कंगना Vs शिवसेना, कुछ तो देश का ख्याल करो

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इलेट्रॉनिक्स मीडिया पर इस दिनों चौबीस घंटे लाइव में जो सबसे बड़ा मुद्दा सनसनी बनकर छाया है वह कंगना वर्सेज उद्धव ठाकरे सरकार का है। टीवी पर इस मुद्दे ने चीन के मुद्दे को भी पीछे छोड़ दिया है। दरअसल इस मामले में सच का साथ मीडिया ही नहीं देश कि जनता भी दे रही है उसने देखा कि मुंबई में किस कदर कंगना का ऑफिस और घर तोड़ा गया और किस कदर शिवसेना का आतंक लोगों की आवाज़ दबाने पर आमदा है। फिलहाल इस मामले पर न तो कंगना चुप हैं और न ही उद्धव सरकार, अब देखना यह है कि किस का घमंड टूटता है।

फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच तनातनी जारी है जो सोशल मीडिया पर युद्ध के रूप में छाया हुआ है। दोनों ही पक्षों की बातों ने इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है इस मामले कंगना के साथ बीजेपी कड़ी दिखाई देती है। फिलहाल दोनों के बीच यह तनातनी करीब तीन महीने से सुशांत सिंह राजपूत मामले और बॉलीवुड के नेपोटिस्म के इश्शु को चल रही है और अभी भी तकरार बढ़ती जा रही है।

मालूम हो कि जब अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का मामला सामने आया था तब कंगना ने आरोप लगाया था कि मुंबई पुलिस ठीक से जांच नहीं कर रही है। उसके बाद मुंबई की कानून-व्यवस्था को लेकर कहा कि वह पाक अधिकृत कश्मीर बन गया है। फिर नशीले पदार्थों के सेवन को लेकर उन्होंने कुछ अभिनेताओं का नाम भी लिया। उधर मुंबई नगरपालिका यानी बीएमसी ने कंगना के दफ्तर पर गैरकानूनी ढंग से अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ की कार्रवाई की जिसे बदले कि राजनीति का कदम माना जा रहा है।

ये घटनाक्रम अब राजनीतिक रंग ले चुका है। कई लोगों को कंगना के बयानों के पीछे केंद्र की शह दिखाई देती है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि वह राजनीति में उतरना चाहती हैं। इस तरह दोनों पक्षों के ऊपर अब लोग तमाम आरोप लगा रहे हैं। सच तो यह है कि इस मामले में संयम से काम लिया जाता तो ज्यादा अच्छा होता। आखिर मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और वहां होने वाले घटनाक्रम को पूरा देश गौर से देखता है। इस समय महाराष्ट्र कोरोना संकट से जूझ रहा है तो काम उससे निपटने के उद्देश्य को लेकर होना चाहिए। न कि अहम् को ऊपर रखकर देखना चाहिए और यह राजनीति की कोई परिभाषा नहीं है।

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