नई दिल्ली,12 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पड़ोसी देश नेपाल में हैं। भारतीय प्रधानमंत्री का यह नेपाल दौरा दोनों देशों के बीच संपर्कों को नया आयाम देने वाला माना जा रहा है। नेपाल भारत की विदेश नीति में हमेशा से अहम देश रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव की वजह से भारत सजग हो गया है।
ओली की चीन से नजदीकी को लेकर भारत सतर्क:
चीन के परिप्रेक्ष्य में भारत-नेपाल के रिश्तों में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। चीन के करीबी माने जाने वाले माओवादी नेता और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपनी दूसरी सियासी पारी का पहला विदेश दौरा भारत का किया। वे 6-8 अप्रैल के बीच भारत दौरे पर थे जबकि उन्हें चीन दौरे का भी न्योता मिला था। इसे दोनों देशों के बीच संतुलन बनाने की नेपाल की कोशिश के रूप में देखा गया।
अप्रैल के तीसरे हफ्ते में नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली चीन के दौरे पर थे। चीन ने नेपाल को जोड़ते हुए रेल समेत तमाम परियोजनाओं का ऐलान किया और उम्मीद जताई कि भारत भी नेपाल की खुशहाली के लिए साथ आएगा। लेकिन भारत इस त्रिपक्षीय परियोजना को लेकर रुचि नहीं दिखा रहा। क्योंकि चीन को लेकर भारत में संशय है। इससे पहले नेपाल में ऑप्टिकल फाइबर परियोजना, इंटरनेट सेवा समेत कई ऐलान चीन नेपाल के लिए कर चुका है। लेकिन क्या भारत के लिए इतना आसान है इस गठजोड़ का हिस्सा बनना। जी बिल्कुल नहीं।
त्रिपक्षीय सहयोग के ऑफर के पीछे चीन की रणनीति साफ दिख रही है। चीन नेपाल के समाज और वहां की व्यवस्था में भारत की पैठ को समझता है। ऐसे में वह भारत के साथ बिना टकराव की मुद्रा के नेपाल में अपना आर्थिक, रणनीतिक और सैन्य हस्तक्षेप बढ़ाते रहना चाहता है। माओवादी नेता ओली का शासन में आना चीन के लिए एकदम अनुकूल स्थिति भी है।
चीन की ओर से पेश चुनौती को देखते हुए भारत ने भी अपनी परियोजनाओं पर काम तेज किया है। इस वित्तीय वर्ष के अप्रैल माह से भारत ने नेपाल के लिए 650 करोड़ रुपये आवंटित करने का फैसला किया है। भारत ने नेपाल को दी जाने वाली सहायता राशि में पिछले साल की तुलना में 73 प्रतिशत तक वृद्धि की है। भारत के साथ भी नेपाल की रेल लिंक पर बातचीत आगे बढ़ रही है। केपी शर्मा ओली के इस दौरे के दौरान भारत-नेपाल के बीच काठमांडू-रक्सौल रेल लिंक पर समझौता हुआ। भारत इस परियोजना को और विस्तार देकर चीन के रेल लिंक को चुनौती देने की कोशिश में है। अब देखना ये है कि चीन और भारत में से कौन पहाड़ी देश नेपाल को पहला रेल लिंक देने का काम पूरा करता है।







