अब मुझसे न देखी जाएगी तेरी हालत: बेसिक फ़ोन
एक समय था, जब बेसिक फ़ोन यानि लैंडलाइन का ज़माना था। लोग इसे घर और ऑफिस में बतौर शो पीस रखते थे और बड़े ही शान से लोगों से बात करते थे। नीचे कमरे में घंटी बजते ही ऊपर कमरे में कार्य में मशगूल फलां को जब नीचे से कोई आवाज देता या देती कि फ़ोन आया है तो वह सारे काम छोड़कर फ़ौरन सीधे से दौड़ता हुआ आता था और बड़ी ही शान से फ़ोन अटेंड करता था।

कुछ लोग उस दौरान यह भी कहते हुए सुने जाते थे कि बड़े घर वाले हैं इनके यहाँ फ़ोन लगा है। हम लोगों ने भी अपने रिश्तेदारों को इमरजेंसी काल के लिए इन्ही का नंबर दे रखा है। फिर धीरे धीरे वक़्त बदला। यह बेसिक फ़ोन पीसीओ में भी मिलने लगा, लोग वक़्त निकाल -निकाल कर बात करने के लिए पीसीओ पर भीड़ की तरह जमने लगे। पीसीओ संचालक की भी खूब दुकान उस दौरान चल निकली। लेकिन वक़्त फिर आगे बढ़ा, मोबाइल का ज़माना आया तो बेसिक फ़ोन दौड़ में पीछे हो गया वह इतना पीछे हो गया कि अब कबाड़ी वाले भी इन्हे कम पैसे में लेने से कतराने लगे! हाल यह हो गया कि अब बमुश्किल ही किसी घर में दिखता हो! अगर दिखता भी हैं तो वो ऑफिस में या फिर इंटरनेट स्पीड बढ़ाने के किसी घरनुमा ऑफिस में!
लेकिन फिलहाल अभी जिस हाल में बेसिक फ़ोन मिला वह आप फोटो देखकर अंदाजा लगा सकते हैं!







