इसरो का सबसे पावरफुल उपग्रह जीसैट-30 देगा 5जी की स्पीड से इंटरनेट

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जी के चक्रवर्ती

17 जनवरी के दिन जिसैट उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद हमारे भारत मे 5जी तकनीक के आ जाने से से लोगों को ऑप्टिकल फाइबर के बिना ही उच्च गति वाली इंटरनेट की सुविधा मिलने लगेगी। यह भी भारत की एक बड़ी उपलब्धि है। 

भारत में चीन की कंपनी हुआवे को 5जी परीक्षण करने की सैद्धांतिक मंजूरी दिया जाना कुछ सुरक्षा के कारणों की वजह से अभी तक भारत इससे दूरी बनाये हुआ था लेकिन वहीं पर विश्व के अन्य अमेरिका जैसे देशों मे चीन की इस कंपनी पर कुछ कारणों से प्रतिबंध लगा रखा है।

दरअसल हमारे यहां 5जी तकनीकी से लोगों को अनेको सुविधाएं मिलने लगेंगी इसके साथ ही साथ हम ऑप्टिकल फाइबर का सहारा लिए बिना ही (ऑप्टिकल फाइबर को बनाने में प्लास्टिक एवं कांच के रेशों का उपयोग किया जाता है।) हमारे देश के लोगों को गुणवत्ता पूर्ण एवं उच्चतम गति की इंटरनेट प्राप्त होने लगेगी। इस तकनीक के उपयोग में आने के बाद से हमारे देश के लोगों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी चीजें हाइटेक हो जाएंगी।

इस बेतार (वायरलेस) तकनीक के लिए स्पेक्ट्रम की निन्म आवृत्ति (लोअर फ्रीक्वेंसी) बेंड का प्रयोग होता था, जिसकी दूरी अधिक होती है। वहीं हमारे देश के उद्योगों में 5जी नेटवर्क के लोअर फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम इस्तेमाल करने के विषय में सोचा जा रहा है। इससे नेटवर्क ऑपरेटरों अपने पुराने सिस्टम का इस्तेमाल करना जारी रख सकेंगे जो कि उनके पास पहले से ही मौजूद है। इसमें इंटरनेट की गति चौथी जनरेशन से 10 से 20 गुना तक अधिक गति वाली होगी।

वहीं पर यदि हम 5जी तकनीक की बात करें तो यह पूरी तरह से 4जी तकनीक से अलग तरह की होगी। यह शुरुआत में अपने वास्तविक गति से काम करेगी या नहीं, यह अभी भी तो तय नहीं है क्योंकि यह सब कुछ टेलीकॉम कंपनियों के निवेश और आधारभूत संरचना (Infrastructure ) के ऊपर ही निर्भर करता है। फिलहाल 4जी इंटरनेट पर सर्वाधिक 45 एमबीपीएस की ही गति मिलना संभव है।

वहीं पर जब हम बात करते हैं 5G तकनीक की तो इसके कुछ नुकसान भी है जहां 3जी का सबसे बड़ा फायदा यह था कि यह सेल टॉवर्स कम सेल्स के साथ भी एक बड़े क्षेत्र को आच्छादित (cover) करने में सक्षम हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि 3जी नेटवर्क को ज्यादा बैंडविथ की जरूरत नहीं पड़ते थे। इसके बाद जब 4जी तकनीक हमारे पहुंच तक आया तो उसके सेल्स ने ज्यादा चौड़े बैंड का उत्पन्न करना शरू कर दिया, जिसके कारण प्रत्येक सेल का आच्छादन क्षेत्र कम हो गया।

इससे उपयोगकर्ता ने अनुभव किया कि 3जी नेटवर्क के मुकाबले 4जी नेटवर्क पर कवरेज की ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में 5जी नेटवर्क के आ जाने से यह सिलसिला आगे भी चलता रह सकता है क्योंकि ज्यादा सेल टॉवर्स को ज्यादा चौड़े बैंडे का उत्पादन करना होता है जिसके कारण इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी परेशानी पैदा कर सकती हैं।

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