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भारतीय सेना के पास कम गोला-बारूद की सबसे बड़ी वजह का हुआ खुलासा

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गत दिनों आई कैग की रिपोर्ट ने पूरेदेश में खलबली मचा दी। खासतौर पर ऐसे समय जब चीन और पाकिस्तान से संबंध काफी खराब चल रहे हैं ऐसे में कैग की रिपोर्ट ने करोडों भारतवासियों का मनोबल घटाया है।

कैग ने साल 2015 में कहा था कि भारतीय सेना के पास 20 दिन से ज्यादा लंबी खिंची जंग लड़ने लायक गोला-बारूद नहीं है। वहीं बीती शुक्रावर को संसद में रखी अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा कि अगर जंग छिड़ती है तो भारतीय सेना के पास इतने गाला-बारूद भी नहीं कि वह 10 दिन तक जंग लड़ सके। पाकिस्तान और चीन के साथ कई मोर्चों पर जारी तनाव के बीच आई यह रिपोर्ट भारतीय सेना की स्थिति को कमजोर करता है।

इस रिपोर्ट में कैग ने कहा है कि वर्ष 2015 में केंद्रीय लेखापरिक्षक की तरफ से इस बारे में चिंता जताए जाने और रक्षा तैयारियों पर उच्च स्तरीय रिपोर्ट बनाए जाने के बावजूद आयुद्ध कारखानों के काम करने के तरीके में कोई सुधार नहीं देखा गया। कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि गोलाबारूद की निर्माण और सप्लाई क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों ही मामलों में खराब रहा है।

भारतीय सेना दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना है, जिसमें 13 लाख से ज्यादा सैनिक हैं। सैनिकों की इतनी बड़ी संख्या की वजह से हथियारों और गोलाबारूद का स्टॉक बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। वहीं सैन्य प्रतिष्ठानों में बड़ी मात्रा में गोला-बारूद के रखरखाव की भी समस्या होती है। आमतौर पर गोलियों और गोलों को अच्छी तरह से रखा जाए, तो वह दशकों तक सही रहते हैं। लेकिन बड़ी मात्रा में गोला-बारूद स्टोर करके रखने से इतनी गुणवत्ता खराब होने लगती है और इस्तेमाल के वक्त समस्या होती है।

वहीं अगर रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो सरकारों की कार्यप्रणाली हमेशा से ही इस बारे में काफी ढुलमुल रही है। सरकारों ने हमेशा ही रक्षा सौदों के करार में तो जल्‍दबाजी दिखाई है पर इन सौदों को मूर्त रूप नहीं दिया जा सका है। साथ भारत आज भी पुरानी रितियों का पालन करता आ रहा है यही कारण है कि हमारी सेना पीछे हो रही है। ‍