड़ाई है आर्थिक संपन्नता और मंहगे आधुनिक साजो सामान की लड़ाई है हम उस लिहाज से पाकिस्तान से हम बहुत आगे हैं इसमें किसी कोई संशय नहीं है । – अजीत कुमार सिंह







