आज़म खान की सेहत के लिए हिंदू और मुस्लिम सभी कर रहें दुआएं: साहिल रज़ा

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राहुल कुमार गुप्ता

लखनऊ, 20 जुलाई, 2021: केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं देश के कई हिस्सों में यूपी के कद्दावर नेता आज़म खान साहब की सलामती के लिए दुआओं का दौर चल रहा है। साथ ही उनके समर्थक सरकार तथा माननीय अदालत से मांग करते नज़र आ रहे हैं कि उनकी सेहत का पूरा ध्यान रखा जाये।

सीनियर कापी एडीटर राहुल गुप्ता ने इसी संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता मो.साहिल रज़ा से इस विषय पर वार्ता की। साहिल ने खान साहब के कुछ समर्थकों के साथ कई बातें रखीं और उन्होंने बताया यही बातें आज़म खान साहब के सभी चाहने वाले भी कहते हैं।

‘कुछ सियासतदारों को खौफ था आज़म के रसूख से।
पर कोई मिटा नहीं सकता उसके ईमान के वुसूल को।।’

सिद्धांत और ईमान की जीती जागती मिसाल आज राजनीतिक द्वेष का शिकार बन कर जेल में हैं। वजह शिक्षा की विशाल रोशनी से यूपी सहित देश को रोशन करना था। खूबसूरत, विशालकाय और न जाने कितने प्रोफेशनल कोर्सों से परिपूर्ण जौहर युनिवर्सिटी, शिक्षा की रोशनी के लिए किसी आफताब से कम नहीं है। सारी सुविधाओं से परिपूर्ण और सभी वर्गों तक जौहर विश्वविद्यालय की शिक्षा की पहुंच सहज ही है।

पूर्व मंत्री आज़म खान गंगा में आचमन करते हुए एवं दाएं सामाजिक कार्यकर्ता साहिल रज़ा

लगभग तीन दशकों से ज्यादा रामपुर के लोगों ने जिन पर लगातार विश्वास किया साथ दिया तथा उनको कभी कोई शिकायत नहीं थी अपने इस चहेते प्रतिनिधि से।

जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना के 15 साल बाद अचानक से 80 से ज्यादा मनगढ़ंत केस लाद दिये गये। मुर्गी चोरी, बकरी चोरी, अनाज चोरी जैसे भी केस!! जिसे सुनकर शायद ही किसी को कोई विश्वास हो?

उन्होंने आगे बात बढ़ाते हुए कहा कि भला बताइये कि, “2005-2006 में विश्वविद्यालय का काम पूरा हो चुका था। उसके बाद बसपा सरकार भी पूर्ण बहुमत से सत्ता में थी लेकिन तब किसी दलित ने किसी किसान ने कोई आरोप नहीं लगाया।” लेकिन जैसे ही सत्ता में वर्तमान सरकार आयी तो न जाने कितने केस राजनीतिक विद्वेष के चलते तैयार हो गये। अगर निष्पक्ष रूप से सारी जांचें हों तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाये।

आज़म खान साहब जैसे जन प्रतिनिधि अब कुछ गिने-चुने ही बचे हैं। जो सिद्धांतवादी, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ होते हुए राजनीति को जनसेवा का मार्ग मानते हैं। सपा के संस्थापकों में से एक मो.आजम खान अपनी पार्टी के साथ समाजवादी सिद्धांतों के लिए सदैव दिल से पूरी ऊर्जा के साथ लगे रहे। अभी जेल जाने के बाद जेल में ओवैसी ने उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की लेकिन खान साहब ने मिलने से मना कर दिया। कयास यह लगाये जा रहे थे कि अगर आज़म खान साहब सपा से अलग हो जायें और ओवैसी से मिलकर चुनाव लड़ें तो वर्तमान में चल रही उनकी सारी समस्याओं का समाधान एक चुटकी में हल हो जायेगा लेकिन खान साहब अपने सिद्धांतों पे अडिग रहना जानते हैं। बोले, कुछ भी हो जाये, मैं अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकता।

‘शहंशाह ही है वो सियासत का।
वो कब झुका था जो अब झुकेगा।।’

आज राजनीति में ऐसा कोई विरला ही होगा जो उम्र के इस पड़ाव में भी आकर, बीमार होते हुए भी अपनी पार्टी के प्रति इतना समर्पित हो सकता है। आज तक किसी धर्म का उन्होंने कभी अपमान नहीं किया। उनके कुछ भाषणों को आधा-अधूरा दिखाकर मीडिया उनके भाषणों को आपत्तिजनक बनाती रही, बताती रही। लेकिन उन्होंने ईर्ष्या और नफरत किसी के लिए नहीं रखा, सबके लिए समानता का भाव रखा। जब अखिलेश मुख्यमंत्री बने तब एक साल बाद प्रयागराज में कुंभ के महान आयोजन की जिम्मेदारी आज़म खान साहब को दी गयी, कुछ लोग नाराज हुए लेकिन मां गंगा के प्रति उनका सम्मान सब ने देखा, आयोजन बहुत अच्छे से संपन्न हुआ। संत महात्माओं ने भी खान साहब की तारीफ की।

ऐसे नेक दिल और यूपी में मुस्लिमों के सर्वमान्य नेता को आज सियासत की ईर्ष्या झेलनी पड़ रही है। युनिवर्सिटी के लिए कुछ जमीन हड़पने के अलावा विधायक बेटे अब्दुल्ला की उम्र को लेकर भी एक केस दायर है जिस पर आजम खान साहब तथा उनकी पत्नी और विधायक बेटे को जेल भेज दिया गया था।

इन केसों पर सुनवाई हो रही हैं। माननीय अदालत से सभी को न्याय की उम्मीद है। आज़म खान साहब की पत्नी तजीन फातिमा जो खुद भी विधायक हैं और सांसद रह चुकी हैं, उनको जमानत पर रिहा कर दिया गया है।

जेल में बंद 73 वर्षीय सांसद आज़म खान साहब तथा उनका विधायक बेटा कोरोना से पीड़ित हुए और सीतापुर जेल से मेदांता अस्पताल लखनऊ में इलाज के लिए भेजा गया। लेकिन आधा-अधूरा इलाज करा कर जल्दबाजी में फिर से उन्हें सीतापुर जेल भेज दिया गया। जहां खान साहब की हालत फिर से अचानक नाजुक हो गयी और लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उन्हें फिर से भर्ती कराया गया। खान साहब के समर्थकों ने उनके ठीक होने के लिए फिर से दुआएं और प्रार्थनाएं शुरू कर दीं हैं। रामपुर के लोगों और आज़म खान साहब के तमाम समर्थकों में आक्रोश है लेकिन वो शांत होकर माननीय न्यायालय की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।

आज़म खान साहब की तरह उनके समर्थकों को भी अपने देश के संविधान और माननीय न्यायालय पर पूरा भरोसा है। सोशल मीडिया में भी सरकार से सभी लोग मांग कर रहे हैं आज़म खान साहब के स्वास्थ्य को लेकर सही से इंतेज़ाम कराये जायें।।

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