रक्षाबंधन: प्यार से बंधे दिल के बंधन

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जी के चक्रवर्ती

हम सभी हिन्दू धर्मालंबियों के मध्य रक्षा बंधन का त्यौहार बड़े ही संजीदा से लम्बे समय से मनाने की परम्परा देश मे चली आ रहीं हैं और रक्षा बंधन पर दूरदर्शन, आकाशवाणी, समाचार पत्रों से लेकर पत्र पत्रिकाओं तक में रक्षा बंधन से संबंधित अनेको तरह के कथायें, कहानियां, लेख इत्यादि प्रति वर्ष प्रकाशित होती हैं और ऐसे अनेको किस्से कहानियाँ हम पढ़ते, सुनते और देखते-देखते बोर हो चुके हैं, इसलिये आज मैंने एक नये अंदाज़ में कुछ रक्षा बंधन के उपलक्ष्य में लिख कर प्रस्तुत करने का मन बना कर लिखने को प्रेरित हुआ हूँ। आज रक्षा बंधन से संबंधित कुछ न कुछ लेख या हास्य परिहास अवश्य प्रकाशित होना चहिये यही सोच कर कुछ विषय वस्तु की तलाश कर ही रहा था कि अचानक एक घटना मस्तिष्क में कौंध गया और उसे लिखने को उद्धत हुआ।

हमारे देश मे ही नही अपितु भारत वर्ष के पड़ोसी दूसरे देश में विशेषकर नेपाल में भी रक्षाबंधन मनाने की परिपाटी है। वहां के लोग भी अपने बहनों के हाथों से प्राचीन काल से रक्षा सूत बंधवाते चले आ रहे हैं।

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यह बात उन दिनों की है जब पृथ्वी सत्ययुग से पूर्व के दौर से गुजर रही थी। यम और यमुना आपस मे भाई बहन हुआ करते थे। यहां यम और यमुना कौन है यह कहने की हमे आवश्यकता नही यम और यमुना से हम सभी लोग भली भांति पारीचित हैं।

रक्षाबंधन के त्योहार को मनाये जाने के पीछे अनेको कहानीयां प्रसिद्ध हैं, लेकिन सबसे प्राचीन और शायद सर्व प्रथम होने वाली घटना जो सत्ययुग से भी पहले समय के कहे तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी। यह घटना सृस्टि के उदभव कालीन दौर का है जो इस प्रकार से है। क्योंकि इससे पहले की कोई कहानी अभी तक हम लोगों के सामने नही आयीं है इसलिये इसे सर्व प्रथम घटना ही कहा जयेगा।

वैसे कहा जाये तो हमारे हिंदू धर्म मे मनायी जाने वाली प्रत्येक त्योहारों के पीछे इंसानो के स्वास्थ, मनोरंजन,पवित्र विचार एवं सही आचर आचारणो के पालन करते रहने के लिये सदैव प्रेरित करते रहने के उद्देश्य एवं प्रयोजन से हमारे समाज मे इसे एक व्यवस्था के रूप में स्थापित किया गया। इसी प्रकार के अनेको रीति रिवाजों के माध्यम से हम इंशानो के चारित्रीक से लेकर सामाजिक मर्यादाओं को याद दिलवाने और सचेत करवाते रहने के लिये एक बहन अपने भाई के कलाइयों में रक्षा सूत बांध कर भाई बहन अपने आपस के मध्य संबंध के मर्यादा की रक्षा करने के लिये एक डोर के माध्यम से एक लक्ष्मण रेखा खींच दिये जाने की प्रथा समाज के लोगों को अनुशासाशन में रखने के लिये एक मानदंड स्वरूप इस व्यवस्था को समाज मे स्थापित किया गया।

मृत्यु के देवता यम और जल धारा के रूप में बहने वाली यमुना आपस मे भाई-बहन हुआ करते थे। सैकड़ो वर्ष गुजर गये होंगे जब यम राज की अपनी बहन यमुना से मुलाकात नहीं हुई तो इस बात को लेकर एक विशेष अवसर पर यमुना बहुत दुखी हो उठती थी। वह अपने भाई से मिलना चाहती थी लेकिन एक जीवित प्राणी के मृत्यु के देवता से मुलाकात, नही यह कतई नही हो सकता, वह अपने आकांक्षा के आगे विवश थी। वह यम से मुलाकात करने के विषय मे मदद मांगने देवी गंगा के पास गयीं।

गंगा ने यम राज को उनकी बहन के विषय मे याद दिला कर उससे जाकर मिलने को कहा। इस बात से यमुना बहुत प्रशन्न हुई कि उससे मिलने उनके भाई यमराज आने वाले हैं अपने भाई के भव्य स्वागत करने की अपने मन मे ठान यमुना ने यम के लिये तरह-तरह के पकवान मिठाइयां और खाद्य सामग्रि बनाकर यमुना ने उन्हें खिलाया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। यम अपनी बहन यमुना के आदर सत्कार से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उसे अमर होने का वर प्रदान कर यमराज ने यह घोषणा की, कि आज के बाद से कोई भी भाई जिसने अपनी बहन से राखी बंधवाई है उस भाई के समीप मृत्यु के रूप में मैं कभी उपस्थित नही होऊंगा।

उस दिन के बाद से मृत्यु लोक में राखी रक्षा बंधन के रूप ने मनाने के परम्परा की शुरूआत हुई और इस अवसर पर एक भाई अपनी बहनों से मिलने जरूर जाता हैं और बहनें अपने भाई को चिरायु बन कर उनकी सदैव रक्षा करने के लिए उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। इसलिए कहते हैं भाई-बहन के रिश्ते निर्मल अटूट बंधन अमर होता है।

राखी भाई बहन के मध्य का एक पवित्र बंधन और उत्सव है जिसे हमारे इतिहास, पुराणों और संस्कृति से जोड़ने वाली अच्छे विषय पर आधरित कहानी लोक कल्याण से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता है।

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