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    Home»Indian tourism spots

    खूबसूरत तीर्थ स्थल ‘रामेश्वरम’

    By May 5, 2018Updated:May 5, 2018 Indian tourism spots No Comments6 Mins Read
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    रामेश्वरम तमिलनाडु का एक अत्यंत खूबसूरत तीर्थ स्थल हैं। रामेश्वरम समुद्र की गोद में बसा एक बेहद सुंदर एवं दर्शनीय स्थल होने के साथ साथ एक तीर्थ स्थल भी है जो कि हिन्दू धर्मलम्बी के चार धामों में से एक धाम है। यहाँ प्रति वर्ष हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं के अपनी आस्थाओं में लिपटी भगवान के प्रति प्रेम को अर्पित करने के लिए रामेश्वरम एक महत्वपूर्ण एवं आकर्षक शहर चेन्नई से लगभग 592 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है।

    ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान राम लंका जीतकर वापस लौटे तो उन्होंने भगवन शिव के प्रति अपनी प्रेम भावना को प्रदर्शित करने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यह मंदिर विश्व के उन बेहतरीन कलात्मक शैलीयों एवं आस्थाओं से सराबोर मंदिरों में से एक है।
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    रामेश्वरम शहर
    यदि हम प्राकृतिक सौंदर्य की बात करें तो हमें यही कहना पड़ेगा कि  उसमे रामेश्वरम का उल्लेख करना आवश्यक हो जाता है इसके साथ ही साथ यह हिन्दू धर्मालंबियों के चारधामों में से एक तीर्थ स्थान एवं धाम भी है। सीपें, शंख और कोड़ियाँ इत्यादि इत्यादि वस्तुएं यहाँ समुद्र में बहुत मिलती हैं जो पर्यटकों को यहाँ ठहरने को मजबूर करते हैं। अगर आप रामेश्वरम आने की सोच रहे हैं तो यहाँ समुद्र में सफ़ेद रंग का बड़ियास मूंगा भी यहाँ पर आपको मिल जायेगा वास्तव में रामेश्वरम के अत्यंत खूबसूरत दृश्य आँखों में कैद करने जैसा होता है।
    रामनाथ स्वामी मंदिर
    टी रामनाथ स्वामी मंदिर समुद्रतट पर स्थित वास्तुकला का जीता जागता उदाहरण है। जो कि माना जाता है कि कई शासकों ने इसे 12 वीं शताब्दी में बनवाया था। यूँ तो इस मंदिर की कलात्मक शैली विश्वभर में मशहूर है ही साथ ही इसका गलियारा भी पर्यटकोंबी को अपनी ओर आकर्षित करता है।
    बाईस कुण्ड
    रामनाथ मंदिर में यह बाईस कुण्ड के शेष बचे हैं बताया जाता है कि पहले यह कुण्ड 24 थे परन्तु किसी वजह से 2 कुण्ड सूख गए जिनमे अब बस 22 बचे हुए हैं। यह कुण्ड पवित्र तीर्थों में से एक हैं। यह भी माना जाता है कि इन कुंडों में स्नान करने से पाप धूल जाते हैं।
    यात्रा का रथ
    रामेश्वरम में यात्रा का रथ दर्शनीय है। यहाँ शिव जी की मूर्तियों की भांति माता पार्वती की भी दो मूर्तियां हैं। इन दोनों मूर्तियों को अलग अलग नाम से पुकारा जाता है। पहली मूर्ति पर्वतवर्द्धिनी और दूसरी मूर्ति विशालाक्षी के नाम से सम्बोधित की जाती हैं।
    कोदंडाराम स्वामी का मंदिर
    ऐसा कहा जाता है कि इसी स्थान पर भगवान राम से जब विभीषण मिले थे इसीलिए इसी जगह पर यह कोदंडाराम स्वामी मंदिर स्थापित है। यह धनुष्कोटि से तक़रीबन 8 किलोमीटर की दूरी पर स्तिथ है जो एक दर्शनीय स्थल है।
    विल्लीरणि तीर्थ
    विल्लीरणि तीर्थ रामेश्वरम के एक तीर्थ स्थलों में से एक है। यूँ तो रामेश्वरम में कदम कदम पर कई तीर्थ स्थल हैं उन सभी तीर्थ स्थलों की अपनी एक अलग अलग मान्यताएं हैं। उन्हीं  विल्लीरणि तीर्थों में से एक है।
    कोरल रीफ
    कोरल रीफ कुदरत के करिश्मों में से एक है यह अत्यंत प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्थल है। यहाँ दूर दूर तक फैली सुनहरी रेत एवं उसपर नारियल के ऊँचे ऊँचे वृक्षों की सुंदरता इसको और भी मनमोहक बना देता हैं। कोरल रीफ में अधिकतर पर्यटक मछली पकड़ने के चाह में भी आते हैं।
    अग्नि तीर्थम
    अग्नि तीर्थम का जल बेहद स्वच्छ व शांत गति से वहने वाला जल है। यहाँ पर आने वाले पर्यटक शांतिपूर्वक बैठकर इसकी स्वछता को निहारते रहते हैं। यदि आप भी रामेश्वरम जाना चाहते हैं तो अवश्य ही यहाँ पर आएं यह रामस्वामी मंदिर से 100 मीटर की दूरी पर है।
    सेतु माधव
    सेतु माधव कहलाने वाले शिवजी का मंदिर रामेश्वरम के मंदिरों में से एक है। वैसे तो रामेश्वरम का मंदिर भगवान शिव जी की ही मंदिर है लेकिन इसके अंदर कई और भी दर्शनीय मंदिर हैं।
    धनुषकोटि
    धनुषकोटि समुद्रतट पर स्थित एक दर्शनीय स्थल है यहाँ पर भगवान राम, लक्ष्मण, विभीषण एवं हनुमान की मूर्तियां स्थापित हैं। धनुषकोटि रामेश्वरम से लगभग18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह भी एक  दर्शनीय स्थल है।
    तिरुपलानी
    तिरुपलानी मंदिर अपनी कलात्मक शैली एवं नक्काशी और कलात्मक पक्ष के लिए विश्व प्रसिद्ध है यह दर्शनीय है। प्राकृतिक सुंदरता की दृष्टि से भी यह सुन्दर है। पर्यटक यहाँ आकर मन की शान्ति पा सकते हैं।
    गंधाधन परवतम
    गंधाधन पर्वतम् रामेश्वरम का ऊंचा स्थल तो है ही साथ ही यह रामेश्वरम मंदिर से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। यहाँ से आप पूरे समुद्र द्वीप का अद्भुत आकर्षण नज़ारा देख सकते हैं।
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    सीता कुण्ड
    कहा जाता है कीं अगर सीता कुण्ड में जो स्नान करे उसके सारे पाप धुल जाते हैं। यूँ तो रामेश्वरम में बहुत से ऐसे कुण्ड हैं जिनकी अपनी व्याख्या और अपना मत व आस्था है। उनमे से सीता कुण्ड भी एक है जो की दर्शनीय है।

     

    वैज्ञानिक एवं विदेशी पर्यटक भी हुए हैं आकृष्ट

    सीताकुंड ने वैज्ञानिकों और विदेशी पर्यटकों का भी ध्यान आकृष्ट किया है। कुंड की लंबाई और चौड़ाई 20 फीट है। कुंड 12 फीट गहरा है। गर्मजल का झरना एक पथरीले सतह से निकल कर पूरब की दिशा में प्रवाहित होता है। अंगे्रज पर्यटक टाइफेन्थलर ने 1765 ई. में यहां के जल का परीक्षण कर कहा था कि सीताकुंड का जल आठ महीने तक शुद्ध रहता है। ग्रीष्म ऋतु में जल का तापमान कम हो जाता है। भूगर्भशास्त्री बूचनन 1811 ई. में सीताकुंड आए थे। उन्होंने सात अप्रैल को सूर्योदय के बाद खुली हवा में तापमान 60 फारेनहार्ट और जल के बुलबुले वाले स्थान पर 130 फारेनहार्ट तापमान पाया। 1764 ई. में यहां आए मि. टिवींग ने अपनी यात्रावृतांत में सीताकुंड के जल की शुद्धता की चर्चा करते हुए कहा था कि समुद्र यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को सीताकुंड का जल उपलब्ध कराया जाता था, क्योंकि यहां का जल आठ महीने तक शुद्ध रहता है।

     सागर तट पर स्नान करते श्रद्धालु
    बड़ी आस्था से यहाँ पर्यटक रामेश्वरम के मंदिर में अपनी हाज़िरी लगाने आते हैं। हज़ारों श्रद्धालु यहाँ स्नान करते हैं। यहाँ कदम कदम पर मंदिर होने की वजह से हर जगह काफी भीड़ उमड़ी रहती है। यहाँ भगवानों की मूर्तियां दर्शनीय हैं।
    आदि सेतु
    कहा जाता है की भगवान राम ने इसी स्थान पर सेतु बांधना शुरू किया था इसलिए इस जगह को आदि सेतु के नाम से जाना जाता है। इसे दर्भशयनम् के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है।
    वायु मार्ग द्वारा
    अगर आप रामेश्वरम फ्लाइट द्वारा जाने की सोच रहे हैं और जानिये वायु यात्रा की सभी जानकारियां।
    रेल मार्ग द्वारा
    रामेश्वरम जाने वाली सभी रेल सुविधाओं की, रामेश्वरम चेन्नई,कोयम्बटूर,तरुचि और तंजावुर शहरों से सीधा जुड़ा हुआ है। इन नगरों से रेल मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। कुछ रेल गाड़ियां इस तरह हैं- कोयम्बटूर से रामेश्वरम के लिए-6115 कोयम्बटूर-रामेश्वरम एक्सप्रेस, चेन्नई से रामेश्वरम के लिए- 6701 रामेश्वरम सेतु एक्सप्रेस।
    संकलन: जी के चक्रवर्ती

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