चेतन चौहान के गुज़र जाने में मेरे बचपन का एक हीरो चला गया। बेहतरीन खिलाडी होने के साथ साथ चेतन जी बेहद सादादिल, शरीफ और शालीन इंसान थे । बहुत बड़प्पन था उनमें और इतने बड़े खिलाडी होने के बावजूद किसी तरह का कोई रुआब या नखरा बिलकुल नहीं था। बहुत सी यादें हैं उनकी। वीडिओकॉन टावर में आज तक के न्यूज़ रूम में वो इतनी सहजता और आत्मीयता से टहलते हुए आकर मिलते थे, पास ही कुर्सी खींच कर बैठ जाते थे, गुनगुनाते थे, गप्पें लड़ाते थे कि यकीन नहीं होता था कि आप देश के सबसे लोकप्रिय खेल की एक बहुत नामवर हस्ती से मुखातिब हैं।
चेतन चौहान, मदन लाल, यशपाल शर्मा क्रिकेट के विशेषज्ञों से ज़्यादा आज तक की एडिटोरियल टीम का हिस्सा लगते थे। बालसुलभ उत्सुकता के साथ हमारे इर्द गिर्द घूमते हुए हमारा काम देखते और समझने की कोशिश करते । जब मैं यह लिख रहा हूँ तो न्यूज़ रूम में घूमते हुए चेतन जी और उनके अलावा यशपाल शर्मा की छवि भी आँखों के आगे आ रही है जो हमारे फीड रूम में फुटेज इंजेस्ट कराने के लिए टेप भी लेकर चले जाते थे। इतने ज़मीनी लोग थे।
मेरी पीढ़ी के तमाम लोगो ने जब क्रिकेट में आँख खोली थी तब तक सुनील गावस्कर और चेतन चौहान भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर एक मज़बूत , ठोस जोड़ी बन चुके थे। चेतन चौहान के क्रिकेट करियर के आंकड़े उनकी दमदार बल्लेबाज़ी के साथ इन्साफ करते नहीं लगेंगे क्योंकि 34 शतक बनाने वाले गावस्कर के सबसे भरोसेमंद पार्टनर चेतन जी एक भी टेस्ट सेंचुरी नहीं बना पाए। लेकिन जिस तरह से वो कई पारियों में गावस्कर के साथ एक छोर पर अंगद की तरह पाँव जमाकर खड़े रहे ताकि उनकी लय न टूटे और गावस्कर को उनका स्वाभाविक गेम खेलने में मदद मिलती रहे, वह हमारे क्रिकेट इतिहास की एक शानदार विरासत है।
खिलाडी तो बहुत आएंगे, बहुत अच्छे भी होंगे, तमाम रिकॉर्ड बनाएंगे लेकिन चेतन जी जैसे प्यारे इंसान और इतने घुलमिल कर बोलने बतियाने वाले अब शायद ही मिलें। कोरोना ने उन्हें अपना शिकार बना लिया। एक बेहद ज़िंदादिल इंसान और जुझारू खिलाडी का यूँ चुपचाप बीमारी से पस्त होकर चले जाना मन को बहुत उदास कर गया है। – अमिताभ श्रीवास्तव







