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    शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को भेजा ऑनलाइन मांग पत्र कहा: छात्रों व बेसिक शिक्षकों की समस्याओं का करें निराकरण

    ShagunBy ShagunAugust 25, 2020 Education No Comments8 Mins Read
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    शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जताया रोष कहा: 

    वैश्विक महामारी के दौर में यूं तो हर कोई प्रभावित है लेकिन इस कोरोना वायरस का डटकर मुकाबला कर रहे शिक्षक इस समय अपने कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक संघ एवं उप्र बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों ने अपनी आंतरिक समस्याओं के निराकरण के मुद्दे पर आज मुख्यमंत्री को ऑनलाइन एक पत्र भेजकर रोष जताया है और कहा कि हम शिक्षकों के मांग पत्र पर गौरकर यथा संभव मदद करने की कृपा करें।

    उन्होंने अपने पत्र में मुख्यमंत्री को लिखा : –

    सादर अवगत कराना है कि आपके नेतृत्व में सरकार की भावनाओं के अनुरूप प्रदेश के बेसिक शिक्षक प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को उत्कृष्ट बनाने हेतु निरन्तर प्रयासरत हैं। प्रदेश के शिक्षकों के अथक प्रयास से प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों के नामांकन में लाखों की वृद्धि हुई है। प्रदेश के परिषदीय विद्यालय आज चमक रहे हैं। उनमें अध्ययनरत छात्रों के शैक्षिक व मानसिक स्तर में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है।

    शिक्षकों ने शिक्षण के अतिरिक्त जनहित में अन्य गैर शैक्षणिक कार्य भी निरन्तर किए हैं। देश में कोरोना संक्रमण तथा केरल राज्य में आई आपदा के समय प्रदेश के बेसिक शिक्षकों ने आगे बढ़कर सबसे अधिक आर्थिक सहयोग किया है।

    परन्तु बड़े खेद के साथ अवगत कराना पड़ रहा है कि गत 3.5 वर्षों में शिक्षकों को निरन्तर अपमानित किया जा रहा है तथा शिक्षकों का अहित करने वाले आदेश निर्गत किए जा रहे हैं। विनम्र निवेदन के साथ आपके कार्यकाल में शिक्षकों के साथ हो रहे निम्नलिखित अन्याय की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहेंगे:-

    1. शिक्षकों को मिल रहे परिवार नियोजन प्रोत्साहन भत्ता को समाप्त कर दिया गया।
    2. शिक्षकों को मिलने वाले नगर प्रतिकर भत्ते को समाप्त कर दिया गया।
    3. 01 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 तक महंगाई भत्ते में होने वाली वृद्धि को रोक दिया गया है तथा इस अवधि के एरियर को समाप्त कर दिया गया है।
    4. एक ही परिसर में संचालित हजारों प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संविलियन करके प्रधानाध्यापक के पदों को समाप्त कर दिया गया है।
    5. प्रदेश के लगभग 1.69 लाख विद्यालयों में से ऐसे प्राथमिक विद्यालय जिसमें छात्र संख्या 150 से कम है तथा ऐसे उच्च प्राथमिक विद्यालय जिनमें छात्र संख्या 100 से कम है, में प्रधानाध्यापक के पद समाप्त कर दिए गये हैं। इस प्रकार के विद्यालयों की संख्या लगभग 01 लाख 30 हजार है। विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पदों की समाप्ति का कारण ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’’ बताया जा रहा है। जबकि ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’’ प्रदेश में वर्ष 2009 से प्रभावी है तथा आपकी पूर्ववर्ती दो सरकारों ने उक्त व्यवस्था को स्वीकार न करके प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक की तैनाती को आवश्यक मानकर प्रधानाध्यापकों की तैनाती को जारी रखा था।
    6. गत 3.5 वर्षों में प्रदेश में किसी भी शिक्षक को पदोन्नति नहीं दी गयी है। प्रदेश में लगभग 50 हजार से अधिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों से प्रधानाध्यापक के पद का कार्य लिया जा रहा है। जबकि किसी भी प्रभारी प्रधानाध्यापक को अतिरिक्त वेतन/भत्ता नही दिया जा रहा है।
    7. प्रति वर्ष उत्तर प्रदेश के 17 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार दिया जाता था जिसे घटा दिया गया है।
    8. किसी सुरक्षा उपकरण के बिना ही प्रदेश के शिक्षकों को कोविड-19 महामारी से प्रभावित हाॅट-स्पाॅट, कोरेटीन केन्द्र, राशन वितरण, आंगनवाड़ी का पुष्टाहार वितरण, रेलवे स्टेशनों पर प्रवासी मजदूरों की आगवानी, कोविड-19 महामारी के सम्बन्ध में घर-घर सर्वे, होम आइशोलेट संक्रमितों को कोविड-19 की दवा खिलाने, स्वास्थ्य विभाग के सूचना केन्द्रों में, विकास खण्ड कार्यालयों में लगातार ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’’ के विपरीत शिक्षकों को कोविड-19 के संक्रमण में ढकेला गया है जिससे तमाम शिक्षक संक्रमित हुए हैं। इस दौरान मृतक शिक्षकों को कोरोना वारियर्स न मानकर उन्हें 50 लाख की बीमित धनराशि से भी वंचित कर दिया गया है।
    9. भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार की गाइड लाइन के अनुसार 31 अगस्त 2020 तक समस्त विद्यालय एवं शैक्षणिक संस्थान बन्द हैं। प्रदेश के माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा के सभी संस्थान बन्द हैं परन्तु प्रदेश के बेसिक शिक्षकों को अकारण ही विद्यालयों में बैठाया गया है।
    10. प्रदेश के किसी भी विद्यालय में विभाग द्वारा कोई भी लैपटाप/टैबलेट/मोबाइल फोन तथा इन्टरनेट उपलब्ध नहीं कराया गया है उसके बावजूद भी प्रदेश के शिक्षकों को आनलाइन प्रशिक्षण लेने तथा सूचनाएं भेजने के लिए विवश किया जा रहा है। इस सम्बन्ध में शिक्षकों के वेतन पर रोक लगाकर उनका उत्पीड़न भी किया जा रहा है।
    11. प्रदेश के हजारों बेसिक शिक्षक अपने घर से सैकड़ों किमी दूर स्थित जनपदों में सेवा कर रहे हैं। उनके अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण की प्रक्रिया को अकारण रोका गया है जिससे शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है।
    12. प्रदेश के सभी विभागों में सेवाकाल में मृत कर्मचारी के आश्रित को नौकरी दी जा रही है परन्तु सेवारत मृतक बेसिक शिक्षकों के आश्रितों को शैक्षिक योग्यता के आधार पर नौकरी न देकर प्रशिक्षण व टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है जिससे उच्च शैक्षिक योग्यताधारी आश्रित भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनने को बाध्य हैं।
    13. विद्यालय के छात्रों को निःशुल्क यूनीफार्म वितरण हेतु विद्यालय प्रबन्ध समिति के खातों में पूर्ण धनराशि नही भेजी जा रही है। गत वर्षों की धनराशि अभी तक शेष है। अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को अपूर्ण धनराशि से ही यूनीफार्म वितरण के लिए बाध्य किया जा रहा है। यूनीफार्म वितरण की व्यवस्था हेतु स्पष्ट शासनादेश निर्गत है परन्तु जिलाधिकारियों व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा शासनादेश के विपरीत अपनी चहेती स्वयं सहायता समूहों से यूनीफार्म का वितरण कराया जा रहा है तथा शिक्षकों को भुगतान हेतु बाध्य किया जा रहा है।
    14. प्रदेश के बेसिक शिक्षकों के वेतन से सामूहिक बीमा की किस्त की धनराशि की कटौती की जा रही है परन्तु मृत्यु की दशा में उनको क्लेम की धनराशि नही दी जा रही है।
    15. प्रदेश के भ्रष्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के विरूद्ध उप्र शासन द्वारा कोई कार्यवाही नही की जा रही है, जैसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हैं परन्तु उत्तर प्रदेश शासन द्वारा उनके विरूद्ध कोई कार्यवाही नही की जा रही है।
    16. विद्यालय प्रबन्ध समितियों के खातों में प्रति वर्ष भेजे जाने वाली सूक्ष्म धनराशि की वर्ष में 3-3 ऑडिटर के द्वारा जाॅच कराई जा रही है इनके द्वारा शिक्षकों का शोषण किया जाता है तथा ऑडिटर धन उगाही करके चले आते हैं। आज तक किसी आडिटर द्वारा कोई रिपोर्ट नही दी गई है।
    17. 25 नवम्बर 2019 को माननीय मंत्री बेसिक शिक्षा की अध्यक्षता में शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण के सम्बन्ध में एक बैठक सम्पन्न हुई जिसमें अनेक बिन्दुओं पर मा0 मंत्री जी द्वारा सहमति प्रदान की गई परन्तु शासन/विभाग के द्वारा उक्त बिन्दुओं पर प्रस्ताव भेजना तक उचित नही समझा गया।
    18. उपरोेक्त से स्पष्ट है कि गत 3.5 वर्षों में बेसिक शिक्षा विभाग अथवा उप्र शासन द्वारा निरन्तर शिक्षकों को छति पहुॅचाने वाले आदेश निर्गत किए गये हैं। कारणवश शिक्षकों के मन में ये भावना पनप रही है कि वर्तमान सरकार शिक्षक विरोधी कार्य कर रही है। प्रदेश के शिक्षक आहत एवं आक्रोशित हैं।

    अतः आपसे सादर अनुरोध है कि उपरोक्त के सम्बन्ध में एवं शिक्षकों की संलग्न समस्याओं/मांगों का निराकरण करने हेतु आवश्यक आदेश निर्गत करने की कृपा करें।

    मांग-पत्र:-

    1. उत्तर प्रदेश में 01 अप्रैल 2005 से पूर्व लागू पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाये।
    2. प्रदेश के दूरदराज एवं ऐस्प्रेशनल जनपदों सहित सभी जनपदों में कार्यरत शिक्षकों के अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण से रोक हटायी जाये।
    3. उप्र बेसिक शिक्षा परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम 05 सहायक अध्यापक तथा 01 प्रधानाध्यापक एवं प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय में न्यूनतम 03 सहायक अध्यापक व 01 प्रधानाध्यापक की संख्या के आधार पर शीघ्र ही शिक्षकों की नियुक्ति की जाये।
    4. विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं यथा फर्नीचर, विद्युत, पंखे, चाहरदीवारी, शुद्ध पेयजल आदि की सुविधा उपलब्ध करायी जाये।
    5. उप्र बेसिक शिक्षा परिषदीय प्रत्येक विद्यालय में लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति की जाये।
    6. प्रदेश भर के लगभग 1.69 लाख बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों में से 01 लाख 27 हजार विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद समाप्त कर दिये गये हैं जिससे परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति के अवसर समाप्त हो गये हैं। अतः प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद बहाल किया जाये।
    7. प्रदेश के किसी भी विद्यालय में विभाग द्वारा कोई भी लैपटाप/टैबलेट/मोबाइल फोन तथा इन्टरनेट उपलब्ध नहीं कराया गया है उसके बावजूद भी प्रदेश के शिक्षकों को आनलाइन प्रशिक्षण लेने तथा सूचनाएं भेजने के लिए विवश किया जा रहा है। आनलाइन कार्य पर रोक लगायी जाये।
    8. एक ही परिसर में स्थित एक से अधिक प्राथमिक अथवा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संविलियन पर रोक लगायी जाये।
    9. प्रदेश के शिक्षकों की 17140 व 18150 न्यूनतम वेतन की विसंगति दूर की जाये।
    10. प्रदेश के शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भाॅति एसीपी व कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जाये।
    11. प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को कर्मचारियों की भाॅति उपार्जित अवकाश एवं प्रत्येक माह के द्वितीय शनिवार का अवकाश प्रदान किया जाये।
    12. माध्यमिक शिक्षकों की भाॅति बेसिक शिक्षकों को भी 100 प्रतिशत प्रोन्नत वेतनमान अनुमन्य कराया जाये।
    13. प्रत्येक विद्यालय पर शिक्षकों को उनके वेतनक्रम के आधार पर आवासीय सुविधा उपलब्ध करायी जाये।
    14. उप्र बेसिक शिक्षा परिषदीय विद्यालयों में बेसिक शिक्षा विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा अन्य किसी विभाग के कर्मचारी या अधिकारी के निरीक्षण पर रोक लगायी जाये।
    15. प्रदेश भर के शिक्षकों को मिलने वाले परिवार नियोजन प्रोत्साहन भत्ता, नगर प्रतिकर भत्ता एवं महंगाई भत्ता बहाल किया जाये।
    16. परिषदीय शिक्षकों के सामूहिक बीमा की बीमित धनराशि रू0 10 लाख करते हुए इसे बहाल किया जाये।
    17. सेवाकाल में मृत शिक्षकों के आश्रितों को पूर्व की भाॅति शिक्षक के पद पर नियुक्ति दी जाये।

    Shagun

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