सोशल मीडिया पर शेयर की मार्मिक कहानी
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2018: किसी आतंकवादी की मौत पर भारतीय सेना का कोई अधिकारी दुःख जताए, और उस निजी नुकसान की संज्ञा दे,ऐसा अकल्पनीय है, लेकिन दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहे जम्मू- कश्मीर में, जब नूर खान उर्फ गुलाम हसन मलिक की मौत हुई। इसके बाद भारतीय सेना के आधिकारिक फेसबुक पेज पर ब्रिगेडियर पीएस गोथरा की ओर से लिखी श्रद्धांजलि को पोस्ट किया गया है,जिसका शीर्षक है- नूर खान नहीं रहे, और यह मेरे लिए निजी नुकसान है।
परिवार की चौथी पीढ़ी के रूप में भारतीय सेना की सेवा कर रहे ब्रिगेडियर पीएस गोथरा ने मार्मिक शब्दों में बताया है कि 1989 में आतंकवादी बन जाने के दो साल बाद नूर खान और उसके साथियों को सुरक्षाबलों ने घेर लिया था, लेकिन वह बचकर भागने की कोशिश में पहली मंज़िल से कूद गया, और उसका पांव टूट गया। जिसके बाद उस उरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के कुछ कर्मचारियों ने सड़क पर पड़े देखा, और पनाह देकर उसका इलाज करवाया।
ब्रिगेडियर लिखते हैं, इसके बाद में फरवरी, 1993 में उरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में चीफ इंजीनियर की हैसियत से कार्यरत उनके पिता मेजर जीएस गोथरा (सेवानिवृत्त) को आतंकवादियों के एक अन्य गुट ने किडनैप कर लिया। इसके बाद उरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट कर्मचारियों ने नूर खान से मदद मांगी, जिसने अपने नेटवर्क के ज़रिये न सिर्फ उन्हें ढूंढ निकाला, बल्कि खुद वहां जाकर,अपनी जान खतरे में डालकर उन आतंकवादियों को समझाया, और आधी रात होने तक उनके पिता को सही-सलामत वापस ले आया।







