डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन था… फिर भी झुंझुनू पुलिस ने कर दिखाया!
झुंझुनू (राजस्थान), 28 अक्टूबर 2025: “उम्र कोई माफी नहीं देती, जब अपराधों की फेहरिस्त इतनी लंबी हो।” यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है 72 वर्षीय कुख्यात अपराधी रामेश्वर सिंह उर्फ ‘बुजुर्ग डॉन’ पर। संगठित अपराध, हत्या, जबरन वसूली और अंतरराष्ट्रीय माफिया गतिविधियों के आरोपों में 12 देशों की पुलिस इस ‘शातिर दानव’ को तलाश रही थी। लेकिन राजस्थान के झुंझुनू जिले की पुलिस ने एक मुखबिर की सूचना पर छापा मारकर उसे उसके छिपने के अड्डे से धर दबोचा। यह गिरफ्तारी न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक अपराध नेटवर्क के खिलाफ एक झटका है।
अपराधी कौन? बुजुर्ग चेहरे के पीछे का खौफनाक अतीत
रामेश्वर सिंह, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के रहने वाले, 1970 के दशक से अपराध की दुनिया में सक्रिय हैं। सतह पर वे एक साधारण रिटायर्ड बिजनेसमैन लगते हैं—सफेद दाढ़ी, चश्मा और सादा कुर्ता—लेकिन उनके नाम पर दर्ज अपराधों की सूची डरावनी है। 12 देशों (भारत, कनाडा, अमेरिका, यूएई, थाईलैंड, दुबई, सिंगापुर, मलेशिया, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और पाकिस्तान) में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस जारी थे।

रामेश्वर के प्रमुख अपराध:
- हत्या और जबरन वसूली: 1980-90 के दशक में उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कम से कम 15 हत्याओं में संलिप्त, जिनमें गवाहों को खामोश करने के लिए टारगेटेड किलिंग शामिल हैं।
- संगठित अपराध: हथियार तस्करी, ड्रग्स और मानव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय रैकेट का सरगना। कनाडा और अमेरिका में पंजाबी डायस्पोरा से फिरौती वसूलने के कई मामले।
- माफिया गतिविधियां: दुबई और थाईलैंड से संचालित नेटवर्क के जरिए भारत में ‘प्रोटेक्शन मनी’ वसूली। 2020 में नेपाल में एक व्यापारी की हत्या का मास्टरमाइंड।
- कुल केस: भारत में 47, विदेशों में 23- कुल 70 से अधिक। इनाम: भारत में 50 लाख, इंटरपोल पर 2 लाख डॉलर।
रामेश्वर 2015 से फरार थे, जब दिल्ली पुलिस ने उनके एक साथी की गिरफ्तारी के बाद रेड अलर्ट जारी किया। वे झुंझुनू के एक छोटे से गांव में रिश्तेदारों के घर छिपे हुए थे, जहां वे ‘साधु’ बनकर रहते थे। पुलिस के अनुसार, वे डिजिटल माध्यमों से अपने गैंग को निर्देश देते थे, लेकिन स्थानीय मुखबिर की मदद से उनकी लोकेशन ट्रेस हो गई।
गिरफ्तारी की पूरी कहानी: सतर्कता और सटीकता का कमाल
झुंझुनू एसपी अनिल कुमार के नेतृत्व में एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 27 अक्टूबर की रात को ऑपरेशन चलाया। मुखबिर ने बताया कि रामेश्वर एक पुराने हवेली में छिपा है और अगले दिन दुबई भागने की योजना बना रहा था। पुलिस ने घेराबंदी की, लेकिन अपराधी ने भागने की कोशिश की। एक छोटे से संघर्ष के बाद उसे धर दबोचा गया। उसके पास से फर्जी पासपोर्ट, 5 लाख नकद, दो पिस्टल और इंटरपोल नोटिस की कॉपी बरामद हुई।
एसपी अनिल कुमार ने कहा, “उसकी उम्र देखकर कोई सोच भी नहीं सकता कि यह शख्स इतने बड़े अपराधी नेटवर्क का बॉस है। लेकिन हमारी खुफिया तंत्र ने साबित कर दिया कि अपराध की कोई उम्र नहीं। यह गिरफ्तारी इंटरपोल के साथ सहयोग से संभव हुई।” गिरफ्तारी के बाद रामेश्वर को 14 दिन की रिमांड पर लिया गया है, और प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कनाडा और यूएई पुलिस ने तुरंत संपर्क किया है।
अपराध पर लगाम लगाने की मिसाल
यह गिरफ्तारी झुंझुनू पुलिस के लिए मील का पत्थर है, जो पहले साइबर फ्रॉड और लोकल गैंग्स पर फोकस करती रही। अब अंतरराष्ट्रीय मामलों में उनकी भूमिका बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग अपराधी अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं, लेकिन यह केस साबित करता है कि सतर्कता जरूरी है। रामेश्वर के गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है, और पुलिस ने अलर्ट जारी किया है।
परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि वे रामेश्वर को ‘सज्जन बाबा’ मानते थे, लेकिन सच्चाई सामने आने पर सदमा लगा। यह घटना याद दिलाती है: “चेहरे से मत जज करो, अपराध छिपा हो सकता है।” फ़िलहाल यह सफलता पुलिस और इंटरपोल के सहयोग का प्रतीक है। आगे की जांच में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।






