सतना, 04 अप्रैल। इंडोनेशिया, तुर्की, जॉर्डन और मिस्र जैसे मुस्लिम देशों में महिलाओं के लिए कानून हैं। यहां तक कि पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी पारिवारिक व विवाह संबंधी कानून लागू हैं, लेकिन भारत में मुस्लिम पारिवारिक कानून नहीं हैं। मुस्लिम पारिवारिक कानून भारत में होना चाहिए, जिससे कि भारतीय मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिल सके। यह बात नौ सूत्रीय मांगों को लेकर भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की बैठक में सतना (मध्य प्रदेश) के नजीराबाद में मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने कहीं। बैठक में एक साथ तीन तलाक के मुद्दे पर भी चर्चा की गई।
महिलाओं ने कहा कि अगस्त, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को असंवैधानिक मानकर ऐतिहासिक कदम उठाया है। वहीं हलाला, बहु विवाह, शादी की आयु, बच्चों की कस्टडी, जायदाद में हिस्सा आदि मुद्दों को छोड़ दिया गया। जबकि इन मुद्दों पर भारतीय संविधान के कुछ अनुच्छेद मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करते हैं।







