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    दशहरा: अहंकार का नाश

    By October 19, 2018 festival No Comments4 Mins Read
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    दशहरा यानी विजय का पर्व: दशहरा एक पवित्र त्यौहार है। सदियों से इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि इससे कई पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं समाज को बेहतर राह पर चलने का संदेश देती है।

    नवरात्रि के 9 दिन के उपवास के बाद भक्त मां दुर्गा को प्रसन्न करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। नवरात्रि के बाद की तिथि को दशहरा के रूप में मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विन के महीने के दसवें दिन को यह हर वर्ष इस पर्व को मनाया जाता है। दशहरा को विजयदशमी या आयुध पूजा के नाम से भी जाना जाता है। दशहरा संस्कृत का शब्द है। जिसका अर्थ होता है रावण की हार। कई कथाओं में रावण को महान ज्ञानी और संत बताया गया है लेकिन उसमें निहित बुराइयों के कारण उसका अंत हो गया था। इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी मनाया जाता है।

    पुरानी किंवदंतियों कहती हैं कि भगवान राम ने रावण पर जीत हासिल की थी। यह त्यौहार उसी जीत का प्रतीक है। जीवन में इस दिन से हमें कई सीख मिलती हैं। कहानियों के अनुसार रावण ने सीता जी का अपहरण किया और उसके बाद अपने भाई लक्ष्मण हनुमान सहित वानर सेना के साथ उन्होंने रावण नगरी लंका पर चढ़ाई की और शानदार विजय हासिल की।

    Aishbagh Ramlela, lucknow

    रामायण हिंदू महाकाव्य में इस बात का जिक्र है कि भगवान राम सभी गुण संपन्न थे और हमेशा ही प्रजा हित में फैसला लेते थे। उन्होंने समाज में कई एक आदर्श स्थापित किए और यही कारण है कि आज के दिन में उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है। दूसरी कथाओं में इसे कौरवों पर पांडवों की जीत को भी दर्शाया गया है। इसके अलावा एक और कहानी प्रसिद्ध है। जो देवी दुर्गा और महिषासुर वध की ओर प्रकाश डालती है।

    नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है और दुर्गा सप्तशती में युद्ध का विस्तार से वर्णन है वहीं पर दशहरे को खासतौर पर फसल के मौसम की शुरुआत से भी जोड़कर देखा जाता है ऐसा माना जाता है कि मां दुर्गा के आशीर्वाद से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है इसलिए खेती करने वाले लोगों के लिए दशहरे का महत्व काफी बढ़ जाता है।

    दशहरे पर शुभ मुहूर्त पर बात करते हुए एक ज्ञानी बताते हैं कि दशहरे के दिन पर शाम के समय को खासतौर पर शुभ माना जाता है। इसे विजयकाल के नाम से भी जाना जाता है इसके नाम से ही समझ सकते हैं कि इस समय में आप जो भी काम करेंगे। उसमें आपको विजय हासिल होगी, लेकिन इसके साथ एक शर्त है। वह यह कि आपको सत्य मन से उस काम को अंजाम देना होगा। इसके अलावा उस काम को सकारात्मकता का भाव भी होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि विजयदशमी के दिन नीलकंठ का दर्शन हो जाए तो यह शुभ होता है।

    यह सच है कि दशहरे को लेकर कई प्रथाएं प्रचलित हैं और सभी जीवन में सत्य के उदय का संदेश देती हैं गौर से देखें तो समझ में आता है कि सदियों से मनाया जाने वाला यह दशहरा का पर्व कहीं ना कहीं सार्थकता का संदेश भी देता है। इससे जुड़ी कहानियों से हमें इस बात किसी भी मिलती है कि जीवन में कितना ही विषम परिस्थितियों का सामना क्यों ना करना पड़े। हमें सत्य के पथ पर चलते हुए अपने लक्ष्य को साधना चाहिए।

    भगवान श्री राम सत्य के प्रतीक हैं और रावण भी एक बड़ा ज्ञानी था। उसने तपस्या के बल पर अनेकों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया था। वह कई कलाओं में निपुण था लेकिन जीवन जीने के क्रम में उसने अहंकार का वरण किया और असत्य की ओर रुख किया। इसका परिणाम उसे भुगतना पड़ा वह जीवन भर जिन्हें पूजता रहा, वह उनके सामने आने पर उन्हें पहचान भी ना सका!

    यह सच है कि तमाम कोशिशों के बावजूद सत्य की जीत ही होती हैं। रावण के वध के साथ हर साल हम सत्य की जीत के इस उत्सव को बड़े पैमाने पर लोग मनाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि सीता जी को रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए भगवान श्रीराम ने 10 दिनों तक रावण से घोर युद्ध किया था।

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