अलीबाग रायगढ़ जि़ले के कोंकण क्षेत्र में स्थित, महाराष्ट्र के पश्चिमी तट पर बसा एक छोटा सा शहर है। यह मुम्बई की प्रसिद्ध मैट्रो के पास है। अलीबाग का अर्थ है, अली का बाग। मान्यता के अनुसार अली ने बहुत सारे आम एवं नारियल के पेड़ वहां लगाए थे। कहा जाता है कि 17वीं शताब्दी में बनी इस जगह की उन्नति छत्रपति शिवाजी महाराज ने की थी। सन 1852 में इसे ‘तालुका’ से घोषित किया गया। इससे पहले अलीबाग, बेनी इज़राईली यहूदियों का निवास स्थान भी रह चुका है।
वैसे अलीबाग को लोग महाराष्ट्र का गोवा भी कहते हैं कहते है अलीबाग का मौसम हमेशा सुहावना रहता है जहाँ तापमान न बहुत ज्यादा होता है और न बहुत कम। भारत के दूसरे क्षेत्रों की तरह यहाँ ज्यादा गर्मी नहीं होती। मानसून में सुखद देता है। वैसे तो यहाँ आने के लिए सर्दी का सबसे अच्छा समय है क्योंकि उस समय का ठंडा व सुहावना मौसम आपकी यात्रा को न केवल शानदार बल्कि यादगार भी बना देगा। क्रिसमस तथा नए साल पर यहाँ आना अच्छा रहेगा। लेकीन फिलहाल अब लोग हर मौसम में यहाँ पहुंच रहे है क्योकि अब सभी अपने मुफीद समय के हिसाब से घूमते हैं।
ऐतिहासिक जगह है अलीबाग: कहते है कि कोलाबा का किला इस बात का साक्षी है कि मराठा साम्राज्य ने भारत के इस भाग पर शासन किया था। यह किला जो इस समय अब जीर्णावस्था में पड़ा हुआ है, जिसे अलीबाग के तट से साफ देख सकते है। इसकी सुंदरता बस देखते ही बनती है आप इस किले को कभी भी देखने आ सकते हैं। यह वाकई बहुत खूबसूरत और रोमांटिक जगह है।
यहाँ पर खंडेरी का किला एक दूसरा किला भी है, जो लगभग 3 शताब्दी पुराना है। पेशवा वंश में बना यह किला अंग्रेज़ी शासनकाल में अंग्रेज़ों को सौंप दिया गया। बताया जाता है कि कनकेश्वर मंदिर एवं सोमेश्वर मंदिर ऐसे दो प्रतिष्ठित मंदिर हैं जो यहाँ आने वाले तीर्थयात्रियों के मन में श्रद्धा भर देते हैं। ये दोनों ही शानदार मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं। यह छोटा सा शहर आज एक व्यापारिक केंद्र है जबकि यहाँ के स्थानीय लोग खेतों व झोपड़ियों में रहते हैं।

‘महाराष्ट्र का गोवा’ तीन तरफ से पानी से घिरे होने के कारण अलीबाग में बहुत सारे सुंदर तट हैं। सभी तटों के किनारे नारियल एवं सुपारी के पेड़ होने से यह संपूर्ण इलाका किसी उष्णकटिबंधीय समुद्र तट जैसा लगता है। यहाँ का मौसम बहुत सुहावना होता है एवं यहाँ के तट बिल्कुल अनछुए से लगते हैं। यहाँ की हवा प्रदूषणरहित, शुद्ध एवं ताज़ी है और तटों का दृष्य किसी स्वर्ग जैसा लगता है।
जहाँ पर्यटकों को अलीबाग के तट पर काली रेत आश्चर्यचकित कर देगी, वहीं पर किहिम तट और नागाओ तट पर चाँदी सी सफेद रेत बिखरी हुई है। पर्यटकों को यहाँ अक्षी तट भी अवश्य देखना चाहिए। अलीबाग के इन तटों पर अनेक विज्ञापनों, नाटकों व फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। अगर आप खुशकिस्मत है तो शायद आप यहाँ पर किसी बालीवुड सितारे से भी मिल सकते हैं जिनका फार्महाउस या बंगला अलीबाग में है।
चूंकि अलीबाग एक तटीय शहर है, इसलिए यहाँ के स्थानीय व्यंजन मछली से बने होते हैं। पोम्फरेट तथा सुरमयी पकवानों के अलावा सोल कढ़ी भी यहाँ का पसंदीदा व्यंजन है यहाँ पर पानी में खेल सकते हैं, या फिर शाम अस्त होते सूरज को मानो समुद्र में डूब रहा हो ऐसे दृश्य को कुछ ही दूर से देख सकते हैं। इसके अलावा आप अलीबाग की लोकल मार्केट में शॉपिंग के साथ यहां के स्ट्रीट फूड बॉम्बी फ्राई, वड़ा पाव, भेलपुरी, कीमा पाव का मजा ले सकते हैं।
कैसे पहुंचे: वैसे तो अलीबाग, परिवहन के सभी साधनों जैसे- रेल, वायु और सड़क से मार्गों से जुड़े हैं। इसके अलावा मुम्बई का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और पेन का रेलवे स्टेशन इसके सबसे पास है। महाराष्ट्र राज्य के अंदर तथा बाहर के बड़े शहरों से यहाँ आने के लिए राज्य परिवहन और निजी बसें एक अच्छा विकल्प है। इसके साथ ही यहाँ के करीबियों के लिए नौका भी एक अच्छा विकल्प हो सकता हैं।







