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    Home»Indian tourism spots

    देहरादून: पल पल बदले मौसम

    By May 13, 2018 Indian tourism spots No Comments6 Mins Read
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    Post Views: 617
    यदि आप कही आउटिंग का प्लान बना रहे है तो इस समय देहरादून सबसे सजेस्टिव है यहां आपको प्राकृतिक खूबसूरती के साथ पहाड़ और झरने और हरियाली देखने को मिलेगी जिसको देखते ही आपका मन उत्साह और रोमांच से भर जायेगा। इसके अलावा आप यहाँ योग और एडवेंचरस गेम्स से भी अपने मन को रोमांचित कर सकते हैं। यदि इसके अलावा आसपास कोई अन्य जगह जाना चाहते हैं तो यहां से हरिद्वार और ऋषिकेश महज 2 घंटे की दूरी पर स्थित हैं। जहां आप आसानी से जा सकते हैं। इसके साथ ही यहां ऐसे कई खूबसूरत स्थान हैं जो आपका मन मोह लेंगे। तो आइए जानते हैं ऐसे विशेष स्थानों के बारे में-

    साइबेरियन पक्षियों के लिए प्रसिद्ध स्थान:

    उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश को आपस में जोड़ती आसन झील का एक अलग तरह का ही इतिहास है। देहरादून से 28 किलो मीटर की दूरी पर स्थित आसन बैराज साइबेरियन प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध स्थान है। इन विदेशी मेहमानों को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में पर्यटक आसन बैराज आते है।  यहां पर दिखने वाले पक्षी आईयूसीएन की रेड डाटा बुक (प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ) द्वारा लुप्त प्राय प्रजातियों के रूप में सूचीबद्ध किया गया हैं।
    आप यहां मल्लाड्र्स, रेड क्रेस्टेड पोचाड्र्स, कूट्स, कोर्मोरंट्स, एग्रेट्स, वाग्तैल्स, पोंड हेरोंस, पलस फिशिंग ईगल्स, मार्श हर्रिएर्स, ग्रेटर स्पॉटेड ईगल्स, ऑसप्रे और स्टेपी ईगल्स जैसे पक्षीयों को देख सकते हैं। सर्दियों के समय विभिन्न प्रवासी पक्षियों की आमद अधिक रहती है। अक्टूबर से नवम्बर और फरवरी से मार्च तक के में पक्षियों को देखने का सबसे अच्छा होता है।

    बुद्ध मंदिर: टूरिस्ट का खास आकर्षण:

    राजधानी दून की आईएसबीटी (अन्तर्राजिय प्रादेशिक बस सेवा ) से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर एक तिब्बती समुदाय धार्मिक स्थल है। जिसे बुद्धा मॉनेस्ट्री या बुद्धा गॉर्डन के नाम से जाना जाता है। तिब्बती समुदाय के लोगो द्वारा मंदिर की स्थापना वर्ष 1965 ई में की गई। मंदिर का भव्य व अदभुत दृश्य टूरिस्ट को अपनी ओर आकर्षित करता है। जानकारों के मतानुसार मंदिर को सुनहरा रंग देने के लिए पचास कलाकारों को तीन वर्ष का लंबा समय लगा।

    FRI (वन्य अनुशंधान संसथान): वनस्पति विज्ञान के तत्वों का संग्रह:

    देहरादून के क्लॉक टॉवर से केवल सात किलोमीटर की दूरी पर FRI (वन अनुसन्धान संस्थान देहरादून) राज्य का एक मात्र सबसे पुराना संसथान है। एफआरआई के इतिहास के विषय में बात करें तो अंग्रेजी शाशन काल के दौरान वर्ष 1878 में ब्रिटिश इंपीरियल वन स्कूल स्थापित किया गया था। फिर 1906 में ब्रिटिश इंपीरियल वानिकी सेवा के तहत इंपीरियल वन अनुसंधान संस्थान (आईएफएस) के रूप में पुनरुस्थापना  हुयी। 450 हेक्टेअर जैसे बृहद क्षेत्र में फैला एफ.आर.आई में कुल सात म्यूजियम हैं। जिसमें वनस्पति विज्ञान के तत्वों को संग्रह किया गया है। एफ.आर.आई संसथान का मुंबई में स्थित भारतीय फिल्म उद्योग से सम्बन्ध होने के कारण कई बड़े फिल्म निर्माता एफआरआई कैंपस में फिल्म की शूटिंग भी कर चुके हैं। जैसे धर्मा प्रोडक्शन के तहत “स्टूडेंट ऑफ द ईयर”, तिग्मांशू धूलिया की “पान सिंह तोमर” जैसी बड़ी फिल्में एफआरआई में शूट हो चुकी हैं।

    गुच्चुपानी या रावर्स केव:

    दून सिटी के कैंट एरिया से कुछ ही दूरी पर पहाड़ों की मध्य बसा हुआ एक प्राकृतिक स्थान है। जहां गर्मियों के मौसम में सैंकड़ों की संख्या सैलानी पिकनिक मनाने आते हैं। पहाड़ों के बीच बसे इस गुफा के बीचो-बीच से होता हुआ झरना गिरता है इसका पानी पर्यटकों को अपनी ओर बरवस ही आकर्षित करता है।

    मालसी डीयर पार्क

    जब आप देहरादून मसूरी मार्ग पर निकलें तो यहाँ समीप में स्थित मालसी डीयर पार्क जरूर देखें है। मालसी डीयर पार्क को मिनी जू के नाम से भी पुकारा जाता है। पार्क में मौजूद वन्य प्राणी जैसे हिरण, चीतल, मोर तेंदूआ एवं अन्य कई तरह के वन्य प्राणियों की प्रजातियां मौजूद हैं जो पर्यटकों को अपनी ओर बहुत आकर्षित करती है। इस पार्क में पिकनिक मनाने के लिए भी काफी अच्छा माहौल के साथ ही साथ बड़ी जगह भी है। जिसमें आप अपने संपूर्ण परिवार के साथ छुट्टियां विताने का आनंद ले सकते है।

    सहस्त्रधारा में नहाने से चर्म रोग होते हैं दूर:

    प्रकृति के मनोरम गोद में बसा हुआ यह सहस्त्रधारा अपनी अलग तरह की पहचान रखता है। कई पर्यटक यहां पिकनिक या जश्न मानाने तो कोई प्रकृति के नजारों का आनंद लेने आया करते है। सहस्त्रधारा में एक तरफ छोटे-छोटे झरने, पहाड़ के उपर मौजूद मंदिर तो दूसरी ओर बुद्धा मॉनेस्ट्री पर्यटकों को अपनी ओर खूब आकर्षित करती है। कहा जाता हैं कि सहस्त्रधारा वैसे तो सल्फर वाटर के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार सल्फर के पानी से नहाने पर चर्म से सम्बंधित रोग एवं अनेको तरह के चर्म रोग दूर हो जाते है।

    टपकेश्वर मंदिर: शिव और पार्वती का शुभ विवाह होता है आयोजित

    टपकेश्वर महादेव मंदिर एक लोकप्रिय गुफा के अंदर बना भगवान शिव का मंदिर है।  यह देहरादून शहर के बस स्टैंड से 5.5 किमी दूर तमसा नदी के तट पर स्थित है। गुफा में एक शिवलिंग है और गुफा की छत से लगातार मूर्ति के शिर्ष पर पानी टपकता रहता है। मंदिर के चारों तरफ सल्फर के पानी का झरना बहता है। हिंदू त्यौहार शिवरात्रि के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु लोग इस मंदिर में आते हैं। यहाँ पर इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का शुभ विवाह समारोह भी आयोजित किया जाता है।

    राजाजी नेशनल पार्क:

    राजाजी नेशनल पार्क देहरादून से 23 किमी की दूरी पर स्थित है। यह पार्क सन 1966 में स्थापित किया गया था। राजाजी पार्क 830 वर्ग किमी के क्षेत्रफल में फैले होने के साथ ही साथ अपने शानदार पार्क लोगों को बहुत प्रभावित करता है। राजाजी, मोतीचूर और चिल्ला रेंज से घिरा हुआ है, जिसके कारण यहां की प्राकृतिक छटा बरबस ही लोगों को अपनी ओर आक्तशित करती है। वर्ष1983 में इन तीनों ही पार्कों को मिला कर इसका नाम राजाजी नेशनल पार्क कर दिया गया। यह पार्क हाथीयों की आबादी के लिए जाना जाता है।

    माल देवता

    प्रकृति के गोद में बसा माल देवता दृश्य देखते ही बनता है। यहां की प्राकृतिक सौंदर्य की छठायें पर्यटकों का मन मोह लेती है। ऐसा कहा जाता है कि आप देहरादून आए और माल देवता का दर्शन नहीं किया तो आपने बहुत कुछ देखने से वंचित रह गए। माल देवता में पहाड़ों से गिरने वाले छोटे-छोटे झरने मात्र पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र ही नहीं है बल्कि उन्हें वहां वक्त गुजारने पर मजबूर कर देती है।

    गुरु राम राय दरबार साहिब

    देहरादून शहर के मध्य में स्थित दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज महान स्मारक का ऐतिहासिक होने के साथ ही साथ एक धार्मिक महत्व भी रखता है। वास्तव में देहरादून शहर का नाम भी इसी गुरु राम राय जी के कारण पड़ा था। श्री गुरु राम राय जी, सातवीं सिख गुरू हर राय जी के ज्येष्ठ पुत्र ने दून (घाटी) में अपना डेरा डाला था। सन1676 में डेरा एवं दून दोनों को मिलाकर आगे चल कर इसका नाम देहरादून पड गया। -जी के चक्रवर्ती

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