दर्शनार्थियों की लगी लम्बी कतार
लखनऊ,24 अगस्त 2019: विज्ञानी युग में हमने लगभग चांद को भी जीत लिया है, लेकिन हमारी परंपराएं और संस्कृति हमें भारतीय पर्वों को हर्षोल्लास के संग मनाने एवं सत्मार्गों पर चलने की प्रेरणा देती है। श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें वर्तमान समय में भी उतनी प्रभावित करती हैं जितनी पहले करती थीं। छह दिवसीय प्रतिदिन बदलने वाली डिजिटल मूविंग झांकियों में शनिवार को कान्हा के जन्म की लीला प्रदर्शित की गई।
मित्तल परिवार की तरफ से न्यू गणेशगंज अमीनाबाद रोड पर शनिवार से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव एवं डिजिटल मूविंग झांकियों की शुरूआत हुई। न्यू गणेशगंज मार्ग को गोकुल बनाने के लिए थ्रीडी लाइटों एवं फूलों से सजाया गया।

उन्होंने कहा कि जब गोकुल में कान्हा का जन्म उत्सव बड़े धूमधाम मनाया जा रहा था नंदबाबा और यशोदा डिजिटल पालने में पालनहार को झुला रही थी गोकुलवासी मदमस्त होकर जन्मोत्सव में झूमकर मना रहे थे तभी वहां पर आकाश से ब्रह्मा, विष्णु, महेश एवं समस्त देवतागण पुष्पावर्षा कर, आशीर्वाद दे रहे थे वे भी कान्हा के जन्मोत्सव आनंद उठा रहे थे।

संयोजक अनुपम मित्तल ने बताया कि श्री राधाकृष्ण का झूला विहार, क्षीर सागर में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु व लक्ष्मी संग विश्राम करते हुए, अगस्त्य मुनि के मुंह से जल अवतरण, 20 फुट ऊंचा शिवलिंग, राम दरबार, हनुमानजी के हदय से सियाराम के दर्शन की चलती फिरती प्रतिमाएं हर किसी को आकर्षित कर रही है। इसके साथ ही धारा 370 हटाये जाने की खुशी में कश्मीर की पहाड़ियों के बीच लहराते तिरंगा और आग उगलते ड्रेगन के संग सेल्फी लेने का भी मौका श्रद्धालुओं को दिया गया।
बंदर के संग करतब दिखाता मदारी भी बच्चों को रोमांचित कर रहा था। झांकी स्थलों को कलकतिया लाइट के पैनल और रंगबिरंगी झालरों एवं चार धाम द्वार को सजाया गया है। चारधाम द्वार में प्रमुख तीर्थ मंदिरों की छवि सुशोभित हो रही है।
डिजिटल मूविंग झांकियों को बनाने का काम लखनऊ प्रसिद्ध मूर्तिकार विजय और झांकियों व स्थलांे को घनश्याम लाइट एण्ड साउंड के कलकतियां लाइट पैनल व झालरों द्वारा सुशोभित किया गया। 25 अगस्त रविवार को माखन चोरी की झांकी प्रदर्शित की जायेगी।







