मानव के अत्याचार, कब तक सहेगा जंगल का संसार

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  • मानवता के पतन की एक और दर्दभरी घटना, अन्नानास में विस्फोटक भरकर गर्भवती हथिनी को खिलाया, गर्भ में पल रहे बच्चे व हथिनी की दुःख भरी मौत

दुनिया में मानव कृत कुछ ऐसी दुःखद घटनाएं होती हैं जो विभत्सा की परिभाषा को भी लांघ जाती हैं। मानवीयता तार-तार हो जाती है। तब लगता है ईश्वर की अनुपम कृति भला मानव कैसे हो सकता है? मासूमों के साथ बलात्कार और उनकी निर्मम हत्या करने वाले भला मानव कैसे हो सकते हैं। अदालतें उन्हें मानव समझने की भूल भला कैसे कर सकती हैं। मानवाधिकार ऐसे मानसिक अपाहिज कीड़ों के लिये तो कतई नहीं है। केरल से आई एक खबर ने मन को पुनः द्रवित कर के रख दिया है।

 एक भूखी गर्भवती हथिनी को कुछ अराजक तत्वों ने अन्नानास में विस्फोटक भर कर खिला दिया। जिससे तीन दिन तक वेलियार नदी में खड़ी रहकर अपने मासूम बच्चे को बचाने का व अपनी जलन कम करने का भरसक प्रयास करती रही। लेकिन वह जिंदगी की जंग बहुत ही दुःखद तरीके से हार गयी। खुद की तड़प और गर्भ में पल रहे अपने बच्चे की तड़प को शांत न कर सकी।

यह दुःखद घटना इंसान का इंसानों के प्रति राक्षसीपन जरूर नहीं था, लेकिन एक गर्भवती माँ के साथ जरूर बहुत बड़ा अत्याचार था, बहुत बड़ा पाप था। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस में हममें से कई लोग जागरूकता अभियान का ढोंग भी रचेंगे। हम क्या सही मायनों में ईश्वर की अनुपम कृति हैं?

courtesy: by: social media

घटना केरल के मल्लापुरम व पल्लकड़ जिले के पास के जंगलों की है। वनाधिकारी सुनील कुमार के ने मीडिया को बताया कि ‘वन विभाग के अधिकारियों को यह हथिनी 25 मई को मिली थी जब यह भटक कर पास के खेत में पहुंच गई थी, शायद वो अपने गर्भस्थ शिशु के लिए कुछ खाना चाह रही थी। हथिनी के घायल होने की ये घटना लोगों की नज़र में तब आई जब रेपिड रेस्पांस टीम के वन अधिकारी मोहन कृष्णनन ने फ़ेसबुक पर इसके बारे में भावुक पोस्ट लिखी।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि घायल होने के बाद हथिनी एक गांव से भागते हुए निकली लेकिन उसने किसी को भी चोट नहीं पहुंचाई। ऐसे हालात में वो इंसानों से महान साबित हुईं। हथिनी की तस्वीरें फ़ेसबुक पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि वह भलाई से भरी हुई थी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथियों की मदद से हथिनी को नदी से बाहर निकालने के प्रयास किए लेकिन वो नदी में ही खड़ी रही। आख़िरकार उस गर्भवती हथिनी ने 27 मई को नदी में ही खड़े रहते हुए ही जान दे दी, वो अपने बच्चे को भी न बचा सकी। जिसके लिये वो भरसक प्रयास कर रही थी। मानव आखिर कब जानवरों की ममता से सीख लेगा?  उसके शव के पीएम से ही पता चला था कि वो गर्भवती थी।

रहेसाइलेंट वैली नेशनल पार्क, पलक्कड़ के वाइल्डलाइफ़ वार्डन सैमुअल पचाऊ का कहना है कि इस संबंध में मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है और हथिनी की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने की कोशिशें की जा रही हैं।  -राहुल कुमार गुप्त

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