इस इम्तहान को ज़िंदगी का आखिरी इम्तेहान मत समझिये, अभी बहुत मौके आएंगे!

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कॉम्पिटिशन आज बहुत ज्यादा है। इसका मतलब हम सिर्फ यही नहीं सोचते रहें कि ये बोर्ड एग्जाम्स हमारी जिंदगी की पहली और आखिरी लड़ाई है। हम यह कभी न सोचें कि अगर कहीं फेल हो गए या अच्छे नंबर नहीं आए तो जिंदगी यहीं रुक जाएगी, आगे कुछ करने के लिए बचेगा ही नहीं। आम जिंदगी में ऐसे तमाम उदाहरण हैं, जब शुरुआती विफलता को लोगों ने आगे चलकर अपनी मेहनत और काबिलियत से बड़ी सफलता में बदल दिया। इतना ही नही, वे हजारों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत भी बने।

आप लोग देश के पूर्व राष्ट्रपति और साइंटिस्ट ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की सोच और सफलता के बारे में जानते होंगे। लेकिन उनकी इस सफलता से पहले की विफलता की कहानी भी काफी मशहूर है। करियर के शुरुआती दौर में वह फाइटर पायलट बनना चाहते थे। बहुत ही कम मार्जिन से वह चूक गए। बाद में वह साइंटिस्ट बने। मिसाइलमैन की उपाधि मिली और देश के सर्वोच्च पद को भी सफलतापूर्वक संभाला। इन सभी बातों से एक ही बात निकलती है कि एक एग्जाम से किसी के व्यक्तित्व को ना तो पहचाना जा सकता है और ना ही परिभाषित किया जा सकता है। इस बात को याद रखना चाहिए कि एग्जाम्स जिंदगी के अहम घटनाओं में से एक जरूर है, लेकिन इकलौती घटना नहीं। इसके बाद भी कई और मौके जिंदगी में मिलते हैं। तैयारी करो, एग्जाम में शामिल हो, डरो बिल्कुल नहीं। जिंदगी इन टेस्ट और एग्जाम्स से बहुत बड़ी है।

एग्जाम्स की तैयारी करते समय चेहरे पर स्माइल रहनी चाहिए। वैसे भी तनाव के साथ तो पढ़ाई नहीं होती। तनावरहित रहने से ही एग्जाम में प्रदर्शन अच्छा होता है, सफलता मिलती है और जिंदगी में भी हम आगे बढ़ते हैं। एग्जाम हॉल में प्रवेश करते समय भी चेहरे पर स्माइल जरूर होनी चाहिए। एग्जाम के बाद भी हॉल से निकलते समय यह स्माइल बरकरार रखेंगे तो टेंशन कभी करीब नहीं फटकेगी।

एग्जाम में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए यह जरूरी है कि आप टाइम मैनेजमेंट को अच्छी तरह सीख और समझ लें। टाइम मैनेजमेंट का दूसरा नाम है सेल्फ डिसिप्लिन। यह तो सभी को पता है कि दिन में 24 घंटा होते हैं और यही समय हर स्टूडेंट के लिए होता है। जो स्टूडेंट टाइम मैनेजमेंट सीख लेता है, वह स्पेशल हो जाता है। हर व्यक्ति की अपनी खासियत होती है। अपनी खासियतों को इंसान टाइम मैनेजमेंट के द्वारा ही निखार सकता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि टाइम मैनेजमेंट कुछ नहीं है, बस अपनी क्षमता को सही तरीके से मैनेज करना है।

प्रभावी और सही टाइम मैनेजमेंट में एक वक्त में एक काम के बारे में सोचें और उसे अंजाम तक पहुंचाएं, ना कि हर समय ढेर सारी चीजों के बारे में सोचते रहें। इससे एक भी काम पूरा नहीं होगा। इस बात को भी जरूर ध्यान में रखें कि एग्जाम की तैयारी के दौरान लचीला रुख अपनाना भी जरूरी है। अहम कामों के लिए हमेशा योजना बनाएं, लेकिन कुछ बदलाव की गुंजाइश भी जरूर रखें। असलियत यह है कि तैयारी एक दिन का काम नहीं होता। यह लंबी चलने वाली प्रक्रिया है। ध्यान में रखें कि एग्जाम्स जब सिर पर हों तो नए प्रयोग और अपनी आदतों में बड़े बदलावों की कोशिश न करें। अपने पढ़ाई के तरीकों पर यकीन करें।

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