ताज पर मालिकाना हक किसका, सुप्रीम कोर्ट 12 हफ्ते बाद करेगा फैसला

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नई दिल्ली, 09 अगस्त 2018: आखिर ताज पर मालिकाना हक़ किसका है, इस बात को लेकर इंतजार बढ़ गया हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 12 हफ्ते के लिए टाल दी है। इससे पहले सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हमारे पास कोई सबूत नहीं कि ताज़महल को हमारे नाम किया गया था, लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर ये कहा जा सकता है कि ये वक़्फ़ की संपत्ति है।

वक़्फ़ बोर्ड ने कहा कि कोई भी इंसान इसके मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता। ये सर्व शक्तिमान की संपत्ति है। हम मालिकाना हक नही मांग रहे है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ताज़महल को वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति घोषित करना ही मुख्य समस्या है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर आप कोई संपति आप वक़्फ़ की घोषित करते है तो उसकी समीक्षा की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपने एक बार प्रॉपर्टी को रजिस्टर कर दिया है लेकिन आप उस पर दावा नहीं कर रहे है ये प्रॉपर्टी को अपने पास रखने का कोई आधार नही हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई को कहा कि अगली सुनवाई पर आप कोर्ट को बताए कि जो सुविधाएं अभी आप वक़्फ़ को दे रहे है उसका देना जारी रखना है या नही? वहीं एएसआई ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि अगर ताज़महल को वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति मानते है तो कल को लाल किला और फतेहपुर सिकरी पर भी अपना दावा करने शुरु कर सकते है।

सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि देश में ये कौन विश्वास करेगा कि ताज़महल वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति है। इस तरह के मामलों से सुप्रीम कोर्ट का समय जाया नहीं करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी एएसआई की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें एएसआई ने 2005 के उत्तरप्रदेश सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के फ़ैसले को चुनौती दी है,जिसमें बोर्ड ने ताजमहल को वक़्फ़ बोर्ड के संपति घोषित कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि मुगलकाल का अंत होने के साथ ही ताजमहल सहित अन्य ऐतिहासिक इमारतें अंग्रेजों को हस्तांतरित हो गई थी। आजादी के बाद से यह स्मारक सरकार के पास है और एएसआई इसकी देखभाल कर रहा है।

इसके बाद बोर्ड की ओर से कहा गया कि बोर्ड के पक्ष में शाहजहां ने ही ताज महल का वक्फनामा तैयार करवाया था। इस पर बेंच ने तुरंत कहा कि आप हमें शाहजहां के दस्तखत वाले दस्तावेज दिखा दें। बोर्ड के आग्रह पर कोर्ट ने एक हफ्ते की मोहलत दे दी। दरअसल, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था। एएसआई ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इसपर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था।

मोहम्मद इरफान बेदार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल कर ताजमहल को उत्तर प्रदेश सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की सम्पति घोषित करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट में कहा कि वो वक़्फ़ बोर्ड जाए। मोहम्मद इरफान बेदार ने 1998 में वक़्फ़ बोर्ड का के समक्ष याचिका दाखिल कर ताज़महल को बोर्ड की संपत्ति घोषित करने की मांग की। बोर्ड ने एएसआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और एएसआई ने अपने जवाब में इसका विरोध किया और कहा कि ताजमहल उनकी संपत्ति है। लेकिन बोर्ड ने एएसआई की दलीलों को दरकिनार करते हुए ताज़महल को बोर्ड की सम्पति घोषित कर दी थी।

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