भारतीय राजनीति का बदलता केंद्र

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सूरज सिंह ‘ माइकल ‘

हाल ही में भारत में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। सियासी हुक्मरान अपने लक्ष्यों को अंजाम देने में लग गए हैं। विश्व के कई देशों फ्रांस, अमेरिका , इंग्लैड , नेपाल आदि में अभी हाल ही में चुनाव हुए हैं, जिनको अगर बारीकी से देखें तो हमें ज्ञात होगा कि हर जगह मामला किसी न किसी तत्त्व पर आधारित रहा है। भारत में राम नाथ कोविन्द को एनडीए ने अपना उम्मीदवार घोषित किया है । आज के इस राजनीतिक आधुनिकीकरण के दौर में भी जातिवाद , सम्प्रदायवाद , क्षेत्रवाद , भाषावाद हम सभी पर हावी है ।

सन् 1951 में सुकुमार सेन के प्रथम आम चुनाव करवाये जोकि काफी सफल तरीके से हुआ । लोगों ने उस वक़्त जातिवाद , धर्मवाद से उठकर राष्ट्र को वोट किया और अगर आज देखे तो कहीं ईवीएम पर सवाल उठ रहे हैं , जातिगत दलों का लगातार निर्माण हो रहा है । हर नेता को अपनी फिक्र है देश किसी को नहीं सूझ रहा । कोई योग पर सवाल उठा रहा है कोई न्यायालय पर । ये बताने का उद्देश्य मात्र इतना है कि हमने लीक छोड़ दी है । जो दिशा हमे मिली थी उससे भटक गए हैं । जो केंद्र होना चाहिए था वो नहीं रह गया है । जब भारत आज़ाद हुआ था तब उसके सामने बहुत विकट समस्याएं मुँह फैलाये खड़ी थीं । देश में अनाज नहीं था , सूखा पड़ रहा था , भाषायी राज्यों की मांग हो रही थी , विभाजन का दर्द टीस पैदा कर रहा था, लेकिन आज हम इन समस्याओं से मुक्त है । हमारे कुछ लक्ष्य थे जैसे जब हमने आरक्षण दिया समाज के पिछड़े वर्गों को जो समाज की मुख्यधारा से अलग हो गए थे कि 10 साल में हम उनका विकास कर लेंगे, इस आरक्षण के माध्यम से लेकिन जो लाभ जिसको मिलना चाहिए था वो आज भी नही मिल सका ।

भारत के निवासी में यह बात घर कर गयी है कि सरकार अगर कुछ कर रही तो इसके पीछे पार्टी की कुछ राजनीति है । अब कोविंद की उम्मीदवारी को ही ले लो । लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि एनडीए 2019 में वोट बैंक मजबूत कर रही है। ये हो भी सकता है लेकिन हमें भी कुछ सकारात्मक सोचना चाहिए । जब विश्व के अनेक देश अपने को महाशक्ति बनाने में लगे है तो हमारे देश में जातिगत झगड़े,  आरक्षण मांग , दलगत राजनीति , जातीय मतों इन पर चर्चा हो रही है।

हमें आगे आकर यह व्यवस्था बदलनी होगी । जिस देश की सूरत कुछ और होनी चाहिए थी और हो कुछ और गयी है उसे सही करना होगा । हम सब मिलकर ही इनसे निजात पा सकेंगे ।  हमें ये खुद से प्रण लेना होगा कि हम केवल राष्ट्र हित में वोट करेंगे । हम उस सरकार को वोट नही करेंगे जो भारत में शिक्षा , शोध् , स्वास्थ्य , भोजन , कृषि , रोजगार , सुरक्षा  न दे सके , इसके लिए हमे अब खुद पर भरोसा करना होगा ।

 

 

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