नौनिहालों पर भी मोदी जी का क्रेज

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कोरोना से लड़ने के लिये मासूम भी कर रहे मोदी जी के दिशा-निर्देश का पालन

  • राहुल गुप्त की रिपोर्ट

लखनऊ/बाँदा, 01अप्रैल, 2020: देश क्या पूरा विश्व एक प्रतिकूल परिस्थिति से गुजर रहा है, देश-दुनिया में शायद ही इसके पहले कोई ऐसा वक्त आया हो, कि पूरे विश्व का मानव समुदाय भयाक्रांत हुआ हो। इक्कसवीं सदी के दूसरे दशक के आगाज में ही पूरे विश्व में त्राहि-त्राहि मची हुई है। चीन में जन्मा कोविड-19, यमराज का लौकिक रूप बन चुका है।

विश्व के तमाम विकसित देशों में मौत व भय का तांडव मचाने वाले वायरस का प्रकोप भारत में भी देखने को मिलने लगा, जिससे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी ने ट्रायल के तौर पर जनता कर्फ्यू का आयोजन किया। इसमें देश की जनता के साथ बच्चे-बच्चे ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और वह इतना सफल हुआ कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को मोदी जी की तारीफ करनी पड़ी। इस कर्फ्यू की सफलता के तुरंत बाद ही समस्त देश में लॉकडाउन की घोषणा हुई और सबकुछ थम सा गया।

कोरोना की भयावहता के बारे में लोगों को मालूम जरूर था लेकिन जब मोदी जी ने टीवी में आकर जनता का आह्वान किया तो देश के साथ देश के लगभग समस्त बच्चे भी उनके आह्वान को ध्यानपूर्वक सुन रहे थे। कोरोना से बचने के जो उपाय देश के प्रधानमंत्री जी ने बताये व लॉकडाउन के पालन का आग्रह किया वो भले बड़ों के लिये कमतर काम किया हुआ, लेकिन बच्चों के दिल में एक-एक बात घर कर गयी। सोशल मीडिया में कई ऐसी पोस्टें देखने व सुनने को मिलीं जो इन नौनिहालों के भोलेपन व देश के प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति विशेष प्रभाव को प्रकट करता है।

बता दें कि लॉकडाउन से संबंधित इनके वीडियो व पोस्टें देखकर हम बड़ों तक को प्रेरणा मिलती है। एक ऐसा ही वीडियो लॉकडाउन होने के दूसरे दिन समक्ष आया। दो जुड़वा मासूम बच्चे कुंज और ट्विंकल जो यूपी के बाँदा जनपद से हैं, इसमें वो आपस में मोदी जी द्वारा कही गयी बातों को दोहराते हुए खुद एक-दूसरे को समझाते हैं कि मोदी जी ने कहा है सब दुकानें बंद रहेंगी, अब चॉकलेट भी नहीं मिलेगी, उनके पड़ोस की चाची की भी एक छोटी सी दु्कान बंद है, सबको अंदर रहना है बाहर नहीं निकलना है। थोड़ा बहुत टीवी या मोबाईल देखने वाले बच्चों पर मोदी जी का जो क्रेज है शायद ही भारत में किसी और नेता का रहा हो। लेकिन उन गरीब बच्चों का क्या जो मोबाईल और टीवी जानते तक नहीं, उन्हें तो भूख से जंग लड़ते रहना है।

देश अपने वर्तमान प्रधानमंत्री को इस विश्वास से देखता है कि वो कुछ बेहतर करेंगे, गरीब के बच्चे फिर कभी भूख से जंग नहीं लड़ेंगे। वो भी फ़क्र से अपने प्रधानमंत्री का नाम लेंगे व उनके दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। मोदी जी द्वारा कोरोना के खिलाफ छेड़े गये अभियान में बच्चे भी अपने बड़ों को हिम्मत देने का कार्य कर रहे हैं, बचपन में ही अपनी पसंदीदा चीजें छोड़ने को तैयार हैं। देश में जब ऐसे धैर्यवान नौनिहाल हों, अपने प्रधानमंत्री की बातों को सर आँखों पर रखते हों तो कोरोना जैसे इस खतरनाक महामारी से देश में काफी बचाव किया जा सकता है। देखने में आता है इस खतरनाक महामारी में भी कुछ लोग राजनीति करने से बाज नहीं आते, लॉकडाउन का पूर्णतः पालन न होने पर ही कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ी है।

बाहर रह रहे कामगारों को गलत अफवाहों द्वारा बहकाया गया, जबकि सरकार ने खाने-पीने रहने व अन्य कई जरूरत की चीजों की व्यवस्था पहले ही कर दी थी। लेकिन सरकारी बातों पर जल्द विश्वास कहाँ जमता है, यह तो देश में पहले से ही चलन में नहीं था। अब सरकार के समक्ष बहुत बड़ी चुनौती है जिसे देश की जनता के सहयोग से आसानी से दूर किया जा सकता है।

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