हाथ पकड़कर निकला कोर्ट से बाहर
नई दिल्ली, 06 अप्रैल। पति-पत्नी के तलाक लेने के किस्से तो आए दिन सुनाई देते हैं। लेकिन झगड़े के बाद एक साथ हो जाने के किस्से आम नहीं हैं। ऐसे एक कपल की कहानी कम रोचक नहीं, जिसने अपनी शादी के 10 सालों में से सात साल अलग रहकर कानूनी जंग में बिताए, लेकिन जब दोनों ने कोर्ट को अलविदा कहा, तो दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थाम रखा था।
लड़की की ओर से एडवोकेट मनीष भदौरिया फैमिली कोर्ट के जज वीके खन्ना के सामने पेश हुए और बताया कि दंपति समझौता करना चाहते हैं। कोर्ट ने तुरंत मामले को काउंसलिंग सेल के सामने रेफर कर दिया। दोनों ने समझौते के रूप में वही बातें दोहराईं, जो शादी के फेरे लेते हुए अग्नि के सामने की थीं। साक्षी के तौर पर उनके सामने सेटलमेंट पेपर था। इस समझौते में एक संकल्प यह भी था कि वह फिर कभी एक-दूसरे के खिलाफ ऐसा कोई केस दर्ज नहीं कराएंगे। दोनों पक्षों की सहमति से तैयार इस सेटलमेंट पेपर को कोर्ट के सामने पेश किया गया, जिसने तुरंत इस पर अपनी मुहर लगा दी।
लड़का और लड़की दोनों मूल रूप से शिमला के हैं। लड़की शुरू से पिता की सरकारी नौकरी के चलते नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में रह रही थी। लड़का एक बड़ी कंपनी में मैनेजर है। इनकी शादी 23 मार्च 2008 को हुई थी। इसके दो साल बाद अप्रैल 2010 में उनके घर बेटी का जन्म हुआ। उसके जन्म के सात महीने बाद से वे एक-दूसरे से अलग रह रहे थे। काम के सिलसिले में पानीपत में रह रहे लड़के ने 26 मई 2011 को तलाक के लिए शिमला की कोर्ट में अर्जी दी। इससे नाराज महिला ने गुजारा भत्ते के लिए कोर्ट में याचिका दायर कर दी।
इसी बीच, महिला ने अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा कानून के तहत दहेज प्रताड़ना का केस भी दर्ज करा दिया और साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर केस को शिमला से यहां दिल्ली में ट्रांसफर करवा लिया। लड़की के वकील ने बताया कि दोनों के बीच बहुत छोटी-छोटी बातों को लेकर लड़ाई थी। सात साल की कानूनी जंग के बावजूद उनका घर टूटने से बच गया और वे फिर से एक हो गए हैं।







