हमारे स्कूल में एक गणित के अध्यापक हुआ करते थे। वे छोटे बच्चों को यानि कि कक्षा चार से कक्षा आठ तक के बच्चों को गणित पढ़ाते थे। एक दिन उन्होंने कक्षा में पढ़ाने के लिये प्रवेश किया, उस क्लास के सभी बच्चे उनके सम्मान में अपने-अपने कुर्सी से उठ खड़े हुए। बच्चों ने देखा कि अध्यापक आज बहुत खुश नजर आ रहे थे उन्होंने पढ़ना शुरू किया, उस अध्यापक ने बच्चों से कहा कि आज मैं आपको कुछ नया पाठ सिखाऊंगा।
टीचर ने ब्लैक बोर्ड पर लिखना प्रारम्भ किया –
9×1=7
9×2=18
9×3=27
9×4=36
ब्लैक बोर्ड पर लिखकर अध्यापक जैसे ही बच्चों की तरफ मुड़े तो अध्यापक ने देखा कि बच्चे उनकी गलती को देख कर मुस्कुरा रहे थे क्योंकि पहली ही लाइन में उन्होंने गलती कर दी थी। बच्चों इस तरह मुस्कुराता देख कर टीचर बोले कि बच्चों ये गलती मैंने जान बूझकर की है आज मैं आप लोगों को एक प्रेरक पाठ को बताने वाला हूँ।
मैंने 3 लाइन सही लिखीं लेकिन तुम मे से किसी भी बच्चे ने मेरी प्रशंसा नहीं की लेकिन जैसे ही मैंने एक लाइन गलत लिखी, आप सभी लोग मेरी इस गलती पर हंसी उड़ाने लगे। इसी तरह जब तुम कोई सही काम कर रहे होगे तो कोई भी तुम्हारी प्रशंसा नहीं करेगा लेकिन जैसे ही तुम एक गलती कर दोगे तो उस पर सभी लोग तुम्हारा मजाक उड़ाते हुये हंसने लगेंगे। आज कल तो लगता है कि लोग आपके द्वारा गलती करने के ताक में रहते हैं। लेकिन हमारे समाज की ऐसे सभी बातों से अपना आत्मविश्वास खोना नही चाहिये, बल्कि पहले से और अधिक मजबूती एवं मनोबल के साथ आगे की ओर अग्रसर होने चाहिये। प्यारे बच्चों इस कहानी की यही शिक्षा है।
मित्रों यह वास्तविक सच्चाई है कि समाज मे लोग आपके विषय में सच और अच्छा सुनने के लिए तैयार नही इसलिए बाद में आप पर संदेह करेंगें और मजाक उड़ायेंगे परन्तु आपके विषय मे गलत सुन कर उस पर तुरंत विश्वास कर लेंगे। हमें इसी तरह प्रकार की कुछ ऐसी किस्से कहानियां सुनने को लिलेंगे कि किसी शहर में तीन मित्र उआ करते थे एक दिन वे आपस मे बात कर रहे थे कि-
पहला मित्र – अरे यार वो अपना दोस्त सुधीर हुआ करता था न! उसकी तो किसी बहुत बड़ी कंपनी में नौकरी लग गयी उसकी तनख्वा तो सत्तर हजार रुपये है।
दूसरा मित्र ने हँसते हुये कहा– अरे वह झूठ बोल रहा, आज के समय मे इतनी बड़ी कंपनी में नौकरी मिलना इतना आसान काम नहीं है।
तीसरा मित्र इन दोनों की सुनकर बोला– अरे यार कल तो मैंने उसे रास्ते पर पैदल घर की ओर जाता हुआ दिखाई दिया था, अगर उसे सत्तर हजार पगार की नौकरी मिल रही होती तो वह क्या पैदल घर जा रहा होता? अरे वो झूठ बोल रहा है उसे इतनी बड़ी नौकरी वगैरह कुछ नही मिला होगा वह हाँक रहा होगा।
आपने देखा कि किसी भी मित्र को इस बात पर यकीन नहीं आया। और आगे –
पहला वाला मित्र – यार वो अपना दोस्त पढाकू रवि था ना उसको कल नौकरी से निकाल दिया गया है।
दूसरा मित्र – ओह-हो यह तो बहुत बुरा हुआ उसके साथ वैसे रवि तो पढ़ाई में बहुत तेज था लेकिन वह थोड़ा सा टेक्निकली कमजोर (technically weak) था उसे ज्यादा ज्ञान नही था।
इस पर तुरन्त तीसरा मित्र बोला – अवे मुझे तो पहले ही पता था कि वह नौकरी-वौकरी नहीं कर पायेगा।
आप लोगो ने देखा सभी मित्रों ने उसके इस बात को झट कैसे यकीन कर लिया। यह कोई बनायीं हुई बातें नहीं है यही आज के समाज की सच्चाई है।
- जी के चक्रवर्ती







