योजना का मकसद बेहत्तर रखरखाव
जयपुर, 13 मई। केन्द्र सरकार की एडाप्ट हैरीटेज योजना में प्रदेश की भी करीब एक दर्जन ऐतिहासिक धरोहरों को निजी क्षेत्र को सौपा जाएगा इनमें विश्व विख्यात आमेर और नाहरगढ़ का किला भी शामिल है इस योजना के तहत सबसे पहले दिल्ली का लाल किला निजी क्षेत्र को गोद दिया गया है।
योजना केन्द्र सरकार के पर्यटन, संस्कृति मंत्रालय पुरातत्व संरक्षण निदेशालय की है जिसमें संबंधित राज्य सरकार की भी भागीदारी रहेगी। योजना के तहत वर्ष 2018 से 90 से ज्यादा ऐतिहासिक इमारतों को गोद दिया जाएगा इसमें तीन कैटेगिरी बनाई गई है जिसमें ग्रीन, ब्ल्यू और आरेंज श्रेणी है।
ग्रीन श्रेणी में रखे गई धरोहर लेने वालो को ब्ल्यू और आरेंज श्रेणी की एक धरोहर भी लेनी होगी वैसे ब्ल्यू और आरेंज श्रेणी की धरोहर ही कोई लेना चाहे तो ले सकता है। राज्य की ज्यादातर ऐतिहासिक इमारतें आरेंज श्रेणी की है। खास बात यह है कि योजना के तहत आने वाली इमारतों को प्राइवेट-पब्लिक कंपनियों के साथ कोई व्यक्ति भी गोद ले सकता है। राजस्थान की इन धरोहरों का वर्तमान में राज्य सरकार की एजेन्सियां और केन्द्र सरकार की एएसआई रख रखाव कर रही है। हालांकि आमेर, नाहरगढ और चित्तौडगढ के किलो का तो माकूल रखरखाव हो रहा है लेकिन बाकी ऐतिहासिक इमारतों की हालत बेहत्तर नहीं है इनके रखरखाव पर हर साल मोटी राशि व्यय करनी पडती है।
योजना के पीछे भी मकसद यही है कि निजी एजेन्सी किले का बेहत्तर रखरखाव करने के साथ पर्यटकों को बेहत्तर सुविधाएं दे उधर आमेर, नाहरगढ जैसलमेर और चित्तौडगढ के किले से सरकार को लाखों रूपए की आय हो रही है जिसमें प्रवेश शुल्क से लेकर अन्य कई व्यावसायिक गतिविधियां शामिल है।
योजना के तहत गोद देने के बाद भी प्रवेश शुल्क से होनी वाली आय राज्य सरकार को ही मिलेगी। प्रदेश के जो प्रमुख किले निजी क्षेत्र को सौपे जाने है उनमें चित्तौडगढ का किला जो विश्व धरोहर में शामिल है पहले, जैसलमेर का किला योजना के दूसरे चरण, नाहरगढ और आमेर किला तीसरे चरण में सौपा जाएगा आरेंज श्रेणी में रखी गई धरोहरों में डीग पैलेस भरतपुर, भानगढ अलवर, मंडोर फोर्ट जोधपुर, भरतपुर कोर्ट, शेरगढ फोर्ट धौलपुर, महल बादशाही पुष्कर और तारागढ़ फोर्ट बूंदी शामिल है।







