धन जुटाने के लिए यू-ट्यूब का प्रयोग करेगा लविवि, सभी विषयों के लेक्चर होंगे अपलोड

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  • भारत का पहला अनुभव होगा, हर लेक्चरर को अपलोड करना, इससे बढ़ेगी प्रतियोगिता
  • कुलपति ने कहा, हर एक से मांगा जाएगा सहयोग

उपेंद्र नाथ राय

लखनऊ, 21 जनवरी, 2020: किसी भी विश्वविद्यालय के दो भाग होते हैं, एक साफ्टवेयर और दूसरा हार्डवेयर। हम अभी सुधार की प्रक्रिया में साफ्टवेयर पर ध्यान दे रह हैं। इसके लिए सभी कर्मचारियों और अध्यापकों से भरपुर सहयोग मिल रहा है। इसके तहत पहला कार्य हमने सभी विभागों से लेक्चरार यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड करने के लिए कहा है। यह भारत का पहला अनुभव होगा। ये बातें लखनऊ विश्वविद्यालय में नव नियुक्त कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने मीडिया से एक वार्ता में कही।

उन्होंने कहा कि यू-ट्यूब अपलोड करने का मकसद सिर्फ छात्रों को सुविधा उपलब्ध कराना नहीं है। इसका सब्सक्राइबर बढ़ाकर इससे धनार्जन करना मूल मकसद है। इससे विभागों में आपसी प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय को धन भी प्राप्त होगा और विद्यार्थियों को भी इसका फायदा मिलेगा। इसके प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां उम्मीद से ज्यादा लोगों का सहयोग मिल रहा है। अब पता चल रहा है कि यहां कि नींव कितनी मजबूत है।

कैंपस में 26 हजार पौधे लगाने की तैयारी:

प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने कहा कि हमारा ध्यान एकेडमिक माहौल को बेहतर बनाने के साथ ही पर्यावरण को भी अपनी तरफ से ठीक करने की कोशिश है। इसके लिए हम सभी ने 26 जनवरी काे विश्वविद्यालय 26 हजार पेड़ लगाने का फैसला किया है। इसके साथ ही कार्बन क्रेडिट प्राप्त करने की भी कोशिश होगी। इससे हम जितना वातावरण ठीक करने के लिए पाजेटिव कंट्रेटिव करते हैं, उसका उतना हमें फायदा होगा। इसके लिए भी तैयारी पूरी कर ली गयी है।

अंतरविषयी शोध को बढ़ावा:

प्रोफेसर राय ने बताया कि रिसर्च सेंटर पर विशेष ध्यान देने की भी बात की जा रही है। शोध को हम ज्यादा बढ़ावा देंगे। इसके लिए अपने संकायाध्यक्षों से कहा गया है। हम अंतरविषयी शोध को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं, जिससे एक-दूसरे से विभाग जुड़ते हुए आगे बढ़ने का काम करें। इसके लिए हमने शिक्षकों से आग्रह किया है कि इस पर एक योजना बनाएं। उनके द्वारा पूरा ब्यौरा बनाने के बाद उस पर अध्ययन कर आगे की योजना बनाई जाएगी।

होगी एकेडमिक आडिट:

प्रोफेसर राय ने कहा कि हम एकेडमिक आडिट भी कराने जा रहे हैं। किस विषय की उपयोगिता कितनी है। उसके पढ़ने के बाद राेजगार के लिहाज से कितना फायदा है। बाजार में कितनी उपयोगी साबित होगी। उसमें शिक्षक को कितना तवज्जो देना चाहिए आदि के विषय में ब्योरा तैयार कर, उस हिसाब से आगे की प्लानिंग की जाएगी। उस विभाग में उसी हिसाब से कर्मचारी और अध्यापक की व्यवस्था होगी।

विकास कार्य के लिए कई मंत्रियों से मांगे सहयोग:

कुलपति ने कहा कि हम मदन मोहन मालवीय जी के विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। हम हर एक से सहयोग मांगकर विद्यालय की नींव खड़ा करने पर विश्वास करते हैं। इसके लिए हमने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से विश्वविद्यालय कैंपस में गर्ल्स टायलेट बनवाने का आग्रह किया है। महिला कल्याणमंत्री स्वाती सिंह से गर्ल्स टायलेट में वेंडिंग मशीन लगवाने के लिए आग्रह किया है। इसी तरह एक दिन परिवहन मंत्री से भी मिला और विश्वविद्यालय में एक बस चलवाने का आग्रह किया।

मिला पाजेटिव रिस्पांस:

उन्होंने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय में एक डिस्पेंसरी है, जो विद्यार्थियों के लिए नाकाफी है। हम एक दिन स्वास्थ्यमंत्री से मिले और उनसे एक प्राइमरी हेल्थ सेंटर बनवाने की मांग की। हर जगह हमें पाजेटिव रिस्पांस मिला है। आने वाले कुछ दिनों में ही विश्वविद्यालय में कुछ नया बदलाव देखने को मिलने लगेगा।

कमेटियों में छात्रों की भी होगी भागीदारी:

कुलपति ने कहा कि आगे बनने वाली अधिकांश कमेटियों में छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उनका मशविरा भी विश्वविद्यालय के विकास में शामिल किया जा सके। इसके लिए नई बनने वाली समितियों में शामिल भी किया जा रहा है। उन्होंने हिन्दुस्थान समाचार से वार्ता में कहा कि कोई भी स्टक्चर फ्रेम वर्क होना चाहिए। काम व्यक्ति आधारित न होकर, व्यवस्था आधारित हो तो बेहतर होगा। जिसका जो काम है, उसका निपटारा उसी स्तर पर हो जाना चाहिए।

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