गलत काम कर रहे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए
नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2019: केंद्र सरकार द्वारा सूबे की एलओसी पर होने वाले व्यापार को स्थगित किए जाने से राजनीति शुरू हो गई है। घाटी आधारित नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी से लेकर अलगाववादी संगठन सरकार के इस कदम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण कह रहे हैं। वहीं, पुंछ के चक्कां दा बाग और पीओके के राबलाकोट के बीच कारोबार करने वाले संगठन क्रास एलओसी ट्रेड यूनियन, पुंछ के प्रधान पवन आन्नद ने सरकार के इस फैसले का स्वागत तो किया परंतु उनका यह भी कहना है कि यदि इस ट्रेड से जुड़े कुछ लोग गलत काम कर रहे हैं तो उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि इस क्रास एलओसी ट्रेड की शुरुआत तत्कालीन यूपीए के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने पाकिस्तान के साथ विश्वास बहाली कदमों के तहत की थी। इसके बाद उरी के सलामाबाद और पीओके के मुजफ्फराबाद के बीच भी यह सेवा शुरू हुई। इन दोनों स्थानों पर बनाए गए ट्रेड फेस्लीटेशन सेंटर्स पर 609 कारोबारी पंजीकृत किए गए। इनमें 229 उरी के सलामाबाद तथा 380 पुंछ के चक्कां दा बांग पर पंजीकृत किए गए। दिलचस्प बात यह है कि यह कारोबार नकद भुगतान की बजाए सामान के बजन के बराबर सामान यानि कि बार्टर-सिस्टम के तहत बिना टैक्स आधार पर शुरू हुआ। इस ट्रेड में दोनों ओर से 21 वस्तुओं को चिन्हित कर कारोबार करने की अनुमति दी गई।
सूत्रों का कहना है कि 21 अक्टूबर सन् 2008 में शुरू हुए क्रास एलओसी ट्रेड में अब तक करीब सात हजार करोड़ का कारोबार हुआ। दरअसल, क्रास एलओसी ट्रेड के उक्त दोनों रास्तों से हवाला, ड्रग्स तथा हथियारों आदि की तस्करी के कई मामले सामने आए। इसके बाद प्रमुख राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने अपनी जांच के दौरान पाया कि क्रास एलओसी ट्रेड रूट्स का पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगना बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं। हवाला कारोबार नेटवर्क में घाटी से लेकर नई दिल्ली तक कईं लोग जुड़े हैं।
गत दिनों जम्मू में पड़े छापों के दौरान भी सरकारी एजेंसियों को इस प्रकार के संकेत मिले। सूत्रों का कहना है कि इस ट्रेड की आड में टेरर तथा अलगावाद के लिए फंडिंग भी की जाती रही है। मालूम हो कि इन सबके मददेनजर एनआईए अरसा पूर्व इस ट्रेड को बंद करने की बात कह चुकी है। बहरहाल गत दिवस केंद्रीय गृहमत्रांलय तथा सूबे के गृह विभाग के एक आदेश पर इस ट्रेड को अनिश्चित काल के लिए स्थागित कर दिया गया। इसे लेकर घाटी में नेंका उपप्रधान एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा पीडीपी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के साथ साथ ऑल पार्टी हुरियत कांफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि मोदी सरकार की यह कार्रवाई अटल बिहारी वाजपेयी की नीतियों के खिलाफ है।







