पूरे राष्ट्र को चिंतामुक्त बनाने के लिए दिन-रात रहते चिंतिंत प्रधानमंत्री

स्वाती सिंह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज 75 साल की आयु में भी बिना थके-बिना रुके देश की विकास के लिए लगे हुए हैं। यही कारण है कि आज 11 सालों में हर वर्ग तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सफल रहे। आइए जानते हैं उप्र सरकार की पूर्व मंत्री स्वाती सिंह के इस लेख में कितना लोगों तक पहुंचा योजनाओं का लाभ।
लखनऊ, 14 अक्टूबर। बात दस अक्टूबर की है। मैं घर में थी, कई लोग आए हुए थे। चर्चा चल रही थी सरकार की। मैंने पूछा पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रति लोगों की जागरूकता का क्या हाल है? यह तो बहुत अच्छी योजना है? सुलतानपुर से आये सुनील शर्मा ने तपाक से कहा, यह योजना लोगों के जिंदगी की रोशनी है। सामान्य आयु वर्ग के लोगों के लिए यह सर्वाधिक लाभ पहुंचाने वाली योजना है। पहले मेरा बिल तीन हजार तक पहुंच जाता था। अब वह कुछ रूपयों तक सिमट गया है।
वे कहने लगे, “हकीकत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हर व्यक्ति के लिए वह सब सहयोग किया है, जो आज के जमाने में भाई भी नहीं करता। किसी प्रति घर के लिए नब्बे हजार से सवा लाख तक सब्सिडी इस कारण दे दिया जाय कि निफिक्र होकर घर को रोशन कर सके। भला यह कौन सरकार सोच सकती है। यही नहीं खाने से लेकर, रहने तक की व्यवस्था जो व्यक्ति नीचले पायदान पर खड़े लोगों के बारे में सोच रखता हो, वह निश्चय ही कोई देवीय अवतार ही है।”
सुनील का विचार तो एक उदाहरण मात्र है। आप जहां भी निकलेंगे, धुआं से मुक्ति पा चुकीं इस तरह की दुआएं देतीं माताएं, स्टार्ट योजना से अपनी जिंदगी सुधार चुके युवा, जिसने कभी घर का सपना न देखा हो, वे घर पा चुके गरीब सहित तमाम लोग मिल जाएंगे, जो दिन-रात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लंबी आयु की कामना करते रहते हैं। आखिर करें भी क्यों न जिसने उनकी जिंदगी को संवारा है, उसके बारे में सोच तो हर व्यक्ति रखेगा।
अब देखिए ना पहले राशन की दुकानें भले थीं, लेकिन गरीबों तक राशन कभी नहीं पहुंचता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबसे अंगुठा लगाने का सिस्टम शुरु कर दिया राशन के दुकानदार घर-घर जाकर लोगों को बुलाते और उनको राशन देते। आप कहीं भी हैं, राशन ले सकते हैं। यह सब गरीबों के जीवन स्तर को उठाने लिए सोच वही रख सकता है, जो खुद गरीबी के दर्द को नजदीक से देखा है।
गरीब आवास योजना के तहत जितने आवास बने, उतना 160 देशों की आबादी नहीं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार बनते ही पहले गरीबों के घरों के बारे में सोचा और सबके लिए आवास की सोच पर आधारित जून 2015 को प्रधानमंत्री आवास योजना शुरु की। आज अधिकारी गांव-गांव जाकर खुद पूछते हैं, कौन छप्पर विहिन है। आज दुनिया में कुल 195 देश हैं, जिनमें 160 देशों की जनसंख्या दो करोड़ से कम है और भारत में गरीबों के लिए दो करोड़ से ज्यादा आवास बन चुके हैं। तीन करोड़ घर बनवाने का लक्ष्य लेकर (शहरी क्षेत्रों में 1 करोड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में 2 करोड़) सरकार चल रही हैं। शहरों में भी अधिकारी दिन-रात लगे हुए हैं लोगों घर देने के लिए। आजादी के बाद कभी ऐसा नहीं देखने को मिला कि चाहे जिस आय वर्ग के हों, हम निफिक्र रहें और प्रधानमंत्री हमारे बारे में खाने से लेकर रहने तक की व्यवस्था में दिन-रात बिना थके, बिना रूके चलता रहे।
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10 लाख से अधिक सौर संयंत्र हो चुके स्थापित
वहीं सौर ऊर्जा सब्सिडी का फायदा उठाने वालों की संख्या में लगातार बढ़ रही है, हालांकि सटीक संख्या हर दिन बदलती रहती है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, “पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना” के तहत 10 लाख से अधिक सौर संयंत्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं, जो इस योजना के लाभान्वित होने वाले लाखों घरों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस योजना का लक्ष्य 2026-27 तक एक करोड़ घरों तक पहुंचना है। इस योजना के तहत दो किला वाट तक की प्रणालियों के लिए 60 प्रतिशत तक और दो से तीन किलो वाट तक की प्रणालियों के लिए 40 प्रतिशत तक सरकार सब्सिडी देती है। यह योजना न केवल लागत कम करती है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचाती है।
सिर्फ उत्तर प्रदेश में लगे 2.19 लाख से अधिक सोलर पैनल
अकेले उप्र में इस योजना के तहत 2.19 लाख से अधिक सोलर पैनल लग चुके हैं। अक्टूबर तक 12.58 लाख आवेदन मिले हैं। राज्य सरकार ने 25 लाख घरों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें लखनऊ शहर सबसे आगे है। उत्तर प्रदेश में रूफटॉप सोलर के लिए केंद्र सरकार 30,000 से 78,000 रुपये तक और राज्य सरकार 15,000 से 30,000 रुपये तक की सब्सिडी देती है, जो सोलर सिस्टम के आकार पर निर्भर करती है।
41 करोड़ परिवारों के लिए बन चुके आयुष्मान कार्ड
पहले गरीब बीमारियों से ग्रसित होने के बावजूद अस्पताल तक इस कारण नहीं जाते थे कि उनके पास धन का अभाव था। गरीबी में घुंट-घुंट जान न जाय, इसको ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिवस पर 23 सितम्बर 2018 को पूरे भारत में आयुष्मान भारत कार्ड की योजना शुरु की। इस योजना के तहत 1,370 बिमारियों का इलाज बिल्कुल मुफ्त में किया जाता है। इसके तहत देश में अब तक 41 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। जनवरी 2022 में लाभार्थियों की संख्या 10.74 करोड़ परिवारों से बढ़ाकर 12 करोड़ परिवार कर दी गई, जिससे देश की नीचे की 40 प्रतिशत आबादी को लाभ मिल सके।
छह करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी जोड़ा गया आयुष्मान से
मार्च 2024 में योजना में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवारों को भी शामिल कर लिया गया। हाल ही में योजना का दायरा बढ़ाकर 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के छह करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी शामिल किया गया है, जिन्हें वय वंदना कार्ड के ज़रिए लाभ मिलेगा चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका भी लाभांवित हो रहे आयुष्मान कार्ड से
बनाए गए आयुष्मान कार्ड में आशा कार्यकर्ता 10.45 लाख,आंगनवाड़ी कार्यकर्ता 15.01 लाख, आंगनवाड़ी सहायिका 15.05 लाख.देशभर में अब तक 31,466 अस्पताल योजना में शामिल किए जा चुके हैं, जिनमें से 14,194 निजी अस्पताल हैं। योजना के तहत अब तक 9.84 करोड़ से अधिक लोगों का इलाज किया जा चुका है, जिसकी कुल लागत 1.40 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा रही है।
2016 में स्टार्टअप इंडिया की हुई शुरुआत, आज स्टार्टअप की संख्या एक लाख 76 हजार के पार
युवा आत्मनिर्भर बन सकें। दूसरों को भी नौकरी देने में सक्षम हों, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई योजनाएं शुरु की। इसके तहत 16 जनवरी 2016 को स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत हुई। इस पहल का उद्देश्य एक मजबूत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बनाना और उद्यमिता को बढ़ावा देना था। “स्टार्टअप इंडिया” भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे नवाचार, उद्यमशीलता और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किया गया था। इसका नतीता रहा कि 2016 में लगभग 500 से शुरू होकर, डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 1.76 लाख से अधिक हो गई है और यूनिकॉर्न की संख्या 118 तक पहुँच गई है। भारत में स्टार्टअप की दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
118 स्टार्टअप यूनिकार्न की श्रेणी में
पिछले 11 वर्षों में देश में रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स की संख्या बढ़कर 1.76 लाख हो गई है। यह 2016 में लगभग पांच सौ थी। इनमें से 118 स्टार्टअप ऐसे हैं, जो यूनिकॉर्न बन चुके हैं यानी उनकी वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर या उससे ज्यादा है। वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “भारत के युवा स्टार्टअप बना रहे हैं और नौकरियों के अवसर ला रहे हैं। यह बीते 11 वर्षों में युवाओं के लिए किए गए प्रयासों का नतीजा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव हुआ।”
ग्यारह सालों में 490 नये विश्वविद्यालय
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जानकारी दी है कि देश में पिछले 11 सालों में सात नए आईआईटी, 8 नए आईआईएम और 16 नए एम्स संस्थान खोले गए हैं। साथ ही करीब 490 नए विश्वविद्यालय भी देश के कोने-कोने में स्थापित किए गए हैं, ताकि उच्च शिक्षा हर युवा तक पहुंच सके। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 1.6 करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग दी गई है। वहीं 1.6 लाख स्टार्टअप ने 17.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। देशभर में 30,000 व्यावसायिक शिक्षा विद्यालय स्थापित किए गए हैं, जिनमें 30 लाख से ज्यादा छात्र नामांकित हैं।
एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप का अवसर
इसके अलावा, पीएम इंटर्नशिप योजना के तहत शीर्ष 500 कंपनियों में एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप के अवसर दिए गए हैं। स्टार्टअप्स की फाइनेंसिंग को मजबूत करने के लिए, सरकार ने हाल ही में क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर स्टार्टअप्स का विस्तार किया है। इस योजना के तहत प्रति स्टार्टअप गारंटी कवर की सीमा को 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दिया गया है। अब 10 करोड़ रुपये तक के लोन पर 85 प्रतिशत और 10 करोड़ से अधिक पर 75 प्रतिशत तक की गारंटी दी जाएगी। सरकार का यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के उस दृष्टिकोण को समर्थन देता है, जिसमें भारत को इनोवेशन-आधारित आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाना है।
(लेखिका- भाजपा की वरिष्ठ नेता और उप्र सरकार की पूर्व मंत्री हैं )






