कई लोग बेहद खामोशी से काम करते हैं, बगैर किसी नारे-झंडा बैनर के ऐसे ही एक शाखसे के काम से आपको मुखातिब करवा रहा हूँ, ये हैं अब्दुल गफार एडवोकेट , ये दिल्ली के कडकडडूमा/ शाहदरा कोर्ट में प्रेक्टिस करते हैं, यह सभी जानते हैं कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों में शामिल होने के नाम पर पुलिस ने गरीब-अल्पसंख्यक लोगों को जम कर फंसाया है, ये लोग बेहद गरीब हैं, इनके पास कानून या पुलिस के बारे में जागरूकता भी नहीं है .
गफ्फार जी ऐसे कम से कम पचास मामलों को निशुल्क देख रहे हैं. उनके साथ कुछ युवा बच्चों की टीम है, गफ्फार जी किसी मानवाधिकार संगठन से नहीं जुड़े लेकिन वे सैंकड़ों गरीब- मजलूमों के लिए खुद एक संगठन बन गए हैं .
कल शाम ही वहाव नामक युवक की जमानत के साथ उन्होंने एक ऐसे युवक की भी जमानत करवा दी जिसके घर- परिवार किसी की भी जानकार उनके पास नहीं — वहाव के बूढ़े दादा जी हर दिन मेरी बेटी तमन्ना को फोन कर कहते कि यदि ईद पर बच्चा घर आ जाये तो एहसान होगा , गफ्फार जी ने कई लोगों के घरों में ईद की खुशियाँ बांटी हैं, हालांकि वे फेसबुक पर हैं लेकिन अपने नेक कामों को कभी यहाँ लिखते नहीं.
आप सभी से अनुरोध है कि रमजान की पांच नमाज में से कम से कम एक बार गफ्फार जी के बेहतरीन सेहत, शानदार जीवन और उनकी इंसानियत के जज्बे को और ताकतवर बनाये रखनी की दुआ अवश्य मांगें .
हमारी तरफ से भी सलाम गफ्फार जी!
– पंकज चतुर्वेदी







