यूपी में अब एमआर केस बेस्ड सर्विलांस अभियान

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कार्यशाला: राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुक्रवार को संपन्न 
अगले वर्ष तक देश को मीजल्स-रूबेला मुक्त करने का लक्ष्य
लखनऊ, 31 मई 2019: उत्तर प्रदेश को अगले वर्ष तक मीजल्स-रूबेला (एमआर) मुक्त करने की प्रक्रिया में स्वास्थ्य विभाग ने एक और कोशिश शुरू की है। विभाग वर्ष के 30वें सप्ताह यानि अगस्त से केस बेस्ड सर्विलांस अभियान शुरू करने जा रहा है। इस संबंध में राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आखिरी सत्र शुक्रवार को संपन्न हो गया है।
राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर एपी चतुर्वेदी ने बताया कि अक्टूबर 2013 में मीजल्स आउटब्रेक सर्विलांस शुरू हुआ था। इसके बाद 26 नवंबर 2018 को मीजल्स-रूबेला का नियमित टीकाकरण शुरू हो गया। इस अभियान के दौरान उत्तर प्रदेश में 99.11 प्रतिशत टीकाकरण हुआ जो कि अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक रहा। डॉक्टर चतुर्वेदी के अनुसार लगभग शत-प्रतिशत सफल टीकाकरण अभियान से मीजल्स-रूबेला के मरीजों में काफी कमी आई है। इसलिए मीजल्स आउटब्रेक सर्विलांस के स्थान पर केस बेस्ड सर्विलांस अगस्त से शुरू किया जाएगा।
आउटब्रेक सर्विलांस के दौरान कम से कम 5 मामलों पर कार्यवाही होती थी जबकि अब एक भी मामला पता चलने पर पूरी कार्यवाही होगी। उन्होने बताया कि प्रदेश के सभी जनपदों से आए लोगों को चार बैच में विभाजित कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। इस राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आखिरी सत्र शुक्रवार को संपन्न हो गया है। डॉक्टर चतुर्वेदी ने बताया कि सरकार अगले वर्ष 2020 तक मीजल्स-रूबेला के उन्मूलन और रूबेला / जन्मजात रूबेला सिंड्रोम (सीआरएस) के नियंत्रण के लिए संकल्पबद्ध है। इसलिए मीजल्स-रूबेला कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।
बच्चों की मृत्यु दर घटेगी :
एमआर वैक्सीन नियमित टीकाकरण का हिस्सा है। यह मीजिल्स वैक्सीन की जगह ली है जो कि अभी 9-12 माह और 16-24 माह के बच्चों को दी जाती रही है।  इस टीकाकरण कार्यक्रम से प्रदेश में पाँच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर कम होगी। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं में रूबेला के संक्रमण से होने वाले गर्भपात तथा शिशु में अंधेपन, बहरेपन जैसी विकलांगता और जन्मजात हृदय रोग के मामलों में कमी आएगी।
यह भी जानें:
• एमआर की दो खुराक 9 माह से 12 माह के बीच और 16 माह से 24 महीने के बीच लगवाना अति आवश्यक है
• एमआर टीका सभी जनपदों में नियमित टीकाकरण के तहत पूरी तरह से निःशुल्क लगाया जा रहा है
• इस टीकाकरण से जानलेवा साबित होने वाली बीमारियों से मिलेगी मुक्ति
• गत वर्ष नवंबर में सभी 75 जिलों के करीब 8 करोड़ बच्चों को लगा था टीका
• देश में एमआर टीकाकरण अभियान का पहला चरण फरवरी 2017 में शुरू हुआ
• पहले चरण में तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा, लक्षद्वीप और पोंडिचेरी में टीकाकरण शुरू हुआ
• अब तक देश के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 13 करोड़ बच्चों को लग चुका है एमआर का टीका

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