मायावती और भतीजे की मुश्किलें बढ़ाने की कोशिश: बसपा समर्थकों ने कहा अपना वेतन कटवाकर भर देंगे पैसा

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  • यूपी सीएम ने भी कहा बबुआ को भी भरना होगा जुर्माना, लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा में मूर्तियों पर 5919 करोड़ खर्च का मामला
  • सपा सरकार में भी हुई थी स्मारकों में घोटाले की जांच, तब 40 हजार करोड़ घोटाले का लगा था आरोप

नई दिल्ली, 09 फरवरी 2019: लोकसभा चुनाव के ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा बसपा सरकार में बने स्मारकों में लगी मूर्तियों पर हुए खर्च को सरकारी खजाने में जमा कराने की टिप्पणी ने बसपा अध्यक्ष मायावती की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उधर यूपी सीएम ने भी कहा कि बबुआ को भी जुर्माना भरना होगा। बसपा सरकार में लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बने स्मारकों में मायावती, डा. अम्बेडकर, कांशीराम और बसपा के चुनाव चिह्न हाथी की बड़ी तादाद में मूर्तियां लगी हैं। इन मूर्तियों के निर्माण पर 5919 करोड़ रुपये खर्च हुआ था। उधर बसपा समर्थकों ने कहा कि वह अपना वेतन कटवाकर पैसा भर देंगे लेकिन अपने लीडर पर आंच नहीं आने देंगे क्योकि यह मूर्तियां हमारे लिए अपना स्वाभिमान हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को लेकर 2009 में रविकांत की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है। पिछले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने सुनवाई के दौरान कहा,‘‘हमारा ऐसा विचार है कि मायावती को अपनी और अपनी पार्टी के चुनाव चिह्न की मूर्तियां बनवाने पर खर्च हुआ सार्वजनिक धन सरकारी खजाने में वापस जमा करना होगा। ’इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्तियों ने मायावती के वकील सतीश चन्द्र मिश्र द्वारा प्रकरण की अगली सुनवाई मई 2019 के बाद करने के आग्रह को ठुकरा दिया और कहा, अब सुनवाई 2 अप्रैल को होगी। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने श्री मिश्र से कहा, आप अपनी क्लाइंट को बता दें कि उन्हें मूर्तियों पर खर्च पैसे को प्रदेश के सरकारी खजाने में वापस जमा कराना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने वकील श्री मिश्र से कहा, हमारा प्रारम्भिक विचार है कि मायावती को मूर्तियों का सारा पैसा अपनी जेब से सरकारी खजाने को भुगतान करना चाहिए।

 

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमें कुछ और कहने के लिए मजबूर न करें। लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर करने की खातिर गठबंधन करने वाली बसपा-सपा को सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी और इसके पहले अखिलेश सरकार में बने रिवर फ्रंट में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की गई पूछताछ ने राजनीतिक तौर पर संकट की स्थिति में ला खड़ा किया है। स्मारक निर्माण में कथित घोटाले के मद्देनजर चन्द रोज पहले ही

केन्द्रीय जांच एजेन्सियों ने निर्माण कार्य से जुड़े रिटायर अधिकारियों और ठेकेदारों के ठिकानों को खंगाला है। बसपा सरकार में बने स्मारकों, उनमें लगी हाथियों, मायावती, कांशीराम, बहुजन समाज के महापुरुषों की मूर्तियों को लेकर तत्कालीन अखिलेश सरकार ने वर्ष 2012 में स्मारकों के निर्माण में घोटाले की आशंका को लेकर जांच कराई थी। उस समय सरकार ने बसपा सरकार पर स्मारकों में जमीन व मूर्तियों को लेकर 40 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था। तब कहा गया था कि, लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा में बनाये पाकरे में मूर्तियों पर 5919 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि इन पाकरे व मूर्तियों के रखरखाव के लिए 5634 कर्मी रखे गये थे। इस सम्बंध में साल 2015 में तत्कालीन समाजवादी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को पूरी जानकारी दी थी।

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