शिया मौलाना की फ़ोन रिकार्डिंग से हुआ बड़ा ख़ुलासा
नवेद शिकोह
दलित-मुस्लिम वर्चस्व वाली भाजपा की कल्पना साकार हो गयी तो राजनाथ सिंह देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। एक बड़े शिया धर्मगुरु और उनके बेहद करीबी मौलाना मिलकर राजनाथ सिंह को मजबूत करके केंद्र से नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश से आदित्य नाथ योगी को किनारे करना चाहते हैं। मोदी-योगी के खिलाफ लड़ाई में राजनाथ सिंह का कंधा इस्तेमाल करने की रणनीति को मौजूदा भाजपा के आगे झुकना ना समझा जाये। भाजपा उम्मीदवार का समर्थन करने पर नाराज शिया क़ौम के लोगों को कुछ इस तरह समझा रहे हैं लखनऊ के बड़े शिया मौलाना के बेहद क़रीबी मौलाना।
लखनऊ के भाजपा उम्मीदवार राजनाथ सिंह को समर्थन देने के ऐलान के बाद मौलाना से नाराज एक शख्स जब उन्हें फोन करता है तो कुछ इस तरह की बातों से मौलाना नाराज शख़्स को समझाने की कोशिश करते हैं। मौलाना कहते हैं कि मायावती और दूसरे क्षेत्रीय दल भी राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री बनाने की शर्त रखेंगे। मौलाना की इन बातों की मंशा ये थी कि उनकी कोशिश है कि भाजपा में भी धर्मनिरपेक्षा को क़ायम कर राजनाथ सिंह जैसे धर्मनिरपेक्ष शख्स को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पंहुचाया जा सके।
टेलीफोनिक वार्ता में मौलाना का आशय था कि नयी शक्ल की भाजपा में धर्मनिरपेक्षता कायम करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे ही भाजपा के कट्टरपंथी और नफरतपसंद बड़े नेताओं से हुकुमत और तख़्त-ओ-ताज छीना जा सकेगा। इसी पार्टी में अकलियत और दलितों को एहमियत मिलेगी।

भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देने से नाराज एक व्यक्ति से मौलाना की टेलीफोनिक वार्ता के आडियो के आधार पर ये तथ्य पेश किए गये हैं।
लखनऊ के एक उलमा की इन बातों को बहुत गंभीरता से तो नहीं लिया जा सकता है किंतु राजनाथ सिंह की तमाम उलमा से कुछ ज्यादा ही नजदीकियां ग़ौर करने लायक़ हैं। हांलाकि हमेशा से ही राजनाथ सिंह की छवि में उदारवादता और धर्मनिरपेक्षा झलकती रही है। यूपी के मुख्यमंत्री और फिर लखनऊ के सांसद रहने के दौरान उनका जनता से जमीनी रिश्ता रहा है। कटुता से दूर नम्रता, शालीनता और विभिन्न धर्म समुदाय के लोगों को समान दृष्टि से देेखने वाले राजनाथ सिंह की अल्पसंख्यक वर्गों खासकर मुस्लिम समाज में अच्छी पकड़ है। किंतु इस बार के चुनाव प्रचार में वो उलमा के बीच कुछ ज्यादा ही नजर आये।
उनका लखनऊ में मजबूत जनाधार है और उन्हें किसी कड़ी चुनौती का भी सामना नहीं करना पड़ रहा था। फिर भी वो प्रचार के दौरान बहुसंख्यक समाज से ज्यादा अल्पसंख्यक समाज के बीच ज्यादा नजर आये। इन बातों से ही अब चर्चाएं होने लगी हैं कि 23 मई के बाद यदि कोई भी गठबंधन बहुमत हासिल नहीं करता है तो एक नयी सियासी तस्वीर में राजनाथ सिंह केंद्र बिन्दु बन सकते हैं। जैसा कि एक मौलाना ने अपने अनुयायी को बताया कि बसपा और अन्य धर्मनिरपेक्ष क्षेत्रीय दल धर्मनिरपेक्ष छवि वाले राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री बनाये जाने की शर्त पर एनडीए का समर्थन कर सकते हैं।







